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मेधा की ‘जंग’ में फिर छाईं छात्राएं
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 26 Mar 2017 01:25 AM IST
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दीक्षांत समरोह में पदक पाने वाले विद्यार्थी।
- फोटो : Amar Ujala
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी का दीक्षा भवन एक बार फिर मेधावियों की प्रतिभा का गवाह बना। राज्यपाल राम नाईक ने यूनिवर्सिटी के 52 विद्यार्थियों को 152 मेडल प्रदान किए। मेधा की इस ‘जंग’ में फिर से छात्राओं ने बाजी मारी। गोल्ड मेडल पाने वाले 52 विद्यार्थियों में 34 छात्राएं हैं। हालांकि 9 गोल्ड मेडल पाकर मृदुत्पल निलोर्मि गुप्त टॉपर बने।
शनिवार को दीक्षा भवन में गोरखपुर यूनिवर्सिटी का 35वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल राम नाईक ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि देश में महिला सशक्तिकरण हो रहा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण यूनिवर्सिटी का रिजल्ट है। 65 प्रतिशत मेडल पर छात्राओं ने कब्जा जमा लिया है। चुटकी लेते हुए कहा कि अगर ऐसी ही स्थिति रहती है तो आने वाले समय में छात्रों को आरक्षण की आवश्यकता पड़ेगी। वहीं विद्यार्थियों से कहा कि अब उनके सामने नई तरह की चुनौती है। कहा कि चुनौती कैसी भी हो हमें कोशिश करते रहनी चाहिए। शिक्षकों को नसीहत देते हुए राज्यपाल ने कहा कि उनके सामने भी देश के युवाओं को सही दिशा देने की चुनौती होगी।
मुख्य अतिथि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव डॉ. शैलेश नायक ने कहा कि देश के सामने प्राकृतिक आपदाएं और जलवायु परिवर्तन के संभावी प्रभाव दो प्रमुख चुनौतियां हैं। गोरखपुर बाढ़ एवं भूकंप से उच्च स्तर से प्रभावित है। हमें इन आपदाओं के साथ ही रहना है, किंतु इनसे निपटने के लिए हमें तैयार होना होगा। सबसे महत्वपूर्ण पहले यह है कि शिक्षा की एक ऐसी प्रणाली विकसित की जाए जो इस दृष्टिकोण को कार्यान्वित करने वाले वैज्ञानिकों, अभियंताओं, समाजविज्ञानियों एवं प्रबंधकों को पैदा कर सके। हमें क्षेत्रीय, राष्ट्रीय, संस्थागत एवं वैयक्तिक स्पर पर शिक्षण के लिए अपनी क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके लिए अध्यापकों, विद्यार्थियों, प्रशासन और विश्वविद्यालय को महती भूमिका निभानी है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी नाग ने स्वागत भाषण ने धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव अशोक कुमार अरविंद और संचालन प्रो. विपुला दुबे ने किया।
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इन्हें मिला पदक
0 स्वर्ण पदक एवं स्मृति स्वर्ण पदक- 2016
बीए में भावना पुरोहित और अभिषेक कुुमार गुप्ता, बीए हिंदी में अभिषेक कुमार गुप्ता और सविता निषाद, बीए विज्ञान में स्वेच्छा सिंह और अभिनव गुप्ता, बीए वाणिज्य में कृष्णकांत शुक्ला, बीबीए में जागृति सिंह, बीए कृषि विज्ञान में संतोष विश्वकर्मा, बीए गृह विज्ञान में शिवानी सिंह, एमए कला में सुरेंद्र प्रजापति, एमए मंचकला में विजय लक्ष्मी, एमए गृह विज्ञान में अनामिका उपाध्याय, एमए मनोविज्ञान में रूपाली श्रीवास्तव, एमए संस्कृत में सुषमा