जेल भवन ध्वस्त कर फॉरेंसिक लैब का होगा निर्माण
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गोरखपुर में फॉरेंसिक लैब (विधि विज्ञान प्रयोगशाला) बनाने की कवायद तीन साल से चल रही थी। अधिकारियों के प्रयास करने पर जुलाई 2015 में इसे मंजूरी मिली। शुरुआती दौर में गुलरिहा के पास दो एकड़ जमीन तलाशी गई लेकिन बात नहीं बनी। अधिकारियों ने पहल कर जिला अस्पताल के सामने स्थित पुरानी जेल की तीन एकड़ जमीन पर फॉरेंसिक लैब बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था।
जुलाई 2015 में इसे मंजूरी मिल गई लेकिन बजट के अभाव में मामला लटक गया। जनवरी 2016 में शासन से इस मद में 28.68 करोड़ रुपये रिलीज हो गए थे जिसके बाद कागजी कार्रवाई में पूरा मामला फंसा था। लैब का मानचित्र तैयार होने के बाद शुक्रवार से जेल परिसर की साफ-सफाई शुरू करा दी गई। लोक निर्माण विभाग की रिपोर्ट पर जेल के पुराने भवन को ध्वस्त कराने के बाद लैब का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
लैब में होगी डीएनए, बैलेस्टिक जांच
गोरखपुर की फॉरेंसिक लैब बी कटेगरी की होगी। इलाहाबाद, झांसी, बरेली में भी इसी तरह का लैब बनेगा। यहां डीएनए, बैलेस्टिक जांच के साथ ही हैडवॉश, विसरा, फिंगर प्रिंट, साइबर फिजिक्स की जांच होगी। पूरे जोन के सभी मामले यहीं पर भेजे जाएंगे। लैब का निर्माण होने के बाद घटना का जल्द पर्दाफाश करने में पुलिस को मदद मिलेगी। रिपोर्ट के लिए महीनों का इंतजार नहीं करना होगा।
फॉरेंसिक लैब निर्माण के लिए जमीन की साफ-सफाई का काम चल रहा है। लोक निर्माण विभाग की रिपोर्ट पर भवन गिराने के बाद राजकीय निर्माण निगम यहां पर काम शुरू करेगा।
- अरुण शुक्ला, एक्सईएन, राजकीय निर्माण निगम