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जीआरपी से छुटकारा चाहते हैं 400 पुलिसकर्मी
सतीश कुमार पांडेय, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Fri, 21 Oct 2016 12:50 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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जीआरपी में कार्यकाल पूरा कर चुके पुलिसकर्मी रिलीव न होने से परेशान हैं। इस बारे में उन्होंने डीजीपी को भी ट्वीट कर जानकारी दी मगर एक सप्ताह बीतने के बाद भी उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। गोरखपुर अनुभाग में ऐसे 300 से अधिक पुलिसकर्मी हैं, जिन्होंने अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है और वे अब जिलों में लौटना चाहते हैं, मगर उन्हें रिलीव नहीं किया जा रहा।
वर्ष 2012 में जीआरपी के गोरखपुर अनुभाग में 25 दरोगा, 22 हेड कांस्टेबल और करीब 400 सिपाहियों की तैनाती हुई थी। 2015 में जीआरपी में इनका निर्धारित तीन साल का कार्यकाल पूरा हो गया। गोरखपुर, देवरिया, बस्ती, गोंडा, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बहराइच, आनंदनगर, संतकबीरनगर में तैनात पुलिसकर्मी समय सीमा बीतने के बाद जिले में लौटने के लिए परेशान हैं। सीओ, एसपी को प्रार्थना पत्र देने के बाद भी सुनवाई न होने पर उन्होंने डीजीपी जावीद अहमद को ट्वीट कर रिलीव करने की अपील की, मगर एक सप्ताह बाद भी कोई जवाब न आने से उनमें निराशा हैै।
अफसर मौखिक रूप से रिलीव न करने का कारण जीआरपी में फोर्स की कमी बता रहे हैं। पिछले साल जीआरपी में जितने दरोगा, हेड कांस्टेबल की पोस्टिंग हुई, उनमें से अधिकांश ने आमद ही नहीं कराई। साथियों की इस मनमानी का खामियाजा कार्यकाल पूरा करने वाले पुलिसकर्मियों को उठाना पड़ रहा है।
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वर्ष 2012 में जीआरपी के गोरखपुर अनुभाग में 25 दरोगा, 22 हेड कांस्टेबल और करीब 400 सिपाहियों की तैनाती हुई थी। 2015 में जीआरपी में इनका निर्धारित तीन साल का कार्यकाल पूरा हो गया। गोरखपुर, देवरिया, बस्ती, गोंडा, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बहराइच, आनंदनगर, संतकबीरनगर में तैनात पुलिसकर्मी समय सीमा बीतने के बाद जिले में लौटने के लिए परेशान हैं। सीओ, एसपी को प्रार्थना पत्र देने के बाद भी सुनवाई न होने पर उन्होंने डीजीपी जावीद अहमद को ट्वीट कर रिलीव करने की अपील की, मगर एक सप्ताह बाद भी कोई जवाब न आने से उनमें निराशा हैै।
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अफसर मौखिक रूप से रिलीव न करने का कारण जीआरपी में फोर्स की कमी बता रहे हैं। पिछले साल जीआरपी में जितने दरोगा, हेड कांस्टेबल की पोस्टिंग हुई, उनमें से अधिकांश ने आमद ही नहीं कराई। साथियों की इस मनमानी का खामियाजा कार्यकाल पूरा करने वाले पुलिसकर्मियों को उठाना पड़ रहा है।
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