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चारों तरफ दिखी माह-ए-रमजान की खुमारी
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Mon, 29 May 2017 02:13 AM IST
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दिनभर रोजा रखने के बाद शाम को इफ्तार करते रोजेदार।
- फोटो : Amar Ujala
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सहरी का मजा, इफ्तार की लज्जत, कुरआन शरीफ की तिलावत, नमाज का वसूल, रोजे की रूहानियत लेकर फि र आ गया रमजान-ए-मुबारक का नूर। चारों तरफ माह-ए-रमजान की खुमारी है। रविवार सुबह तड़के लोगों ने मिलकर सहरी खाई। तहज्जुद की नमाज पढ़ने के बाद फ ज्र की नमाज अदा की। कुरआन शरीफ की तिलावत की। सुबह से ही लोग इबादत में मशगूल हुए तो यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा। शहर की हर मस्जिद में नमाजियों का तांता लगा रहा। घरों में महिलाओं ने नमाज पढ़ी व कुरआन शरीफ की तिलावत की।
चूकि रमजान के तीस दिनों को तीन हिस्सों में बांटा गया है यानी रहमत, मगफि रत और जहन्नुम से आजादी। पहला अशरा रहमत का चल रहा है, इसलिए सभी अल्लाह की रहमत से मालामाल होना चाह रहे हैं। जोहर की नमाज के बाद लोगों ने बाजार की तरफ रुख किया। इफ्तारी के तमाम सामानों की खरीदारी की। इसके बाद घरों में महिलाओं ने इफ्तार के विभिन्न पकवानों को बनाना शुरू किया। असर की नमाज घरों व मस्जिदों में अदा की गई।
इफ्तार तैयार होने के बाद मुसाफि रों व गरीबों के लिए मस्जिदों में भेजी गई। शाम को सभी ने इफ्तार कर दुआ मांगी। तरह-तरह के शर्बत, चिप्स, चना, पकौड़ियां व फ ल वगैरह ने दिन भर की भूख को छू मंतर कर दिया। इफ्तार करने के बाद छोटे से लेकर बड़ों ने मगरिब की नमाज अदा की। थोड़ा आराम किया फि र रात में ऐशा, तरावीह, वित्र एवं नफ ील नमाज पढ़ी। यह शमां पूरे माह इसी तरह बरकरार रहेगा।
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इफ्तार कराने वाले को मिलता है रोजेदार के बराबर सवाब
मदरसा अध्यापक नवेद आलम ने बताया कि रमजान माह में मोमिन का रिज्क बढ़ा दिया जाता है, जो रोजेदार को इफ्तार कराए उसके गुनाहों के लिए मगफि रत (बख्शीश) है। इफ्तार करने वाले को वैसा ही सवाब मिलेगा जैसा रोजा रखने वालों को मिलेगा। रसूल्लाह ने फ रमाया अल्लाह ताला यह सवाब उस शख्स को देगा जो एक घूंट दूध या एक खुरमा (छुहारा) या एक घूंट पानी से इफ्तार कराए या जिसने रोजेदार को भरपेट खाना खिलाया। उसको अल्लाह ताला मेरे हौज से पिलाएगा कि कभी प्यासा न होगा, यहां तक कि जन्नत में दाखिल हो जाए।
नौकर से कम काम लेने वाले को भी सवाब
मुफ्ती अख्तर हुसैन ने बताया कि यह वह महीना है कि इसका अव्वल रहमत है। इसका औसत मगफि रत है और उसका आखिर जहन्नुम से आजादी है। जो अपने नौकर पर इस महीने में काम में कमी करे, अल्लाह ताला उसे बख्श देगा और उसे जहन्नुम से आजादी फ रमाएगा। जन्नत के आठ दरवाजे हैं, उनमें एक दरवाजे का नाम रय्यान है, इस दरवाजे से वही जाएंगे जो रोजे रखते हैं।
रमजान की रातों में इबादत से गुनाह होंगे माफ
हाफिज रेयाज अहमद ने बताया कि जो ईमान की वजह से और सवाब के लिए रमजान की रातों का कयाम (जाग कर इबादत) करेगा, उसके अगले- पिछले गुनाह बख्श दिए जाएंगे और जो ईमान की वजह से और सवाब के लिए शब-ए-कद्र की रातों में कयाम करेगा। उसके अगले पिछलेे गुनाह बख्श दिए जाएंगे। रसूल्लाह फ रमाते हैं कि इस माह आदमी के हर नेक काम का बदला दस से सात सौ गुना तक दिया जाता है।
रोजे की जजा अल्लाह: हाफिज नजरे
