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एक साल से किसी ने भी नहीं खिंचवाई फोटो
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Wed, 27 Jul 2016 01:47 AM IST
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माई स्टैंप
- फोटो : demo pic
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डाक टिकट पर खुद की अथवा सगे संबंधियों की फोटो देखने की इच्छा वाली योजना भी लोगों को लुभा नहीं सकी। पिछले एक वर्ष से किसी ने भी डाक टिकट के लिए फोटो नहीं खिंचवाई है। नतीजतन विभाग की ‘माई स्टैंप’ योजना इस क्षेत्र में बुरी तरह से फ्लाप हो गई है।
23 अक्टूबर 2014 को तत्कालीन पीएमजी राकेश कुमार ने माई स्टैंप योजना का शुभारंभ किया था। योजना के मुताबिक 300 रुपये खर्च कर कोई भी खुद की अथवा अपने सगे संबंधियों की फोटो डाक टिकट पर छपवा सकता है, जो अन्य टिकटों की तरह ही मान्य होगा। इसके लिए उसे आईडी प्रूफ लेकर डाक घर में जाना होता है। शुरूआती दौर में 1980 रुपये के टिकट की बिक्री हुई। मगर ठीक ढंग से प्रचार-प्रसार न होने और टिकट की प्रिंट क्वालिटी बेहतर न होने से योजना लोगों को लुभा नहीं सकी। पिछले एक साल से एक भी व्यक्ति डाक टिकट के लिए फोटो खिंचवाने डाक विभाग में नहीं पहुंचा है।
सीनियर पोस्ट मास्टर लक्ष्मी नारायण तिवारी ने बताया कि योजना को सफल बनाने के लिए अलग से काउंटर की व्यवस्था की गई है, जिससे किसी को लाइन में न लगना पड़े और आसानी से डाक टिकट बनवा सके। बावजूद इसके लोगों ने योजना में रूचि नहीं ली। विभाग प्रयास करेगा, ताकि अधिक से अधिक माई स्टैंप योजना से जुड़ें।
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23 अक्टूबर 2014 को तत्कालीन पीएमजी राकेश कुमार ने माई स्टैंप योजना का शुभारंभ किया था। योजना के मुताबिक 300 रुपये खर्च कर कोई भी खुद की अथवा अपने सगे संबंधियों की फोटो डाक टिकट पर छपवा सकता है, जो अन्य टिकटों की तरह ही मान्य होगा। इसके लिए उसे आईडी प्रूफ लेकर डाक घर में जाना होता है। शुरूआती दौर में 1980 रुपये के टिकट की बिक्री हुई। मगर ठीक ढंग से प्रचार-प्रसार न होने और टिकट की प्रिंट क्वालिटी बेहतर न होने से योजना लोगों को लुभा नहीं सकी। पिछले एक साल से एक भी व्यक्ति डाक टिकट के लिए फोटो खिंचवाने डाक विभाग में नहीं पहुंचा है।
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सीनियर पोस्ट मास्टर लक्ष्मी नारायण तिवारी ने बताया कि योजना को सफल बनाने के लिए अलग से काउंटर की व्यवस्था की गई है, जिससे किसी को लाइन में न लगना पड़े और आसानी से डाक टिकट बनवा सके। बावजूद इसके लोगों ने योजना में रूचि नहीं ली। विभाग प्रयास करेगा, ताकि अधिक से अधिक माई स्टैंप योजना से जुड़ें।
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