{"_id":"17d003afff9ecfd10990c415a38c2439","slug":"hostelers-protest-for-bad-order-in-vivekanad-hostel-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विवेकानंद हॉस्टल की बदइंतजामी पर उग्र हुए हॉस्टलर्स","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विवेकानंद हॉस्टल की बदइंतजामी पर उग्र हुए हॉस्टलर्स
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2016 01:03 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कई बार शिकायत के बाद भी विवेकानंद हॉस्टल की बदइंतजामी दूर न होने पर बुधवार को हॉस्टलर्स का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने प्रशासनिक भवन पहुच कर यूनिवर्सिटी के इंजीनियर का न सिर्फ घेराव किया बल्कि उन्हें जबरन लेकर हॉस्टल आ गए। मौके पर पहुंची पुलिस के हस्तक्षेप से करीब डेढ़ बाद छात्रोें ने उन्हें इस शर्त पर जाने दिया कि जल्द से जल्द हॉस्टल की बदइंतजामी दूर कर दी जाएगी।
विवेकानंद हॉस्टल में जर्जर बॉथरूम, खराब टॉयलेट और पानी की दिक्कत की शिकायत हॉस्टल के छात्रों ने कई बार इंजीनियर और कुलपति तक पहुंचाई, लेकिन कोई पहल नहीं हुई। आखिरकार इस मुद्दे पर बुधवार को छात्रों का धैर्य जवाब दे गया। इकट्ठे होकर छात्र यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रशासनिक भवन पहुंच गए और इंजीनियर श्रवण कुमार का घेराव कर दिया। छात्र जिद पर अड़े थे कि इंजीनियर तत्काल प्रभाव से बदइंतजामी दूर करने की पहल करें। जब इंजीनियर की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला तो छात्र उन्हें जबरन हॉस्टल ले गए। वहां हर तल पर ले जाकर उन्होंने इंजीनियर को जर्जर बाथरूम और पानी की दुर्दशा का मौका मुआयना कराया। छात्रों ने इंजीनियर से साफ कह दिया कि तत्काल काम शुरू नहीं कराया गया तो उन्हें हॉस्टल से जाने नहीं दिया जाएगा।
उधर, यह जानकारी जब यूनिवर्सिटी चौकी प्रभारी एके उपाध्याय को मिली तो वे मौके पर पहुंच गए। उन्होंने भी छात्रों को समझाने की कोशिश की। डेढ़ घंटे तक यह जद्दोजहद चलती रही। जब इंजीनियर ने छात्रों को बहुत जल्द समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया, तब जाकर वे माने। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द बॉथरूम और टॉयलेट के दरवाजे, पानी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो वे आंदोलन को बाध्य होंगे।
विज्ञापन
टॉयलेट में दरवाजे तक नहीं
विवेकानंद हॉस्टल के ज्यादातर टॉयलेट व बाथरूम के दरवाजे टूट गए हैं। इस वजह से छात्रों को बेहद परेशानी उठानी पड़ती है। अपनी निजता बनाए रखने के लिए कोई छात्र मोबाइल पर म्यूजिक बजाता रहता है तो कोई गाना गाता रहता है। यही नहीं, आए दिन टंकी का पानी खत्म हो जाता है, जिसके चलते सुबह से ही छात्र उस टायलेट की तलाश में जुट जाते हैं, जहां पानी आ रहा हो। कभी-कभी तो उन्हें दूसरे हॉस्टलों का सहारा लेना पड़ता है। इंजीनियर के समक्ष छात्रों ने टंकी साफ न होने की समस्या भी प्रमुखता से उठाई।
विज्ञापन
विवेकानंद हॉस्टल में जर्जर बॉथरूम, खराब टॉयलेट और पानी की दिक्कत की शिकायत हॉस्टल के छात्रों ने कई बार इंजीनियर और कुलपति तक पहुंचाई, लेकिन कोई पहल नहीं हुई। आखिरकार इस मुद्दे पर बुधवार को छात्रों का धैर्य जवाब दे गया। इकट्ठे होकर छात्र यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रशासनिक भवन पहुंच गए और इंजीनियर श्रवण कुमार का घेराव कर दिया। छात्र जिद पर अड़े थे कि इंजीनियर तत्काल प्रभाव से बदइंतजामी दूर करने की पहल करें। जब इंजीनियर की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला तो छात्र उन्हें जबरन हॉस्टल ले गए। वहां हर तल पर ले जाकर उन्होंने इंजीनियर को जर्जर बाथरूम और पानी की दुर्दशा का मौका मुआयना कराया। छात्रों ने इंजीनियर से साफ कह दिया कि तत्काल काम शुरू नहीं कराया गया तो उन्हें हॉस्टल से जाने नहीं दिया जाएगा।
विज्ञापन
उधर, यह जानकारी जब यूनिवर्सिटी चौकी प्रभारी एके उपाध्याय को मिली तो वे मौके पर पहुंच गए। उन्होंने भी छात्रों को समझाने की कोशिश की। डेढ़ घंटे तक यह जद्दोजहद चलती रही। जब इंजीनियर ने छात्रों को बहुत जल्द समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया, तब जाकर वे माने। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द बॉथरूम और टॉयलेट के दरवाजे, पानी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो वे आंदोलन को बाध्य होंगे।
विज्ञापन
टॉयलेट में दरवाजे तक नहीं
विवेकानंद हॉस्टल के ज्यादातर टॉयलेट व बाथरूम के दरवाजे टूट गए हैं। इस वजह से छात्रों को बेहद परेशानी उठानी पड़ती है। अपनी निजता बनाए रखने के लिए कोई छात्र मोबाइल पर म्यूजिक बजाता रहता है तो कोई गाना गाता रहता है। यही नहीं, आए दिन टंकी का पानी खत्म हो जाता है, जिसके चलते सुबह से ही छात्र उस टायलेट की तलाश में जुट जाते हैं, जहां पानी आ रहा हो। कभी-कभी तो उन्हें दूसरे हॉस्टलों का सहारा लेना पड़ता है। इंजीनियर के समक्ष छात्रों ने टंकी साफ न होने की समस्या भी प्रमुखता से उठाई।