{"_id":"59218e4b4f1c1b3b6a535d66","slug":"bale-mia-fair","type":"story","status":"publish","title_hn":"धूमधाम से मना बाले मियां का चौथियार ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धूमधाम से मना बाले मियां का चौथियार
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Mon, 22 May 2017 01:45 AM IST
विज्ञापन
बाले मिया की दरगाह पर चादर चढ़ाने पहुंचे जायरीन।
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बहरामपुर स्थित हजरत सैयद सालार मसऊद गाजी मियां रहमतुल्लाह अलैह ‘बाले मियां’ के आस्ताने पर उनका चौथियार रविवार को धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में जायरीन दरगाह पर पहुंचे।
बाले मियां के उर्स के मौके पर एक सप्ताह से दरगाह परिसर में मेला लगा हुआ है। मेले में जहां बच्चों के मनोरंजन के लिए तरह-तरह के झूले लगे हैं तो दूसरी तरफ लजीज व्यंजन की दुकानें भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इन व्यंजनों का स्वाद महिलाओं और बच्चों को खूब लुभा रहा है। चौथियार के मौके पर सुबह से ही दरगाह पर जायरीन का तांता लगा हुआ था। यहां पहुंचने वालों में पुरुषों से ज्यादा महिलाएं थीं। किसी ने बच्चों का सिर मुड़ाया तो किसी ने दावत कर मन्नत पूरी की। गरीबों में कनूरी बांटी गई, लोगों को शर्बत भी पिलाई गई।
मोहम्मद खालिक और मुहम्मद असलम ने बताया कि यह मेला आपसी सौहार्द का प्रतीक है। आसपास के कस्बों के अलावा दूसरे शहरों से भी बड़ी संख्या में जायरीन यहां आते हैं। ऐसा माना जाता है कि बाबा के दरगाह पर जो भी मन्नत सच्चे दिल से मांगी जाती है, वह जरूर पूरी होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बाले मियां के उर्स के मौके पर एक सप्ताह से दरगाह परिसर में मेला लगा हुआ है। मेले में जहां बच्चों के मनोरंजन के लिए तरह-तरह के झूले लगे हैं तो दूसरी तरफ लजीज व्यंजन की दुकानें भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इन व्यंजनों का स्वाद महिलाओं और बच्चों को खूब लुभा रहा है। चौथियार के मौके पर सुबह से ही दरगाह पर जायरीन का तांता लगा हुआ था। यहां पहुंचने वालों में पुरुषों से ज्यादा महिलाएं थीं। किसी ने बच्चों का सिर मुड़ाया तो किसी ने दावत कर मन्नत पूरी की। गरीबों में कनूरी बांटी गई, लोगों को शर्बत भी पिलाई गई।
विज्ञापन
मोहम्मद खालिक और मुहम्मद असलम ने बताया कि यह मेला आपसी सौहार्द का प्रतीक है। आसपास के कस्बों के अलावा दूसरे शहरों से भी बड़ी संख्या में जायरीन यहां आते हैं। ऐसा माना जाता है कि बाबा के दरगाह पर जो भी मन्नत सच्चे दिल से मांगी जाती है, वह जरूर पूरी होती है।
विज्ञापन