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एसटीएफ ने पकड़ी 188 पेटी अंग्रेजी शराब
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Sun, 31 Jul 2016 07:50 PM IST
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अंग्रेजी शराब
- फोटो : demo pic
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एसटीएफ ने शनिवार की रात गगहा में डीसीएम पर लदी 188 पेटी अंग्रेजी शराब बरामद की। चालक और खलासी को गिरफ्तार कर पुलिस सरगना की तलाश में जुटी है। तस्कर पीओपी (प्लास्टर आफ पेरिस) के बोरे में छिपाकर शराब ले आया था। इसकी सप्लाई गोरखपुर के अलावा पूर्वांचल के अन्य जिलों में होनी थी। पकड़ी गई शराब 15 लाख रुपये की है।
एसटीएफ के सीओ विकास चंद्र त्रिपाठी को पंजाब में बनी अंग्रेजी शराब गोरखपुर में आने की जानकारी मिली थी। उन्होंने दरोगा सत्यप्रकाश सिंह को टीम के साथ गगहा भेजा। टीम ने वाराणसी हाईवे पर रात 10:30 बजे हाटा बाजार के पास डीसीएम को रोककर तलाशी ली तो पीओपी की बोरी के बीच छिपाकर रखी गई 188 पेटी (9024 बोतल) अंग्रेजी शराब मिली। टीम ने गाड़ी चालक हरियाणा, अंबाला के दुराना निवासी राकेश पाल, हेल्पर पंजाब के होशियारपुर गर्दीवाला निवासी बलजिंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में उन्होंने बताया कि शराब की खेप वे अंबाला से लेकर चले थे। गोरखपुर के साथ ही पूर्वांचल के अन्य जिलों में इसकी आपूर्ति होनी थी। बोतलों पर ‘मेड फॉर ओनली इन पंजाब’ लिखा है। हालांकि घेराबंदी के बीच तस्कर फरार हो गया। गगहा थाने में ड्राइवर और हेल्पर पर जालसाजी, आबकारी एक्ट के तहत केस दर्ज कराया गया है। भटिंडा स्थित डिस्टीलरी में बनी इस शराब को बांसगांव में रहने वाले रामशरण प्रजापति ने मंगाई थी।
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पंजाब व हरियाणा की शराब से अच्छी होती है कमाई
पंजाब और हरियाणा में बनी शराब पर यूपी में प्रतिबंध है। वहां शराब बेहद कम कीमत में मिल जाती है। यही वजह है कि शराब के जुड़े धंधेबाज वहां की डिस्टीलरी से शराब मंगाकर पूर्वांचल में अच्छी कमाई करते हैं।
तीन महीने पहले पकड़ा गया था राकेश
एसटीएफ की टीम ने 21 मार्च 2016 को डीसीएम चालक राकेश पाल को खोराबार के सहारा इस्टेट के पास गिरफ्तार किया था। उस दौरान वह आलू की बोरी में छुपाकर 232 पेटी अंग्रेजी शराब लेकर गोरखपुर आया था। उस समय भी शराब पंजाब के भटिंडा से मंगाई गई थी। बांसगांव के रामशरण प्रजापति का नाम उस समय भी सामने आया था। वह उसके बाद से ही वांटेड है।
पकड़ी गई शराब की खेप
03 अक्टूबर: खोराबार में पकड़ी गई डीसीएम में दली 238 पेटी शराब
20 नवंबर : आजमगढ़ के सिधारी 1200 पेटी शराब पकड़ी गई
02 जनवरी: मऊ के कोपांगज में 1100 पेटी शराब पकड़ी गई
21 मार्च: खोराबार के सहारा इस्टेट 232 पेटी शराब पकड़ी गई
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एसटीएफ के सीओ विकास चंद्र त्रिपाठी को पंजाब में बनी अंग्रेजी शराब गोरखपुर में आने की जानकारी मिली थी। उन्होंने दरोगा सत्यप्रकाश सिंह को टीम के साथ गगहा भेजा। टीम ने वाराणसी हाईवे पर रात 10:30 बजे हाटा बाजार के पास डीसीएम को रोककर तलाशी ली तो पीओपी की बोरी के बीच छिपाकर रखी गई 188 पेटी (9024 बोतल) अंग्रेजी शराब मिली। टीम ने गाड़ी चालक हरियाणा, अंबाला के दुराना निवासी राकेश पाल, हेल्पर पंजाब के होशियारपुर गर्दीवाला निवासी बलजिंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
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पूछताछ में उन्होंने बताया कि शराब की खेप वे अंबाला से लेकर चले थे। गोरखपुर के साथ ही पूर्वांचल के अन्य जिलों में इसकी आपूर्ति होनी थी। बोतलों पर ‘मेड फॉर ओनली इन पंजाब’ लिखा है। हालांकि घेराबंदी के बीच तस्कर फरार हो गया। गगहा थाने में ड्राइवर और हेल्पर पर जालसाजी, आबकारी एक्ट के तहत केस दर्ज कराया गया है। भटिंडा स्थित डिस्टीलरी में बनी इस शराब को बांसगांव में रहने वाले रामशरण प्रजापति ने मंगाई थी।
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पंजाब व हरियाणा की शराब से अच्छी होती है कमाई
पंजाब और हरियाणा में बनी शराब पर यूपी में प्रतिबंध है। वहां शराब बेहद कम कीमत में मिल जाती है। यही वजह है कि शराब के जुड़े धंधेबाज वहां की डिस्टीलरी से शराब मंगाकर पूर्वांचल में अच्छी कमाई करते हैं।
तीन महीने पहले पकड़ा गया था राकेश
एसटीएफ की टीम ने 21 मार्च 2016 को डीसीएम चालक राकेश पाल को खोराबार के सहारा इस्टेट के पास गिरफ्तार किया था। उस दौरान वह आलू की बोरी में छुपाकर 232 पेटी अंग्रेजी शराब लेकर गोरखपुर आया था। उस समय भी शराब पंजाब के भटिंडा से मंगाई गई थी। बांसगांव के रामशरण प्रजापति का नाम उस समय भी सामने आया था। वह उसके बाद से ही वांटेड है।
पकड़ी गई शराब की खेप
03 अक्टूबर: खोराबार में पकड़ी गई डीसीएम में दली 238 पेटी शराब
20 नवंबर : आजमगढ़ के सिधारी 1200 पेटी शराब पकड़ी गई
02 जनवरी: मऊ के कोपांगज में 1100 पेटी शराब पकड़ी गई
21 मार्च: खोराबार के सहारा इस्टेट 232 पेटी शराब पकड़ी गई