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तीमारदारों को कर दिया बाहर ताकि न हो शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Thu, 08 Sep 2016 12:23 AM IST
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राहुल गांधी के आने पर वार्ड से बाहर निकलते परेशान तीमारदार।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के मेडिकल कॉलेज के इंसेफेलाइटिस वार्ड में पहुंचने से पहले सारी व्यवस्था चाक चौबंद कर दी गई थी। कुछ को छोड़ सभी तीमारदार बाहर कर दिए गए थे। जाहिर है ऐसे में दवा की कमी या किसी अन्य खामियों के बारे में कोई शिकायत ही नहीं कर सका। कुछ समय अंदर गुजारने के बाद जब राहुल गांधी बाहर आए तो बोले, बजट की कमी है। केंद्र सरकार से कम बजट मिल रहा है जिस वजह से इलाज प्रभावित हो रहा है। कर्मचारियों को मानदेय तक नहीं मिल पा रहा है।
राहुल गांधी को बुधवार की सुबह साढ़े दस बजे मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित सौ बेड के इंसेफेलाइटिस वार्ड का निरीक्षण करना था, लेकिन वह 11.30 बजे पहुंचे। इससे पहले सुबह आठ बजे से ही वार्ड को एसपीजी ने सुरक्षा घेरे में ले लिया था और अस्पताल प्रशासन तीमारदारों को बाहर करने में लगा रहा। एक भी तीमारदार न दिखे और इस पर भी न सवाल हो जाए, इस वजह से चंद ऐसे लोगों को भीतर छोड़ा गया जो कुछ समय पहले ही अस्पताल आए थे। उन्हें न तो दवा की पूरी जानकारी थी और न व्यवस्था की। यही वजह थी कि निरीक्षण के बाद राहुल को भी बोलने के लिए सिर्फ बजट का मुद्दा ही मिल पाया।
बाहर खड़े तीमारदार बेचन, शकुंतला आदि का कहना था कि हम लोगों को सुबह ही अस्पताल से बाहर कर दिया गया था। यदि अंदर होते थे दवा की बात जरूरत बताते। पांच दिनों से हम यहां हैं और अब तक करीब आठ हजार रुपये की दवा खरीद चुके हैं।
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राहुल गांधी को बुधवार की सुबह साढ़े दस बजे मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित सौ बेड के इंसेफेलाइटिस वार्ड का निरीक्षण करना था, लेकिन वह 11.30 बजे पहुंचे। इससे पहले सुबह आठ बजे से ही वार्ड को एसपीजी ने सुरक्षा घेरे में ले लिया था और अस्पताल प्रशासन तीमारदारों को बाहर करने में लगा रहा। एक भी तीमारदार न दिखे और इस पर भी न सवाल हो जाए, इस वजह से चंद ऐसे लोगों को भीतर छोड़ा गया जो कुछ समय पहले ही अस्पताल आए थे। उन्हें न तो दवा की पूरी जानकारी थी और न व्यवस्था की। यही वजह थी कि निरीक्षण के बाद राहुल को भी बोलने के लिए सिर्फ बजट का मुद्दा ही मिल पाया।
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बाहर खड़े तीमारदार बेचन, शकुंतला आदि का कहना था कि हम लोगों को सुबह ही अस्पताल से बाहर कर दिया गया था। यदि अंदर होते थे दवा की बात जरूरत बताते। पांच दिनों से हम यहां हैं और अब तक करीब आठ हजार रुपये की दवा खरीद चुके हैं।
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