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एक रुपये में बिकी गन्ना संस्थान की जमीन
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 13 Jan 2017 01:05 AM IST
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गन्ना शोध संस्थान की जमीन चिकित्सा शिक्षा विभाग के नाम करने की प्रक्रिया पूरी करते शासन व रजिस्ट्री महकमे के अधिकारी।
- फोटो : Rajesh Kumar
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एम्स की स्थापना के लिए जमीन स्थानांतरण की आधी प्रक्रिया गुरुवार को पूरी हो गई। सब रजिस्ट्रार द्वितीय कार्यालय में गन्ना शोध संस्थान की जमीन अब प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग के नाम हो गई है। चिकित्सा शिक्षा विभाग एम्स के नाम इसका बैनामा करेगा। जल्द ही इस प्रक्रिया के भी पूरे हो जाने की उम्मीद है। इसके बाद महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर दो स्थित गन्ना शोध संस्थान की 112 एकड़ जमीन पर एम्स निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।
जमीन बैनामा करने को लेकर प्रदेश के अफसर पिछले दो दिनों से शहर में जमे हुए थे। गुरुवार शाम करीब साढ़े चार बजे उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद के निदेशक डॉ. बीडी शर्मा ने विक्रेता के तौर पर एम्स के लिए गन्ना शोध संस्थान की जमीन प्रदेश चिकित्सा शिक्षा विभाग के अनुसचिव नीलेश कुमार सिंह के नाम कर दी। करीब 768 करोड़ की कीमत की इस जमीन के लेन-देन की औपचारिकता सिर्फ एक रुपये में हुई। स्टांप शुल्क के तौर पर कोई खर्च नहीं लगा। सिर्फ रजिस्ट्री फीस के तौर पर विभाग में 20 हजार रुपये जमा हुए।
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक जल्द ही उप्र चिकित्सा शिक्षा विभाग भी एम्स के नाम यह जमीन बैनामा कर देगा। बैनामे की यह प्रक्रिया भी गोरखपुर रजिस्ट्री दफ्तर में ही पूरी होगी।
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जमीन बैनामा करने को लेकर प्रदेश के अफसर पिछले दो दिनों से शहर में जमे हुए थे। गुरुवार शाम करीब साढ़े चार बजे उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद के निदेशक डॉ. बीडी शर्मा ने विक्रेता के तौर पर एम्स के लिए गन्ना शोध संस्थान की जमीन प्रदेश चिकित्सा शिक्षा विभाग के अनुसचिव नीलेश कुमार सिंह के नाम कर दी। करीब 768 करोड़ की कीमत की इस जमीन के लेन-देन की औपचारिकता सिर्फ एक रुपये में हुई। स्टांप शुल्क के तौर पर कोई खर्च नहीं लगा। सिर्फ रजिस्ट्री फीस के तौर पर विभाग में 20 हजार रुपये जमा हुए।
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विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक जल्द ही उप्र चिकित्सा शिक्षा विभाग भी एम्स के नाम यह जमीन बैनामा कर देगा। बैनामे की यह प्रक्रिया भी गोरखपुर रजिस्ट्री दफ्तर में ही पूरी होगी।
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