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अरविंद की सेहत पर भी झूठ बोल रही पुलिस
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अरविंद की हालात नाजुक, छठवें अस्पताल में भी नहीं हो पाई सर्जरी
गोरखपुर। गैलेंट इस्पात के एमडी चंद्र प्रकाश अग्रवाल उर्फ चंदू बाबू के गार्ड संदीप कुमार सिंह की गोली से घायल अरविंद चौहान (16) की हालत चिंताजनक बनी हुई है। गोलीकांड से अब तक अरविंद को छठवें अस्पताल में शिफ्ट किया गया है, लेकिन सेहत में कोई बड़ा सुधार नहीं है। सिर के सीटी स्कैन से पता चला है कि अरविंद के सिर व आंख के आसपास गोली के तीन छर्रे फंसे हैं। एक छर्रा दाहिनी तो दूसरा बाईं आंख के आसपास है। एक छर्रा सिर के पिछले हिस्से में पड़ा है। अभी तक सर्जरी नहीं हो सकी है। अरविंद की दाहिनी आंख पूरी तरह से खराब बताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक अरविंद की हालत नाजुक है, फिर भी गोरखपुर पुलिस सेहत में सुधार का तर्क दे रही। पुलिस कह रही है कि वह खतरे से बाहर है। हालांकि चिकित्सक ऐसा नहीं मान रहे हैं। बुधवार को ही अरविंद को एक-एक करके लखनऊ के चार अस्पतालों में ले जाया गया। किशोर की गंभीर अवस्था को देखते हुए ही लखनऊ के सबसे बड़े निजी अस्पताल सहारा ने भर्ती करने से इंकार कर दिया। इससे पहले सुषमा अस्पताल और मेडिक्स अस्पताल से अरविंद को रेफर कराया गया था। अब अपोलो अस्पताल लखनऊ में इलाज चल रहा है। गोली लगने के बाद उसे पहले बीआरडी मेडिकल कॉलेज, फिर लखनऊ ले जाया गया था। लखनऊ में सुषमा अस्पताल के चिकित्सकों के मुताबिक अरविंद की बुधवार को सर्जरी होनी थी, लेकिन उसे डिस्चार्ज करा दिया गया। गोली लगने से किशोर की दाहिनी आंख खराब हो गई है। आंख की रिकवरी अब नहीं होगी। ऑपरेशन करके वैकल्पिक व्यवस्था ही करनी पड़ेगी। किशोर की हालत गंभीर है। यदि सर्जरी जल्द नहीं हुई तो इंफेक्शन फैलने का खतरा रहेगा।
सवालों के घेरे में पुलिस की कार्रवाई
घटना के बाद से ही पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। सबसे पहले किशोर को गोली मारने वाले सुरक्षा गार्ड को भगाने का आरोप पुलिस पर लगा, फिर घटनाक्रम व साक्ष्य पर झूठ उजागर हुआ। अब उसकी सेहत को लेकर झूठ बोला जा रहा है। पुलिस के मुताबिक अरविंद की सेहत में सुधार है और वह खतरे से बाहर है, जबकि हकीकत इसके उलट है। असल में अरविंद अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
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पेशेवर बदमाश नहीं फिर भी पकड़ से दूर
गोलीकांड का मुख्य आरोपी व सुरक्षा गार्ड संदीप पेशेवर बदमाश नहीं है, फिर भी पुलिस अभी तक उसे पकड़ नहीं सकी । घटना के 48 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। पुलिस की दो टीमें संदीप के घर रायबरेली और उसके करीबी रिश्तेदारों के घर से लौट चुकी है। पुलिस अफसर जल्द गिरफ्तारी का ही दावा कर रहे हैं लेकिन अभी तक हाथ-पांव हवा में मार रहे हैं।
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आरोपति गार्ड की तलाश में पुलिस की दो टीमें लगी हैं। अरविंद की सेहत में सुधार है। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार करके जेल भेजा जाएगा।
डॉ. सुनील कुमार गुप्ता, एसएसपी
ये था मामला
22 जुलाई को क्रिकेट खेलने के दौरान बच्चों की गेंद गैलेंट आवास में चली गई थी। अरविंद चौहान बाउंड्री पर चढ़कर अंदर से किसी के आने का इंतजार कर रहा था कि ताकि गेंद मांग सके। इसी दौरान गार्ड संदीप ने अंदर से गोली चला दी और उसके आंख, सिर में गोली जा लगी। मामला बढ़ने पर उसे भर्ती कराया गया और फिर चंदू बाबू ने इलाज का खर्च उठाने का जिम्मा उठाया।
राष्ट्रीय मानवाधिकार और बाल संरक्षण आयोग पहुंचा मामला
गोरखपुर। लच्छीपुर जब्ती टोला निवासी अरविंद चौहान को गोली मारने का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और बाल संरक्षण आयोग पहुंच गया है। इसकी शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता व मानव सेवा संस्थान के राजेशमणि ने की है। अरविंद के परिवार में आठ सदस्य हैं। सबका खर्च अरविंद ही उठा रहा था। वह मौत से जूझ रहा है। ठीक होने के बाद भी उसे सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं। भला हो चंदू बाबू इलाज कराने से पीछे नहीं हटे, मगर आखिर कब तक ? बाद में परिवार का खर्च कैसे चलेगा। आरोपी के खिलाफ चाइल्ड प्रोटक्शन एक्ट की धाराएं भी लगनी चाहिए। उद्योगपति के सुरक्षा गार्ड ने गोली मारने की हिम्मत कैसे की, इसकी गहराई से जांच जरूरी है। उद्योगपतियों के नीति, नियम की समीक्षा की जानी चाहिए। मनमाने तरीके से सुरक्षा गार्ड रखने और दूसरे की जान से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं है।
