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फुटकर के चक्कर में नहीं हो सका सही इलाज, मौत
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Mon, 14 Nov 2016 01:11 AM IST
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तस्मिया सिद्दीकी की फाइल फोटो।
- फोटो : Amar Ujala
घंटाघर स्थित अन्नपूर्णा चाइल्ड एंड मैटरनिटी सेंटर में रविवार को जमकर हंगामा हुआ। एक बच्ची की मौत के बाद पहुंचे घर वालों ने डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही और फुटकर की पाबंदी को मौत की वजह बताई। आरोप है कि इलाज को लेकर जब वह पहुंचे थे तो फुटकर न होने पर उन्हें लौटा दिया गया और अगले दिन भर्ती किया गया, फिर जांच में फुटकर रोड़ा बनी। इसके बाद श्ुाक्रवार को अचानक मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया, जहां शनिवार को बच्ची की मौत हो गई।
राजघाट के मुरब्बा गली में रहने वाले मो. जुनेद की 6 वर्षीय बेटी तस्मिया सिद्दीकी की तबीयत 8 नवंबर को अचानक खराब हो गई थी। उसे उल्टी, दस्त के साथ बुखार की शिकायत थी। वह घंटाघर स्थित अन्नपूर्णा चाइल्ड सेंटर पहुंचे। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी ने बड़े नोट लेने से मना कर दिया और फुटकर की मांग की। इससे वह लौट गए। अगले दिन फुटकर की व्यवस्था करके पहुंचे तो डॉ. राजेश कुमार गुप्ता ने तस्मिया को देखा और कुछ दवाएं लिखीं। मगर डॉक्टर ने जो दवाएं दी उसके बाद तबीयत सुधरने की जगह और बिगड़ गई।
फिर जांच को पहुंचे तो वहां भी फुटकर का रोड़ा आया। किसी तरह से जांच कराकर 11 को दोबार चाइल्ड सेंटर पहुंचे तो डॉक्टर ने इंसेफेलाइटिस की संभावना बताते हुए मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान शनिवार शाम उसकी मौत हो गई। इसके बाद रविवार को पहुंचे घर वाले डॉक्टर और स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह से मामले को शांत कराया।
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इलाज में लापरवाही नहीं हुई है। वह आए थे, तो जरूरी दवाएं दी गई थीं। हमारे यहां इमरजेंसी केस में बड़े नोट भी लिए जा रहे हैं। सभी आरोप निराधार हैं।
- डॉ. राजेश कुमार गुप्ता
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राजघाट के मुरब्बा गली में रहने वाले मो. जुनेद की 6 वर्षीय बेटी तस्मिया सिद्दीकी की तबीयत 8 नवंबर को अचानक खराब हो गई थी। उसे उल्टी, दस्त के साथ बुखार की शिकायत थी। वह घंटाघर स्थित अन्नपूर्णा चाइल्ड सेंटर पहुंचे। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी ने बड़े नोट लेने से मना कर दिया और फुटकर की मांग की। इससे वह लौट गए। अगले दिन फुटकर की व्यवस्था करके पहुंचे तो डॉ. राजेश कुमार गुप्ता ने तस्मिया को देखा और कुछ दवाएं लिखीं। मगर डॉक्टर ने जो दवाएं दी उसके बाद तबीयत सुधरने की जगह और बिगड़ गई।
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फिर जांच को पहुंचे तो वहां भी फुटकर का रोड़ा आया। किसी तरह से जांच कराकर 11 को दोबार चाइल्ड सेंटर पहुंचे तो डॉक्टर ने इंसेफेलाइटिस की संभावना बताते हुए मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान शनिवार शाम उसकी मौत हो गई। इसके बाद रविवार को पहुंचे घर वाले डॉक्टर और स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह से मामले को शांत कराया।
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इलाज में लापरवाही नहीं हुई है। वह आए थे, तो जरूरी दवाएं दी गई थीं। हमारे यहां इमरजेंसी केस में बड़े नोट भी लिए जा रहे हैं। सभी आरोप निराधार हैं।
- डॉ. राजेश कुमार गुप्ता