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बाजार की ‘दिवाली’ का योग
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Thu, 20 Oct 2016 01:44 AM IST
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दिवाली
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इस बार की दिवाली उद्योग-व्यापार जगत के लिए खास योग लेकर आ रही है। ज्योतिषीय गणनाओं में दीप पर्व बाजार के लिए अच्छा साबित होने वाला है। समय चक्र की कुंडली में सातवें स्थान पर स्थित शुक्र-बुध और सूर्य-बुध की युति से राजयोग व बुधादित्य योग बन रहे हैं। कुंडली में सातवां स्थान व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में ये दोनों योग उद्योग और व्यापार के हित में मंगल संकेत दे रहे हैं।
त्योहार पर ग्रह नक्षत्रों की चाल उद्यमी और व्यापारियों के लिए विशेष बना रही है। ज्योतिषाचार्य पं. शरद चंद्र मिश्र बताते हैं कि सातवें स्थान पर शुक्र-बुध की युति दांपत्य, वाहन और व्यापार सुख देने वाली होती है। साथ ही केंद्र में बुधादित्य योग व्यापारी एवं सरकारी नौकरीपेशा लोगों के लिए पर्व को शुभ फलदायी बना रहा है। छठवें स्थान में विराजमान गुरु 12वें यानी विदेश स्थान को देख रहा है। इससे विदेशी पूंजी निवेश के भी योग बन रहे हैं। आठवें स्थान पर बैठा शनि भी लाभदायक फल दे रहा है। शनि स्वास्थ्य लाभ और दवाओं के क्षेत्र में नए अनुसंधान का इशारा कर रहा है। समय चक्र की कुंडली में मंगल का स्थान भी मंगलदायक है। पराक्रम और भूमि स्थान को देख रहा मंगल शौर्य और रक्षा क्षेत्र में प्रगति का योग बना रहा है।
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त्योहार पर ग्रह नक्षत्रों की चाल उद्यमी और व्यापारियों के लिए विशेष बना रही है। ज्योतिषाचार्य पं. शरद चंद्र मिश्र बताते हैं कि सातवें स्थान पर शुक्र-बुध की युति दांपत्य, वाहन और व्यापार सुख देने वाली होती है। साथ ही केंद्र में बुधादित्य योग व्यापारी एवं सरकारी नौकरीपेशा लोगों के लिए पर्व को शुभ फलदायी बना रहा है। छठवें स्थान में विराजमान गुरु 12वें यानी विदेश स्थान को देख रहा है। इससे विदेशी पूंजी निवेश के भी योग बन रहे हैं। आठवें स्थान पर बैठा शनि भी लाभदायक फल दे रहा है। शनि स्वास्थ्य लाभ और दवाओं के क्षेत्र में नए अनुसंधान का इशारा कर रहा है। समय चक्र की कुंडली में मंगल का स्थान भी मंगलदायक है। पराक्रम और भूमि स्थान को देख रहा मंगल शौर्य और रक्षा क्षेत्र में प्रगति का योग बना रहा है।
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भाईचारा बढ़ाएगा महापद्म योग
पं. शरद चंद्र मिश्र का कहना है कि त्योहार पर प्रीति और आयुष्मान योग एक साथ होने से महापद्म योग भी बन रहा है। यह दुर्लभ योग प्रतिभावान लोगों की संख्या में इजाफा और धनधान्य की बढ़ोत्तरी के साथ चतुर्दिक विकास के संकेत दे रहा है। प्रीति योग से समाज में भाईचारा बढ़ेगा। सांप्रदायिक उन्माद में कमी आएगी और महंगाई पर अंकुश के प्रयास दिखेंगे।
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