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हाईस्कूल में कम नंबर आने पर छात्र ने खुदकुशी की
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 11 Jun 2017 01:41 AM IST
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राम सजन की फाइल फोटो
- फोटो : Amar Ujala
झंगहा के तेंदुआ खुर्द गांव में हाईस्कूल में कम नंबर आने पर मिल रहे तानों से परेशान छात्र ने फंदे से लटक कर जान दे दी। घर खाली होने के दौरान उसने फंदा लगाया। काफी देर बाद घरवाले आए तो उसका शव कुंडे से लटकता देखा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने पंचनामा भर कर घरवालों को शव सौंप दिया। इसके बाद उसका दाह संस्कार कर दिया गया।
तेंदुआ खुर्द गांव निवासी राम सजन (15) पुत्र हीरा गुप्ता ने हाई स्कूल की परीक्षा दी थी। रिजल्ट आने पर गणित में कम अंक मिले थे। इस वजह से ग्रेस मार्क से वह पास हुआ था। यह बात गांव के आसपास के लोगों को भी मालूम चली थी। राम सजन के पिता और मां किसी काम से शुक्रवार को मऊ गए थे। उसके दो भाई विशाल और विकास कोचिंग पढ़ने चले गए थे। घर में खुद को अकेला पाकर उसने आत्महत्या कर ली। चर्चा है कि गांव के कुछ लोगों ने परीक्षा परिणाम को लेकर उसे ताने सुनाए थे। इसके बाद ही वह घर में गया और कुंडी से लटक कर जान दे दी।
बच्चों से अभिभावक बहुत ज्यादा एक्सपेक्टेंशन करते हैं। हर मां-बाप उन पर अपनी इच्छाएं थोप रहे हैं। ऐसे में बच्चे अपनी नेचुरल पोटेंशियल को छोड़कर आपाधापी में भागने लगते हैं। आज के माहौल में बच्चा क्या सीख रहा है यह जरूरी नहीं रह गया है बल्कि नंबरों की रेस महत्वपूर्ण हो गई है। हाईस्कूल को अभिभावक ऐसे पेश करते हैं, जिससे बच्चों को लगता है कि दसवीं में कुछ नहीं किया तो आगे कुछ नहीं कर सकेंगे। ऐसे मामलों में सबसे बड़ी भूमिका अभिभावकों की है। उन्हें अपने बच्चों से बात करनी चाहिए। बच्चे की रुचि क्या है, वो क्या चाहता है, इन बातों को अभिभावकों को गंभीरता से लेना चाहिए।
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- डॉ. अनुभूति दुबे, मनोविज्ञान विभाग, गोरखपुर यूनिवर्सिटी
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तेंदुआ खुर्द गांव निवासी राम सजन (15) पुत्र हीरा गुप्ता ने हाई स्कूल की परीक्षा दी थी। रिजल्ट आने पर गणित में कम अंक मिले थे। इस वजह से ग्रेस मार्क से वह पास हुआ था। यह बात गांव के आसपास के लोगों को भी मालूम चली थी। राम सजन के पिता और मां किसी काम से शुक्रवार को मऊ गए थे। उसके दो भाई विशाल और विकास कोचिंग पढ़ने चले गए थे। घर में खुद को अकेला पाकर उसने आत्महत्या कर ली। चर्चा है कि गांव के कुछ लोगों ने परीक्षा परिणाम को लेकर उसे ताने सुनाए थे। इसके बाद ही वह घर में गया और कुंडी से लटक कर जान दे दी।
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बच्चों से अभिभावक बहुत ज्यादा एक्सपेक्टेंशन करते हैं। हर मां-बाप उन पर अपनी इच्छाएं थोप रहे हैं। ऐसे में बच्चे अपनी नेचुरल पोटेंशियल को छोड़कर आपाधापी में भागने लगते हैं। आज के माहौल में बच्चा क्या सीख रहा है यह जरूरी नहीं रह गया है बल्कि नंबरों की रेस महत्वपूर्ण हो गई है। हाईस्कूल को अभिभावक ऐसे पेश करते हैं, जिससे बच्चों को लगता है कि दसवीं में कुछ नहीं किया तो आगे कुछ नहीं कर सकेंगे। ऐसे मामलों में सबसे बड़ी भूमिका अभिभावकों की है। उन्हें अपने बच्चों से बात करनी चाहिए। बच्चे की रुचि क्या है, वो क्या चाहता है, इन बातों को अभिभावकों को गंभीरता से लेना चाहिए।
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- डॉ. अनुभूति दुबे, मनोविज्ञान विभाग, गोरखपुर यूनिवर्सिटी