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सीएम से मिले शस्त्र लाइसेंस के बेगुनाह, मांगा न्याय
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सीएम से मिले शस्त्र लाइसेंस के बेगुनाह, मांगा न्याय
गोरखपुर। प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही से फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण में जेल भेजे गए बेगुनाह लोगों ने सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर न्याय की मांग की। पीड़ितों ने कहा कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर आरोपी प्रशासनिक अफसरों पर कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने मामले में जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पीड़ितों ने कहा कि केस वापस न होने तक आंदोलन जारी रहेगा। मिलने वालों में अधिवक्ता संचित श्रीवास्तव के साथ प्रकरण में फर्जी तरीके से फंसाए गए सभी लोग शामिल रहे।
गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री से मिलने गए पीड़ितों ने कहा कि फर्जी शस्त्र लाइसेंस की जांच के लिए गठित एसआईटी प्रभारी रोहन प्रमोद बोत्रे, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सदर प्रथमेश कुमार, विवेचक कलेक्ट्रेट चौकी प्रभारी एसके शर्मा को उनके वैध लाइसेंस की जानकारी थी, फिर भी लाइसेंस और असलहों को अवैध बताकर छह अक्तूबर 2019 को उन्हें जेल भेज दिया गया। न्यायालय से जमानत मिली तो शस्त्र संबंधी सभी पत्रावलियां डीएम कार्यालय से प्राप्त की गईं। इसी आधार पर लाइसेंस व असलहा की वैधता साबित हुई। पुलिस, प्रशासनिक अफसरों ने नियम-कानून दरकिनार कर दिया था। शस्त्र लाइसेंस और असलहा की जांच नहीं कराई, फिर भी जेल भेजने की कार्रवाई की गई। अधिकारियों ने आधी-अधूरी जांच करके ही उन्हें जेल भेजने के साथ असलहा जब्त कर लिया। अफसरों द्वारा की गई यह कार्रवाई दंडात्मक है। इसके पीछे एक सुनियोजित षड्यंत्र, धन उगाह और झूठी वाहवाही प्राप्त करने की मंशा उजागर हो रही है। सबकी मानहानि हुई है, इस वजह से कार्रवाई जरूरी है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि जांच में लाइसेंस सही पाए जाने के बाद भी असलहे वापस नहीं किए गए हैं। इस दौरान रामनयन, रामहित, रामअषीश, रामनिवास, रामचंदर, जगदीश शुक्ल, डॉ. महताब, विनोद चौधरी, मोहम्मद बिन कासिम, विजय प्रताप सिंह आदि उपस्थित थे।
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गोरखपुर। प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही से फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण में जेल भेजे गए बेगुनाह लोगों ने सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर न्याय की मांग की। पीड़ितों ने कहा कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर आरोपी प्रशासनिक अफसरों पर कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने मामले में जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पीड़ितों ने कहा कि केस वापस न होने तक आंदोलन जारी रहेगा। मिलने वालों में अधिवक्ता संचित श्रीवास्तव के साथ प्रकरण में फर्जी तरीके से फंसाए गए सभी लोग शामिल रहे।
गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री से मिलने गए पीड़ितों ने कहा कि फर्जी शस्त्र लाइसेंस की जांच के लिए गठित एसआईटी प्रभारी रोहन प्रमोद बोत्रे, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सदर प्रथमेश कुमार, विवेचक कलेक्ट्रेट चौकी प्रभारी एसके शर्मा को उनके वैध लाइसेंस की जानकारी थी, फिर भी लाइसेंस और असलहों को अवैध बताकर छह अक्तूबर 2019 को उन्हें जेल भेज दिया गया। न्यायालय से जमानत मिली तो शस्त्र संबंधी सभी पत्रावलियां डीएम कार्यालय से प्राप्त की गईं। इसी आधार पर लाइसेंस व असलहा की वैधता साबित हुई। पुलिस, प्रशासनिक अफसरों ने नियम-कानून दरकिनार कर दिया था। शस्त्र लाइसेंस और असलहा की जांच नहीं कराई, फिर भी जेल भेजने की कार्रवाई की गई। अधिकारियों ने आधी-अधूरी जांच करके ही उन्हें जेल भेजने के साथ असलहा जब्त कर लिया। अफसरों द्वारा की गई यह कार्रवाई दंडात्मक है। इसके पीछे एक सुनियोजित षड्यंत्र, धन उगाह और झूठी वाहवाही प्राप्त करने की मंशा उजागर हो रही है। सबकी मानहानि हुई है, इस वजह से कार्रवाई जरूरी है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि जांच में लाइसेंस सही पाए जाने के बाद भी असलहे वापस नहीं किए गए हैं। इस दौरान रामनयन, रामहित, रामअषीश, रामनिवास, रामचंदर, जगदीश शुक्ल, डॉ. महताब, विनोद चौधरी, मोहम्मद बिन कासिम, विजय प्रताप सिंह आदि उपस्थित थे।
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