सिंह, एमए भूगोल में मंजूषा सिंह, एमए इतिहास में रेणुका किस्कू, एमए प्राचीन इतिहास धर्मेंद्र, एमए उर्दू मो. नाजिर हुसैन, एमए अंग्रेजी निष्ठा पांडेय, एमए समाजशास्त्र एकतामणि त्रिपाठी, एमए दर्शनशास्त्र कुमारी कमला, एमए हिंदी चंचल चौहान, एमए राजनीतिशास्त्र दीप शिखा गुप्ता, एमए शिक्षाशास्त्र मेनका तिवारी, एमए सतत शिक्षा एवं प्रसार कार्य में पूजा सोनकर, स्नातकोत्तर रक्षा एवं स्त्रातजिक अध्ययन में शिवानी सिंह, पीजी रसायनशास्त्र में रजत तिवारी, पीजी गणित में मृदुत्पल निलोर्मि गुप्त, एमए-एमएससी गणित मीनू गुप्ता, पीजी प्राणि विज्ञान प्रिया तिवारी, पीजी वनस्पति विज्ञान में सुमईया खान, पीजी भौतिकी विज्ञान में ज्योति शुक्ला, पीजी जैव प्रौद्योगिकी में ललिता कुमार, पीजी इलेक्ट्रॉनिक्स में शरद चंद्र त्रिपाठी, पीजी सांख्यिकी में सुरभि पांडेय, पीजी पर्यावरण विज्ञान में ऋचा, पीजी माइक्रोबायोलॉजी में पूर्णिमा, पीजी गृहविज्ञान में सुनिधि गुप्ता, पीजी कृषि में सविता रानी, पीजी अर्थशास्त्र कृष्ण कुमार विश्वकर्मा, एमबीए में निष्ठा मनोहर, पीजी वाणिज्य बंदिता नाथ, एमबीबीएस दीप्ति वाही, स्नातक विधि में गरिमा पांडेय
0 स्वर्ण पदक एवं स्मृति स्वर्ण पदक- 2015
स्नातक विधि में प्रियंका सिंह को, बीसीए में प्रखर गोयल, बीजे में सूर्यकांत श्रीवास्तव, बीएड में सोनिया कुमारी, बीपीएड में अश्वनी कुमार गुप्ता, एमएड में श्रीकांत चौधरी
सर्वाधिक मेडल पाने वाले विद्यार्थी-
मृदुत्पल निलोर्मि गुप्त- (9), सुषमा सिंह- (8), चंचल चौहान- (6), दीप शिखा गुप्ता (6), गरिमा पांडेय- (5), भावना पुरोहित (4), प्रिया तिवारी- (4), सुमईया खान- (4), बंदिता नाथ- (4), अभिनय गुप्ता- (3) , सुरेंद्र प्रजापति (3), मंजूषा सिंह- (3), धर्मेंद्र- (4), रजत तिवारी- (3), निष्ठा मनोहर- (3)
खुशी इतनी की छू लें आसमान
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मेडल पाने वाले मेधावियों की खुशी सातवें आसमान पर थी। सभी ने इसे जीवन का यादगार पल बताया। कुछ ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता तो कुछ ने शिक्षकों को दिया। उत्साह से लबरेज कुछ मेधावियों में भविष्य में उच्च पदस्थ सेवाओं में जाने तो कुछ ने शिक्षक तो किसी ने शोध के क्षेत्र में काम करने की इच्छा जताई।
असफलाताओं से लिया सबक
छोटी-छोटी असफलताओं से सबक लिया, तब जाकर यह सफलता मिली है। आगे सिविल सर्विसेज की तैयारी कर देश की सेवा करना चाहता हूं। मेरी सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को जाता है।
-मृदुत्पल नीलोर्मि गुप्त, स्नातकोत्तर गणित
जज बनकर करूंगी देश सेवा
मेरी सफलता का श्रेय पिता नील कमल गुप्त को जाता है। उन्होंने हमेशा बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित किया। आगे जज बनकर देश की सेवा करने का लक्ष्य बनाया है। इस दिशा में आगे बढ़ रही हूं।
- गरिमा पांडेय, स्नातक विधि
प्रोफेसर बनाना है लक्ष्य
मेरे पिता किसान होने के बाद भी मेरी शिक्षा के प्रति हमेशा चिंतित रहते हैं। मेरी पढ़ाई में उनका हमेशा से सहयोग रहा है। आगे चलकर प्रोफसर बनकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए काम करना चाहता हूं।
- सुषमा सिंह, स्नातकोत्तर संस्कृत
गुरुजनों को सफलता का श्रेय
