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गोरखपुर में पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेस वे की तेज हुई रफ्तार

Wed, 17 Jul 2019 01:48 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 17 Jul 2019 01:48 AM IST
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gorakhpur news

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450 करोड़ रुपये मिले, 73 करोड़ किसानों के खातों में पहुंचे
अरुण चन्द
गोरखपुर। पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेस वे के लिए जमीन जुटाने की रफ्तार तेज हो गई है। जिले की तीन तहसीलों सदर, सहजनवां और खजनी के काश्तकारों से जितनी जमीन ली जानी है, उसकी करीब एक चौथाई जमीन उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के नाम रजिस्ट्री हो चुकी है। भूमि अध्याप्ति कार्यालय के मुताबिक दो से ढाई महीने में एक्सप्रेस-वे की राह में पड़ने वाली जमीन यूपीडा के नाम करा दी जाएगी। संबंधित क्षेत्र के काश्तकारों को समझौते के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है।
तीनों तहसीलों में कुल 526.415 हेक्टेअर जमीन एक्सप्रेस-वे के लिए ली जानी है। इसके लिए शासन से भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय को 450 करोड़ रुपये मिले हैं। 12 जुलाई तक करीब 100 हेक्टेअर जमीन यूपीडा के नाम रजिस्ट्री कराई जा चुकी है और बदले में किसानों के बैंक खातों में 73.43 करोड़ रुपये भेजे जा चुके हैं।
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खजनी के चार गांव बाहर
लिंक एक्सप्रेस-वे से जिले की तीनों तहसीलों में सबसे अधिक खजनी तहसील प्रभावित हो रही है। पहले यहां के 84 गांवों की जमीन एक्सप्रेस-वे की राह में आ रही थी। हाल ही में हुए सर्वे में इनमें से चार गांव इमलीडीह, नगवा, बघउर, मदारखास बाहर हो गए हैं। सहजनवां के चार गांव तो सदर तहसील के सिर्फ एक गांव की जमीन लिंक एक्सप्रेस-वे की राह में आ रही है।
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तहसील प्रभावित जमीन(हेक्टेयर) गांव बैनामा हो चुकी जमीन(हेक्टेयर)
सदर 1.8275 1 0.5703
सहजनवां 70.2421 4 10.0726
खजनी 454.345 80 87.4372
चार गुने पर ही मान रहे काश्तकार
पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए शासन ने भले ही समझौते के आधार पर ही काश्तकारों से जमीन यूपीडा के नाम बैनामा कराने का निर्णय किया है मगर ज्यादातर काश्तकार सर्किल रेट के चार गुना से कम राशि पर तैयार नहीं हो रहे। समझौते के लिए कई दौर की बैठकों के बाद काश्तकार से सहमति बन पा रही है। हालांकि जमीन की मुंह मांगी कीमत मिलने की वजह से तकरीबन सभी किसान जमीन देने के लिए तैयार हैं। मगर प्रशासन पहले सर्किल रेट या फिर उससे दो गुने पर ही जमीन हासिल करने की कोशिश कर रहा है जिससे किसानों को मनाने में समय लग रहा है।
डेढ़ महीने में आई तेजी
काश्तकारों से जमीन लेने की प्रक्रिया यूं तो फरवरी के अंतिम सप्ताह में ही शुरू हो गई थी मगर करीब दो महीने तक चले लोकसभा चुनाव के दरम्यान कोई बैनामा नहीं हो सका। एक जून से इसमें तेजी आई है। 12 जून को लिंक एक्सप्रेस-वे को लेकर कमिश्नर जयंत नार्लीकर की समीक्षा बैठक के बाद रफ्तार और तेज हो गई है।

हाईलाइटर
450 करोड़ रुपये मिले अब तक काश्तकारों को देने के लिए
88.35 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है भूमि अध्याप्ति कार्यालय
73.43 करोड़ किसानों, 13.73 करोड़ स्टांप और 1.18 करोड़ पंजीकरण शुल्क पर खर्च हुए
सदर में एक, सहजनवां में 56 और खजनी में अब तक 475 बैनामे हुए
कोट-
ज्यादातर किसान अपनी जमीन देने के लिए तैयार है। पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेस-वे की राह में 80 गांव की करीब 526 हेक्टेअर जमीन आ रही है जिसे क ाश्तकारों से बैनामा करानी है। अब तक 100 हेक्टेअर जमीन मिल चुकी है। करीब दो महीने में जमीन लेने की प्रक्रिया पूरी हो जाने की उम्मीद है - अरविंद कुमार राय, भूमि अध्याप्ति अधिकारी, गोरखपुर
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