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‘अनिवार्य लिंग परीक्षण’ पर मेनका गांधी के बयान पर छिड़ी बहस
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 03 Feb 2016 09:53 PM IST
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अब तक लिंग परीक्षण रोके जाने को लेकर बरती जा रही शासकीय सख्ती के बीच जब मंगलवार को जयपुर में केंद्रीय महिला व बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी ने उसे जरूरी किए जाने की पहल पर चर्चा की तो इसे लेकर बहस छिड़ना लाजिमी था। शहर भी इस मुद्दे पर बहस से अछूता नहीं रहा। बहस के बीच जब कुछ विशेषज्ञों से जब इसे लेकर प्रतिक्रिया ली गई तो सबने पहल को बेहतर बताते हुए अपने-अपने सुझाव दिए। सुझाव के बीच सबने एक स्वर से योजना की सफलता के लिए मानसिकता बदलने की जरूरत बताई।
वास्तविक जिम्मेदार सामने आएंगे
भ्रूण हत्या को लेकर सारी जिम्मेदारी गायनाकोलॉजिस्ट पर थोप दी जाती है। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के महत्वपूर्ण पहल से इस कुकृत्य के वास्तविक जिम्मेदार सामने आएंगे। यह तो नहीं कहा जा सकता कि इससे पूरी तरफ पर भ्रूण हत्या रुक जाएगी, लेकिन जब वास्तविक जिम्मेदार चिन्हित हो जाएंगे तो लगाम लगाना आसान होगा। बशर्ते इस नियम को पूरी ईमानदारी और कड़ाई से अनुपालन किया जाय।
- डॉ. अनुराधा सिंह, गायनाकोलॉजिस्ट
गोपनीयता पर निर्भर होगी सफलता
इस बदलाव की सफलता मेें जांच की गोपनीयता की बर्ड़ी भूमिका होगी। बहुत मुश्किल होगा, गर्भवती महिला और उसके परिवार से इसे गोपनीय रख पाना। जानकारी होने के बाद सामाजिक और पारिवारिक दबाव के चलते गर्भवती महिला की पीड़ा को भी समझना होगा। आज के परिवेश में जिन महिलाओं को नवजात कन्या पैदा करने के बाद ताने सुनने पड़ते हैं, उन्हें नौ महीने गर्भ में उसे रखना भी भारी पड़ेगा।
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-डॉ. कीर्ति पांडेय, समाजशास्त्री
मानसिकता बदलने पर दूर होगी समस्या
यह एक ऐसी सामाजिक समस्या है, जिसमें कानूनी बदलाव से कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला। एक विशेषज्ञ के तौर पर मुझे जांच के दबाव की समस्या से आए दिन गुजरना पड़ता है। बहुत मुश्किल होता है कि लोगों को समझा पाना। ऐसे में लोगों की मानसिकता बदले बिना इस समस्या के दूर होने की कल्पना बेमानी होगी। नए नियम से समस्या नहीं दूर होगी बल्कि कई सामाजिक समस्याएं उभर कर सामने आएंगी।
- डॉ. प्राची, अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ
महिलाओं की सांसत बढ़ेगी
सरकार प्रयास करे या समाज। सांसत तो महिलाओं की ही होगी। गर्भ में बेटी है, यह जानने के बाद किसी भी महिला को पहले तो पारिवारिक तिरस्कार का सामना करना पड़ेगा। रही सही कसर पड़ोसी और रिश्तेदार पूरी कर देंगे। इससे गर्भवती महिलाओं को बेटी को नौ महीने गर्भ में रखना दूभर हो जाएगा। मेरे हिसाब से तो अभी जो नियम है, हम महिलाओं के लिए वही बेहतर है। नया नियम और भारी पड़ेगा।
- ममता सिंह, आजाद नगर
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वास्तविक जिम्मेदार सामने आएंगे
भ्रूण हत्या को लेकर सारी जिम्मेदारी गायनाकोलॉजिस्ट पर थोप दी जाती है। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के महत्वपूर्ण पहल से इस कुकृत्य के वास्तविक जिम्मेदार सामने आएंगे। यह तो नहीं कहा जा सकता कि इससे पूरी तरफ पर भ्रूण हत्या रुक जाएगी, लेकिन जब वास्तविक जिम्मेदार चिन्हित हो जाएंगे तो लगाम लगाना आसान होगा। बशर्ते इस नियम को पूरी ईमानदारी और कड़ाई से अनुपालन किया जाय।
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- डॉ. अनुराधा सिंह, गायनाकोलॉजिस्ट
गोपनीयता पर निर्भर होगी सफलता
इस बदलाव की सफलता मेें जांच की गोपनीयता की बर्ड़ी भूमिका होगी। बहुत मुश्किल होगा, गर्भवती महिला और उसके परिवार से इसे गोपनीय रख पाना। जानकारी होने के बाद सामाजिक और पारिवारिक दबाव के चलते गर्भवती महिला की पीड़ा को भी समझना होगा। आज के परिवेश में जिन महिलाओं को नवजात कन्या पैदा करने के बाद ताने सुनने पड़ते हैं, उन्हें नौ महीने गर्भ में उसे रखना भी भारी पड़ेगा।
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-डॉ. कीर्ति पांडेय, समाजशास्त्री
मानसिकता बदलने पर दूर होगी समस्या
यह एक ऐसी सामाजिक समस्या है, जिसमें कानूनी बदलाव से कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला। एक विशेषज्ञ के तौर पर मुझे जांच के दबाव की समस्या से आए दिन गुजरना पड़ता है। बहुत मुश्किल होता है कि लोगों को समझा पाना। ऐसे में लोगों की मानसिकता बदले बिना इस समस्या के दूर होने की कल्पना बेमानी होगी। नए नियम से समस्या नहीं दूर होगी बल्कि कई सामाजिक समस्याएं उभर कर सामने आएंगी।
- डॉ. प्राची, अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ
महिलाओं की सांसत बढ़ेगी
सरकार प्रयास करे या समाज। सांसत तो महिलाओं की ही होगी। गर्भ में बेटी है, यह जानने के बाद किसी भी महिला को पहले तो पारिवारिक तिरस्कार का सामना करना पड़ेगा। रही सही कसर पड़ोसी और रिश्तेदार पूरी कर देंगे। इससे गर्भवती महिलाओं को बेटी को नौ महीने गर्भ में रखना दूभर हो जाएगा। मेरे हिसाब से तो अभी जो नियम है, हम महिलाओं के लिए वही बेहतर है। नया नियम और भारी पड़ेगा।
- ममता सिंह, आजाद नगर