मेरी सफलता का श्रेय गुरुजनों को जाता है। उनके मार्गदर्शन के बिना लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो जाता। माता-पिता ने भी हमेशा बेहतर करने के लिए प्रेरित किया।
- सोनिया कुमारी, बीएड
सफलता की पहली सीढ़ी मिली
सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ने पर उत्साह बढ़ा है। आगे भी ये सिलसिला जारी रखने की कोशिश करूंगा। सरकारी नौकरी के लिए कई जगह आवेदन किया है। उम्मीद है कि जल्द ही सफलता मिलेगी।
- अभिनय गुप्त, बीसीए
यादगार बन गया पल
राज्यपाल के हाथों सम्मानित होना जीवन का यादगार पल है। मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। बस सच्चे मन से प्रयास करने की जरूरत है। भविष्य में अध्यापन के क्षेत्र में काम करना चाहती हूं।
- भावना पुरोहित, स्नातक कला
पूरे परिवार में है जश्न का माहौल
रिजल्ट की घोषणा होने के बाद से ही पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। सभी ने बधाई दी है। आगे चलकर बैंकिंग सेक्टर में काम करना चाहता हूं। उसकी तैयारी चल रही है। उम्मीद है अगला पड़ाव जल्द मिलेगा।
- जागृति सिंह, स्नातक कला और वाणिज्य
‘1.15 लाख विद्यार्थियों तक पहुंचाएं मुख्य अतिथि का संदेश’
राज्यपाल ने कुलपति से कहा कि सभागार में उपस्थित विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने मुख्य अतिथि के संदेश की प्रति देकर बधाई का काम किया है, लेकिन कुलपति को चाहिए कि वह इस वर्ष उपाधि पाने वाले सभी 1.15 लाख विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र के साथ मुख्य अतिथि डॉ. शैलेश नायक का संदेश भिजवाएं।
नायक और नाईक में थोड़ा सा फर्क, लगे ठहाके
राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि ‘नायक’ और ‘नाईक’ में बस थोड़ा सा फर्क है। डॉ. शैलेश नायक गुजरात से हैं और मैं राम नाईक महाराष्ट्र से हूं। मैं उत्तर प्रदेश का राज्यपाल हूं और हम दोनों आज गोरखपुर में हैं। यह है हमारे देश की विविधताओं को एक सूत्र में बंधने का उदाहरण।
यूनिवर्सिटी कैलेंडर के पालन पर जताई खुशी
गोरखपुर यूनिवर्सिटी शनिवार को हीरक जयंती मना रहा था। हीरक जयंती वर्ष के मौके पर 35वां दीक्षांत भी आयोजित हो रहा था। राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में कुल 29 विश्वविद्यालय हैं। इनमें से चार नए हैं, जिनका अभी कोर्स पूरा नहीं हुआ है। अब तक 23 विश्वविद्यालयों में दीक्षांत हो चुका है। अप्रैल तक दोनों विश्वविद्यालय में दीक्षांत संपन्न हो जाएगा। खुशी की बात है कि विश्वविद्यालय कैलेंडर के अनुसार सब कुछ होने लगा।
एनसीसी कैडेटों ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर
दीक्षांत समारोह में एनसीसी कैडेटों ने कुलाधिपति राम नाईक को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। उनके आगमन पर एनसीसी कैडेटों ने प्रभारी ले. डॉ. विनीता पाठक की अगुवाई में कन्वेंशन सेंटर पर उन्हें गॉर्ड आफ आनर दिया। राष्ट्रगान के धुन के साथ परेड की सलामी लेने के बाद कुलाधिपति ने स्वागत गीत के बीच परेड का निरीक्षण किया।
ऐसे मौके पर तालियां बजा सकते हैं
जब कुलपति ने कुछ कोर्सों के विद्यार्थियों को उपाधि देने की घोषणा की तो ऑडिटोरियम में खामोशी छाई रही। तब राज्यपाल ने कहा कि ऐसे मौके पर आप ताली बजा सकते हैं।