हाफि ज नजरे आलम कादरी ने बताया कि अल्लाह तआला ने फ रमाया कि बंदा रोजा मेरे लिए है और उसकी जजा (प्रतिफल) मैं दूंगा। बंदा अपनी ख्वाहिश और खाने को मेरी वजह से तर्क करता है रोजादार के लिए दो खुशियां है एक इफ्तार के वक्त और एक अपने अल्लाह से मिलने के वक्त और रोजा सिपर ढाल है। जब किसी के रोजे का दिन हो तो न बेहूदा बात करें और न चीखे फि र अगर उससे कोई गाली गलौच करे या लड़ने पर आमादा हो तो कह दे मैं रोजादार हूं।
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चूकि रमजान के तीस दिनों को तीन हिस्सों में बांटा गया है यानी रहमत, मगफि रत और जहन्नुम से आजादी। पहला अशरा रहमत का चल रहा है, इसलिए सभी अल्लाह की रहमत से मालामाल होना चाह रहे हैं। जोहर की नमाज के बाद लोगों ने बाजार की तरफ रुख किया। इफ्तारी के तमाम सामानों की खरीदारी की। इसके बाद घरों में महिलाओं ने इफ्तार के विभिन्न पकवानों को बनाना शुरू किया। असर की नमाज घरों व मस्जिदों में अदा की गई।
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इफ्तार तैयार होने के बाद मुसाफि रों व गरीबों के लिए मस्जिदों में भेजी गई। शाम को सभी ने इफ्तार कर दुआ मांगी। तरह-तरह के शर्बत, चिप्स, चना, पकौड़ियां व फ ल वगैरह ने दिन भर की भूख को छू मंतर कर दिया। इफ्तार करने के बाद छोटे से लेकर बड़ों ने मगरिब की नमाज अदा की। थोड़ा आराम किया फि र रात में ऐशा, तरावीह, वित्र एवं नफ ील नमाज पढ़ी। यह शमां पूरे माह इसी तरह बरकरार रहेगा।
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इफ्तार कराने वाले को मिलता है रोजेदार के बराबर सवाब
मदरसा अध्यापक नवेद आलम ने बताया कि रमजान माह में मोमिन का रिज्क बढ़ा दिया जाता है, जो रोजेदार को इफ्तार कराए उसके गुनाहों के लिए मगफि रत (बख्शीश) है। इफ्तार करने वाले को वैसा ही सवाब मिलेगा जैसा रोजा रखने वालों को मिलेगा। रसूल्लाह ने फ रमाया अल्लाह ताला यह सवाब उस शख्स को देगा जो एक घूंट दूध या एक खुरमा (छुहारा) या एक घूंट पानी से इफ्तार कराए या जिसने रोजेदार को भरपेट खाना खिलाया। उसको अल्लाह ताला मेरे हौज से पिलाएगा कि कभी प्यासा न होगा, यहां तक कि जन्नत में दाखिल हो जाए।
नौकर से कम काम लेने वाले को भी सवाब
मुफ्ती अख्तर हुसैन ने बताया कि यह वह महीना है कि इसका अव्वल रहमत है। इसका औसत मगफि रत है और उसका आखिर जहन्नुम से आजादी है। जो अपने नौकर पर इस महीने में काम में कमी करे, अल्लाह ताला उसे बख्श देगा और उसे जहन्नुम से आजादी फ रमाएगा। जन्नत के आठ दरवाजे हैं, उनमें एक दरवाजे का नाम रय्यान है, इस दरवाजे से वही जाएंगे जो रोजे रखते हैं।
रमजान की रातों में इबादत से गुनाह होंगे माफ
हाफिज रेयाज अहमद ने बताया कि जो ईमान की वजह से और सवाब के लिए रमजान की रातों का कयाम (जाग कर इबादत) करेगा, उसके अगले- पिछले गुनाह बख्श दिए जाएंगे और जो ईमान की वजह से और सवाब के लिए शब-ए-कद्र की रातों में कयाम करेगा। उसके अगले पिछलेे गुनाह बख्श दिए जाएंगे। रसूल्लाह फ रमाते हैं कि इस माह आदमी के हर नेक काम का बदला दस से सात सौ गुना तक दिया जाता है।
रोजे की जजा अल्लाह: हाफिज नजरे
हाफि ज नजरे आलम कादरी ने बताया कि अल्लाह तआला ने फ रमाया कि बंदा रोजा मेरे लिए है और उसकी जजा (प्रतिफल) मैं दूंगा। बंदा अपनी ख्वाहिश और खाने को मेरी वजह से तर्क करता है रोजादार के लिए दो खुशियां है एक इफ्तार के वक्त और एक अपने अल्लाह से मिलने के वक्त और रोजा सिपर ढाल है। जब किसी के रोजे का दिन हो तो न बेहूदा बात करें और न चीखे फि र अगर उससे कोई गाली गलौच करे या लड़ने पर आमादा हो तो कह दे मैं रोजादार हूं।