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गोरखपुर। गैलेंट इस्पात के एमडी चंद्र प्रकाश अग्रवाल उर्फ चंदू बाबू के गार्ड संदीप कुमार सिंह की गोली से घायल अरविंद चौहान (16) की हालत चिंताजनक बनी हुई है। गोलीकांड से अब तक अरविंद को छठवें अस्पताल में शिफ्ट किया गया है, लेकिन सेहत में कोई बड़ा सुधार नहीं है। सिर के सीटी स्कैन से पता चला है कि अरविंद के सिर व आंख के आसपास गोली के तीन छर्रे फंसे हैं। एक छर्रा दाहिनी तो दूसरा बाईं आंख के आसपास है। एक छर्रा सिर के पिछले हिस्से में पड़ा है। अभी तक सर्जरी नहीं हो सकी है। अरविंद की दाहिनी आंख पूरी तरह से खराब बताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक अरविंद की हालत नाजुक है, फिर भी गोरखपुर पुलिस सेहत में सुधार का तर्क दे रही। पुलिस कह रही है कि वह खतरे से बाहर है। हालांकि चिकित्सक ऐसा नहीं मान रहे हैं। बुधवार को ही अरविंद को एक-एक करके लखनऊ के चार अस्पतालों में ले जाया गया। किशोर की गंभीर अवस्था को देखते हुए ही लखनऊ के सबसे बड़े निजी अस्पताल सहारा ने भर्ती करने से इंकार कर दिया। इससे पहले सुषमा अस्पताल और मेडिक्स अस्पताल से अरविंद को रेफर कराया गया था। अब अपोलो अस्पताल लखनऊ में इलाज चल रहा है। गोली लगने के बाद उसे पहले बीआरडी मेडिकल कॉलेज, फिर लखनऊ ले जाया गया था। लखनऊ में सुषमा अस्पताल के चिकित्सकों के मुताबिक अरविंद की बुधवार को सर्जरी होनी थी, लेकिन उसे डिस्चार्ज करा दिया गया। गोली लगने से किशोर की दाहिनी आंख खराब हो गई है। आंख की रिकवरी अब नहीं होगी। ऑपरेशन करके वैकल्पिक व्यवस्था ही करनी पड़ेगी। किशोर की हालत गंभीर है। यदि सर्जरी जल्द नहीं हुई तो इंफेक्शन फैलने का खतरा रहेगा।
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सवालों के घेरे में पुलिस की कार्रवाई
घटना के बाद से ही पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। सबसे पहले किशोर को गोली मारने वाले सुरक्षा गार्ड को भगाने का आरोप पुलिस पर लगा, फिर घटनाक्रम व साक्ष्य पर झूठ उजागर हुआ। अब उसकी सेहत को लेकर झूठ बोला जा रहा है। पुलिस के मुताबिक अरविंद की सेहत में सुधार है और वह खतरे से बाहर है, जबकि हकीकत इसके उलट है। असल में अरविंद अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
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पेशेवर बदमाश नहीं फिर भी पकड़ से दूर
गोलीकांड का मुख्य आरोपी व सुरक्षा गार्ड संदीप पेशेवर बदमाश नहीं है, फिर भी पुलिस अभी तक उसे पकड़ नहीं सकी । घटना के 48 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। पुलिस की दो टीमें संदीप के घर रायबरेली और उसके करीबी रिश्तेदारों के घर से लौट चुकी है। पुलिस अफसर जल्द गिरफ्तारी का ही दावा कर रहे हैं लेकिन अभी तक हाथ-पांव हवा में मार रहे हैं।
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आरोपति गार्ड की तलाश में पुलिस की दो टीमें लगी हैं। अरविंद की सेहत में सुधार है। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार करके जेल भेजा जाएगा।
डॉ. सुनील कुमार गुप्ता, एसएसपी
ये था मामला
22 जुलाई को क्रिकेट खेलने के दौरान बच्चों की गेंद गैलेंट आवास में चली गई थी। अरविंद चौहान बाउंड्री पर चढ़कर अंदर से किसी के आने का इंतजार कर रहा था कि ताकि गेंद मांग सके। इसी दौरान गार्ड संदीप ने अंदर से गोली चला दी और उसके आंख, सिर में गोली जा लगी। मामला बढ़ने पर उसे भर्ती कराया गया और फिर चंदू बाबू ने इलाज का खर्च उठाने का जिम्मा उठाया।
राष्ट्रीय मानवाधिकार और बाल संरक्षण आयोग पहुंचा मामला
गोरखपुर। लच्छीपुर जब्ती टोला निवासी अरविंद चौहान को गोली मारने का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और बाल संरक्षण आयोग पहुंच गया है। इसकी शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता व मानव सेवा संस्थान के राजेशमणि ने की है। अरविंद के परिवार में आठ सदस्य हैं। सबका खर्च अरविंद ही उठा रहा था। वह मौत से जूझ रहा है। ठीक होने के बाद भी उसे सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं। भला हो चंदू बाबू इलाज कराने से पीछे नहीं हटे, मगर आखिर कब तक ? बाद में परिवार का खर्च कैसे चलेगा। आरोपी के खिलाफ चाइल्ड प्रोटक्शन एक्ट की धाराएं भी लगनी चाहिए। उद्योगपति के सुरक्षा गार्ड ने गोली मारने की हिम्मत कैसे की, इसकी गहराई से जांच जरूरी है। उद्योगपतियों के नीति, नियम की समीक्षा की जानी चाहिए। मनमाने तरीके से सुरक्षा गार्ड रखने और दूसरे की जान से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं है।