सोने वाले की नहीं, जागने वाले की फोटो खींचो
समारोह के दौरान अगली पंक्ति में बैठे नगर विधायक को झपकी आ गई। ऐसे में कुछ फोटो जर्नलिस्ट उनकी फोटो खींचने लगे। तो राज्यपाल ने कहा कि अरे सोने वाले की फोटो क्यों खींच रहे हो। जागे हुए लोगों की फोटो खींचिए।
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शनिवार को दीक्षा भवन में गोरखपुर यूनिवर्सिटी का 35वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल राम नाईक ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि देश में महिला सशक्तिकरण हो रहा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण यूनिवर्सिटी का रिजल्ट है। 65 प्रतिशत मेडल पर छात्राओं ने कब्जा जमा लिया है। चुटकी लेते हुए कहा कि अगर ऐसी ही स्थिति रहती है तो आने वाले समय में छात्रों को आरक्षण की आवश्यकता पड़ेगी। वहीं विद्यार्थियों से कहा कि अब उनके सामने नई तरह की चुनौती है। कहा कि चुनौती कैसी भी हो हमें कोशिश करते रहनी चाहिए। शिक्षकों को नसीहत देते हुए राज्यपाल ने कहा कि उनके सामने भी देश के युवाओं को सही दिशा देने की चुनौती होगी।
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मुख्य अतिथि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव डॉ. शैलेश नायक ने कहा कि देश के सामने प्राकृतिक आपदाएं और जलवायु परिवर्तन के संभावी प्रभाव दो प्रमुख चुनौतियां हैं। गोरखपुर बाढ़ एवं भूकंप से उच्च स्तर से प्रभावित है। हमें इन आपदाओं के साथ ही रहना है, किंतु इनसे निपटने के लिए हमें तैयार होना होगा। सबसे महत्वपूर्ण पहले यह है कि शिक्षा की एक ऐसी प्रणाली विकसित की जाए जो इस दृष्टिकोण को कार्यान्वित करने वाले वैज्ञानिकों, अभियंताओं, समाजविज्ञानियों एवं प्रबंधकों को पैदा कर सके। हमें क्षेत्रीय, राष्ट्रीय, संस्थागत एवं वैयक्तिक स्पर पर शिक्षण के लिए अपनी क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके लिए अध्यापकों, विद्यार्थियों, प्रशासन और विश्वविद्यालय को महती भूमिका निभानी है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी नाग ने स्वागत भाषण ने धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव अशोक कुमार अरविंद और संचालन प्रो. विपुला दुबे ने किया।
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इन्हें मिला पदक
0 स्वर्ण पदक एवं स्मृति स्वर्ण पदक- 2016
बीए में भावना पुरोहित और अभिषेक कुुमार गुप्ता, बीए हिंदी में अभिषेक कुमार गुप्ता और सविता निषाद, बीए विज्ञान में स्वेच्छा सिंह और अभिनव गुप्ता, बीए वाणिज्य में कृष्णकांत शुक्ला, बीबीए में जागृति सिंह, बीए कृषि विज्ञान में संतोष विश्वकर्मा, बीए गृह विज्ञान में शिवानी सिंह, एमए कला में सुरेंद्र प्रजापति, एमए मंचकला में विजय लक्ष्मी, एमए गृह विज्ञान में अनामिका उपाध्याय, एमए मनोविज्ञान में रूपाली श्रीवास्तव, एमए संस्कृत में सुषमा सिंह, एमए भूगोल में मंजूषा सिंह, एमए इतिहास में रेणुका किस्कू, एमए प्राचीन इतिहास धर्मेंद्र, एमए उर्दू मो. नाजिर हुसैन, एमए अंग्रेजी निष्ठा पांडेय, एमए समाजशास्त्र एकतामणि त्रिपाठी, एमए दर्शनशास्त्र कुमारी कमला, एमए हिंदी चंचल चौहान, एमए राजनीतिशास्त्र दीप शिखा गुप्ता, एमए