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दरकते रिश्तों के बीच ‘पुल’ बनी पुलिस
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दरकते रिश्तों के बीच ‘पुल’ बनी पुलिस
गरिमा शाही
गोरखपुर। पति-पत्नी के बीच छोटी सी बात मन में घर गई तो कई बार रिश्ते टूटने के कगार पर पहुंच जाते हैं, लेकिन दोनों को एक बार फिर साथ लाने की ईमानदार कोशिश की जाए तो बात बनने में समय नहीं लगता। कुछ ऐसा नजारा इन दिनों महिला थाने में देखने को मिल रहा है। यहां पर टूटने की कगार पर पहुंचे रिश्तों को जोड़ने के लिए कानून- मुकदमों का हथियार नहीं बल्कि सुलह समझौते का प्रयास किया जा रहा है। इसका असर भी हो रहा है। हाल के दिनों में सात ऐसी महिलाएं फिर से पति के साथ खुशी-खुशी रहने को राजी हो गईं, जो पति के खिलाफ कठोर कार्रवाई का प्रार्थना पत्र दे चुकीं थीं।
ंमसलन, चिलुआताल के जंगल नकहा नंबर एक में प्रीति और उनके पति के बीच अक्सर कहासुनी हो जाती थी। दोनों ने अलग होने का फैसला कर लिया। पत्नी शिकायत लेकर महिला थाने पहुंची तो पुलिस ने पति को बुलाया। दोनों को सामने बैठाकर पुलिस ने समझाया तो एक बार फिर खुशी-खुशी साथ रहने के लिए राजी हो गए। ऐसे ही एक मामले में नौसड़ निवासी सुनैना देवी और पति राहुल शर्मा के बीच मतभेद की वजह सिर्फ इतनी थी कि राहुल पत्नी की बात नहीं सुनते थे। इसी बात को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि दोनों ने अलग होने का फैसला कर लिया। बात महिला थाने तक पहुंची। यहां पर दोनों ने एक दूसरे की शिकायतें सुनीं, गलती का एहसास हुआ तो प्रार्थना पत्र वापस ले लिया। इसी तरह पति-पत्नी के एक अन्य विवाद में शाहपुर के अंसारी रोड निवासी पूजा गुप्ता को पति कन्हैया पर शक होने लगा था। मन में ही बात दबाए रखने से मामला इतना बढ़ गया कि तलाक की नौबत आ गई। परिवार के लोगों ने समझाने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। मामला महिला थाने पहुंच गया। मंगलवार को इस परिवार के बीच गिले-शिकवे दूर कराके समझौता कराया गया। दोनों ने साथ रहने का वादा किया। बुधवार को महिला थाने में ऐसे सात मामले निपटाए गए, उम्मीद की जा रही है कि दरकते रिश्ते फिर जुड़ जाएंगे।
पहला प्रयास घर रिश्ते बचाने का
कई लोग छोटी-छोटी बातों पर रिश्ता खत्म करने का फैसला कर लेते हैं। ऐसे कई प्रार्थना पत्र आते हैं। पहला प्रयास ऐसे रिश्तों को कानूनी जाल में फंसाने की जगह बातचीत के जरिए संवारने का होता है। दोनों परिवारों को सामने बैठाकर समझौता कराया जाता है। कुछ मामलों में इसका असर हो रहा है, दोनों पक्ष पिछली बातों को भूलकर साथ रहने को तैयार हो जाते है। बुधवार को ऐसे सात जोड़े फिर से साथ रहने को राजी हुए है। जो नहीं मानते उन मामलों में कानूनी कार्रर्वाई आगे बढ़ाई जाती है। -अर्चना सिंह, इंस्पेक्टर, महिला थाना
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गरिमा शाही
गोरखपुर। पति-पत्नी के बीच छोटी सी बात मन में घर गई तो कई बार रिश्ते टूटने के कगार पर पहुंच जाते हैं, लेकिन दोनों को एक बार फिर साथ लाने की ईमानदार कोशिश की जाए तो बात बनने में समय नहीं लगता। कुछ ऐसा नजारा इन दिनों महिला थाने में देखने को मिल रहा है। यहां पर टूटने की कगार पर पहुंचे रिश्तों को जोड़ने के लिए कानून- मुकदमों का हथियार नहीं बल्कि सुलह समझौते का प्रयास किया जा रहा है। इसका असर भी हो रहा है। हाल के दिनों में सात ऐसी महिलाएं फिर से पति के साथ खुशी-खुशी रहने को राजी हो गईं, जो पति के खिलाफ कठोर कार्रवाई का प्रार्थना पत्र दे चुकीं थीं।
ंमसलन, चिलुआताल के जंगल नकहा नंबर एक में प्रीति और उनके पति के बीच अक्सर कहासुनी हो जाती थी। दोनों ने अलग होने का फैसला कर लिया। पत्नी शिकायत लेकर महिला थाने पहुंची तो पुलिस ने पति को बुलाया। दोनों को सामने बैठाकर पुलिस ने समझाया तो एक बार फिर खुशी-खुशी साथ रहने के लिए राजी हो गए। ऐसे ही एक मामले में नौसड़ निवासी सुनैना देवी और पति राहुल शर्मा के बीच मतभेद की वजह सिर्फ इतनी थी कि राहुल पत्नी की बात नहीं सुनते थे। इसी बात को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि दोनों ने अलग होने का फैसला कर लिया। बात महिला थाने तक पहुंची। यहां पर दोनों ने एक दूसरे की शिकायतें सुनीं, गलती का एहसास हुआ तो प्रार्थना पत्र वापस ले लिया। इसी तरह पति-पत्नी के एक अन्य विवाद में शाहपुर के अंसारी रोड निवासी पूजा गुप्ता को पति कन्हैया पर शक होने लगा था। मन में ही बात दबाए रखने से मामला इतना बढ़ गया कि तलाक की नौबत आ गई। परिवार के लोगों ने समझाने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। मामला महिला थाने पहुंच गया। मंगलवार को इस परिवार के बीच गिले-शिकवे दूर कराके समझौता कराया गया। दोनों ने साथ रहने का वादा किया। बुधवार को महिला थाने में ऐसे सात मामले निपटाए गए, उम्मीद की जा रही है कि दरकते रिश्ते फिर जुड़ जाएंगे।
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पहला प्रयास घर रिश्ते बचाने का
कई लोग छोटी-छोटी बातों पर रिश्ता खत्म करने का फैसला कर लेते हैं। ऐसे कई प्रार्थना पत्र आते हैं। पहला प्रयास ऐसे रिश्तों को कानूनी जाल में फंसाने की जगह बातचीत के जरिए संवारने का होता है। दोनों परिवारों को सामने बैठाकर समझौता कराया जाता है। कुछ मामलों में इसका असर हो रहा है, दोनों पक्ष पिछली बातों को भूलकर साथ रहने को तैयार हो जाते है। बुधवार को ऐसे सात जोड़े फिर से साथ रहने को राजी हुए है। जो नहीं मानते उन मामलों में कानूनी कार्रर्वाई आगे बढ़ाई जाती है। -अर्चना सिंह, इंस्पेक्टर, महिला थाना
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