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बीमारी के आगे बेबस थी गरीबी, मौत के पंजे से छुड़ा लाया आयुष्मान
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आयुष्मान की खबर में पूर्णमासी।
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श्रृंखला-3
बीमारी के आगे बेबस थी गरीबी, मौत के पंजे से छुड़ा लाया आयुष्मान
केस 1
दिल की बीमारी ने सदमे में ला दिया था
::: संत कबीर नगर के पूर्णमासी (55) मुंबई की एक हीरा फैक्ट्री में काम करते थे। मजदूरी करके परिवार चला रहे थे। उनकी तबीयत कुछ महीनों से ठीक नहीं थी। मई में छुट्टी लेकर घर आए और एक डॉक्टर पास गए तो पता चला कि दिल की बीमारी है और एंजियोप्लास्टी कराना होगा। इसका खर्च जानने के बाद तो पूरा परिवार सदमा में आ गया। सभी ये सोचने लगे कि आखिर इलाज होगा कैसे। इसी बीच उन्हें याद आया कि पिछले साल ही उनके परिवार का चयन आयुष्मान में हुआ था। इसी के आधार उसने आर्यन हास्पिटल में संपर्क किया। आयुष्मान सूची में होने की वजह से डॉक्टर 1ह्य तुरंत भर्ती किया और 27 जुलाई को उसकी एंजियोप्लास्टी भी हो गई। अब पूर्णमासी पूरी तरह से स्वस्थ है।
केस 2
आयुष्मान से मिली खुशहाल जिंदगी
::: जगदीशपुर, खोराबार की गीता (59) के पति घर पर ही रहते हैं। जब कभी काम मिला तो मजदूरी करके जो कुछ रुपये आए उसी से जीवन चलता है। बेटा अमरनाथ अभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। बाहर रहकर ट्यूशन पढ़ाते हैं और खुद की कमाई से पढ़ाई को आगे बढ़ा रहे है। इसी बीच जब उन्हें माता के बीमारी के बारे में पता चला तो पूरी तरह से टूट गए थे। आयुष्मान योजना में नाम तो था पर कार्ड अभी नहीं मिला था। सीएमओ दफ्तर से संपर्क किया और फिर कार्ड हासिल कर आर्यन हास्पिटल पहुंचे। जनवरी में इनकी एंजियोप्लास्टी की गई। सफल ऑपरेशन के बाद वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं। बेटे अमरनाथ ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान उनका एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ। मां भी स्वस्थ जिंदगी जी रही हैं।
शिवम सिंह
गोरखपुर। गरीबी के बीच अगर गंभीर बीमारी हो जाए तो यह दर्द को और बढ़ा देती है। कुछ ऐसा ही संत कबीर नगर कस्बा निवासी पूर्णमासी और जगदीशपुर की गीता देवी के साथ भी हुआ। दोनों ही परिवार अत्यधिक गरीबी में जीवन यापन कर रहे थे। इसी बीच पता चला कि दिल की बीमारी हो गई है। डॉक्टर के पास गए तो सलाह मिली कि एंजियोप्लास्टी करानी होगी, जिसका खर्च कम से कम 65 हजार रुपये आएगा। यह सुनते ही पूर्णमासी और गीता ने जिंदगी से हार मार ली थी। घर वालों की नींद भी उड़ गई थी मगर इसी बीच उन्हें याद आया कि आयुष्मान योजना में उनका कार्ड बना है। इसी कार्ड को लेकर वह शहर के आर्यन हास्पिटल पहुंचे और डॉक्टर अखिलेश पटेल ने नियमानुसार नि:शुल्क एंजियोप्लास्टी की और पूर्णमासी और गीता की जिंदगी आबाद हो गई। स्वस्थ हो चुके पूर्णमासी और गीता भी यही बोल रहे कि यदि आयुष्मान नहीं होता तो मौत के पंजे उन्हें दबोच चुके होते।
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बीमारी के आगे बेबस थी गरीबी, मौत के पंजे से छुड़ा लाया आयुष्मान
केस 1
दिल की बीमारी ने सदमे में ला दिया था
::: संत कबीर नगर के पूर्णमासी (55) मुंबई की एक हीरा फैक्ट्री में काम करते थे। मजदूरी करके परिवार चला रहे थे। उनकी तबीयत कुछ महीनों से ठीक नहीं थी। मई में छुट्टी लेकर घर आए और एक डॉक्टर पास गए तो पता चला कि दिल की बीमारी है और एंजियोप्लास्टी कराना होगा। इसका खर्च जानने के बाद तो पूरा परिवार सदमा में आ गया। सभी ये सोचने लगे कि आखिर इलाज होगा कैसे। इसी बीच उन्हें याद आया कि पिछले साल ही उनके परिवार का चयन आयुष्मान में हुआ था। इसी के आधार उसने आर्यन हास्पिटल में संपर्क किया। आयुष्मान सूची में होने की वजह से डॉक्टर 1ह्य तुरंत भर्ती किया और 27 जुलाई को उसकी एंजियोप्लास्टी भी हो गई। अब पूर्णमासी पूरी तरह से स्वस्थ है।
केस 2
आयुष्मान से मिली खुशहाल जिंदगी
::: जगदीशपुर, खोराबार की गीता (59) के पति घर पर ही रहते हैं। जब कभी काम मिला तो मजदूरी करके जो कुछ रुपये आए उसी से जीवन चलता है। बेटा अमरनाथ अभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। बाहर रहकर ट्यूशन पढ़ाते हैं और खुद की कमाई से पढ़ाई को आगे बढ़ा रहे है। इसी बीच जब उन्हें माता के बीमारी के बारे में पता चला तो पूरी तरह से टूट गए थे। आयुष्मान योजना में नाम तो था पर कार्ड अभी नहीं मिला था। सीएमओ दफ्तर से संपर्क किया और फिर कार्ड हासिल कर आर्यन हास्पिटल पहुंचे। जनवरी में इनकी एंजियोप्लास्टी की गई। सफल ऑपरेशन के बाद वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं। बेटे अमरनाथ ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान उनका एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ। मां भी स्वस्थ जिंदगी जी रही हैं।
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शिवम सिंह
गोरखपुर। गरीबी के बीच अगर गंभीर बीमारी हो जाए तो यह दर्द को और बढ़ा देती है। कुछ ऐसा ही संत कबीर नगर कस्बा निवासी पूर्णमासी और जगदीशपुर की गीता देवी के साथ भी हुआ। दोनों ही परिवार अत्यधिक गरीबी में जीवन यापन कर रहे थे। इसी बीच पता चला कि दिल की बीमारी हो गई है। डॉक्टर के पास गए तो सलाह मिली कि एंजियोप्लास्टी करानी होगी, जिसका खर्च कम से कम 65 हजार रुपये आएगा। यह सुनते ही पूर्णमासी और गीता ने जिंदगी से हार मार ली थी। घर वालों की नींद भी उड़ गई थी मगर इसी बीच उन्हें याद आया कि आयुष्मान योजना में उनका कार्ड बना है। इसी कार्ड को लेकर वह शहर के आर्यन हास्पिटल पहुंचे और डॉक्टर अखिलेश पटेल ने नियमानुसार नि:शुल्क एंजियोप्लास्टी की और पूर्णमासी और गीता की जिंदगी आबाद हो गई। स्वस्थ हो चुके पूर्णमासी और गीता भी यही बोल रहे कि यदि आयुष्मान नहीं होता तो मौत के पंजे उन्हें दबोच चुके होते।
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