शिक्षाशास्त्र मेनका तिवारी, एमए सतत शिक्षा एवं प्रसार कार्य में पूजा सोनकर, स्नातकोत्तर रक्षा एवं स्त्रातजिक अध्ययन में शिवानी सिंह, पीजी रसायनशास्त्र में रजत तिवारी, पीजी गणित में मृदुत्पल निलोर्मि गुप्त, एमए-एमएससी गणित मीनू गुप्ता, पीजी प्राणि विज्ञान प्रिया तिवारी, पीजी वनस्पति विज्ञान में सुमईया खान, पीजी भौतिकी विज्ञान में ज्योति शुक्ला, पीजी जैव प्रौद्योगिकी में ललिता कुमार, पीजी इलेक्ट्रॉनिक्स में शरद चंद्र त्रिपाठी, पीजी सांख्यिकी में सुरभि पांडेय, पीजी पर्यावरण विज्ञान में ऋचा, पीजी माइक्रोबायोलॉजी में पूर्णिमा, पीजी गृहविज्ञान में सुनिधि गुप्ता, पीजी कृषि में सविता रानी, पीजी अर्थशास्त्र कृष्ण कुमार विश्वकर्मा, एमबीए में निष्ठा मनोहर, पीजी वाणिज्य बंदिता नाथ, एमबीबीएस दीप्ति वाही, स्नातक विधि में गरिमा पांडेय
0 स्वर्ण पदक एवं स्मृति स्वर्ण पदक- 2015
स्नातक विधि में प्रियंका सिंह को, बीसीए में प्रखर गोयल, बीजे में सूर्यकांत श्रीवास्तव, बीएड में सोनिया कुमारी, बीपीएड में अश्वनी कुमार गुप्ता, एमएड में श्रीकांत चौधरी
सर्वाधिक मेडल पाने वाले विद्यार्थी-
मृदुत्पल निलोर्मि गुप्त- (9), सुषमा सिंह- (8), चंचल चौहान- (6), दीप शिखा गुप्ता (6), गरिमा पांडेय- (5), भावना पुरोहित (4), प्रिया तिवारी- (4), सुमईया खान- (4), बंदिता नाथ- (4), अभिनय गुप्ता- (3) , सुरेंद्र प्रजापति (3), मंजूषा सिंह- (3), धर्मेंद्र- (4), रजत तिवारी- (3), निष्ठा मनोहर- (3)
खुशी इतनी की छू लें आसमान
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मेडल पाने वाले मेधावियों की खुशी सातवें आसमान पर थी। सभी ने इसे जीवन का यादगार पल बताया। कुछ ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता तो कुछ ने शिक्षकों को दिया। उत्साह से लबरेज कुछ मेधावियों में भविष्य में उच्च पदस्थ सेवाओं में जाने तो कुछ ने शिक्षक तो किसी ने शोध के क्षेत्र में काम करने की इच्छा जताई।
असफलाताओं से लिया सबक
छोटी-छोटी असफलताओं से सबक लिया, तब जाकर यह सफलता मिली है। आगे सिविल सर्विसेज की तैयारी कर देश की सेवा करना चाहता हूं। मेरी सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को जाता है।
-मृदुत्पल नीलोर्मि गुप्त, स्नातकोत्तर गणित
जज बनकर करूंगी देश सेवा
मेरी सफलता का श्रेय पिता नील कमल गुप्त को जाता है। उन्होंने हमेशा बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित किया। आगे जज बनकर देश की सेवा करने का लक्ष्य बनाया है। इस दिशा में आगे बढ़ रही हूं।
- गरिमा पांडेय, स्नातक विधि
प्रोफेसर बनाना है लक्ष्य
मेरे पिता किसान होने के बाद भी मेरी शिक्षा के प्रति हमेशा चिंतित रहते हैं। मेरी पढ़ाई में उनका हमेशा से सहयोग रहा है। आगे चलकर प्रोफसर बनकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए काम करना चाहता हूं।
- सुषमा सिंह, स्नातकोत्तर संस्कृत
गुरुजनों को सफलता का श्रेय
मेरी सफलता का श्रेय गुरुजनों को जाता है। उनके मार्गदर्शन के बिना लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो जाता। माता-पिता ने भी हमेशा बेहतर करने के लिए प्रेरित किया।
- सोनिया कुमारी, बीएड
सफलता की पहली सीढ़ी मिली
सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ने पर उत्साह बढ़ा है। आगे भी ये सिलसिला जारी रखने की कोशिश करूंगा। सरकारी नौकरी के लिए कई जगह आवेदन किया है। उम्मीद है कि जल्द ही सफलता मिलेगी।
- अभिनय गुप्त, बीसीए
यादगार बन गया पल
राज्यपाल के हाथों सम्मानित होना जीवन का यादगार पल है। मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। बस सच्चे मन से प्रयास करने की जरूरत है। भविष्य में अध्यापन के क्षेत्र में काम करना चाहती हूं।
- भावना पुरोहित, स्नातक कला
पूरे परिवार में है जश्न का माहौल
रिजल्ट की घोषणा होने के बाद से ही पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। सभी ने बधाई दी है। आगे चलकर बैंकिंग सेक्टर में काम करना चाहता हूं। उसकी तैयारी चल रही है। उम्मीद है अगला पड़ाव जल्द मिलेगा।
- जागृति सिंह, स्नातक कला और वाणिज्य
‘1.15 लाख विद्यार्थियों तक पहुंचाएं मुख्य अतिथि का संदेश’
राज्यपाल ने कुलपति से कहा कि सभागार में उपस्थित विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने मुख्य अतिथि के संदेश की प्रति देकर बधाई का काम किया है, लेकिन कुलपति को चाहिए कि वह इस वर्ष उपाधि पाने वाले सभी 1.15 लाख विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र के साथ मुख्य अतिथि डॉ. शैलेश नायक का संदेश भिजवाएं।
नायक और नाईक में थोड़ा सा फर्क, लगे ठहाके
राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि ‘नायक’ और ‘नाईक’ में बस थोड़ा सा फर्क है। डॉ. शैलेश नायक गुजरात से हैं और मैं राम नाईक महाराष्ट्र से हूं। मैं उत्तर प्रदेश का राज्यपाल हूं और हम दोनों आज गोरखपुर में हैं। यह है हमारे देश की विविधताओं को एक सूत्र में बंधने का उदाहरण।
यूनिवर्सिटी कैलेंडर के पालन पर जताई खुशी
गोरखपुर यूनिवर्सिटी शनिवार को हीरक जयंती मना रहा था। हीरक जयंती वर्ष के मौके पर 35वां दीक्षांत भी आयोजित हो रहा था। राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में कुल 29 विश्वविद्यालय हैं। इनमें से चार नए हैं, जिनका अभी कोर्स पूरा नहीं हुआ है। अब तक 23 विश्वविद्यालयों में दीक्षांत हो चुका है। अप्रैल तक दोनों विश्वविद्यालय में दीक्षांत संपन्न हो जाएगा। खुशी की बात है कि विश्वविद्यालय कैलेंडर के अनुसार सब कुछ होने लगा।
एनसीसी कैडेटों ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर
दीक्षांत समारोह में एनसीसी कैडेटों ने कुलाधिपति राम नाईक को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। उनके आगमन पर एनसीसी कैडेटों ने प्रभारी ले. डॉ. विनीता पाठक की अगुवाई में कन्वेंशन सेंटर पर उन्हें गॉर्ड आफ आनर दिया। राष्ट्रगान के धुन के साथ परेड की सलामी लेने के बाद कुलाधिपति ने स्वागत गीत के बीच परेड का निरीक्षण किया।
ऐसे मौके पर तालियां बजा सकते हैं
जब कुलपति ने कुछ कोर्सों के विद्यार्थियों को उपाधि देने की घोषणा की तो ऑडिटोरियम में खामोशी छाई रही। तब राज्यपाल ने कहा कि ऐसे मौके पर आप ताली बजा सकते हैं।
सोने वाले की नहीं, जागने वाले की फोटो खींचो
समारोह के दौरान अगली पंक्ति में बैठे नगर विधायक को झपकी आ गई। ऐसे में कुछ फोटो जर्नलिस्ट उनकी फोटो खींचने लगे। तो राज्यपाल ने कहा कि अरे सोने वाले की फोटो क्यों खींच रहे हो। जागे हुए लोगों की फोटो खींचिए।