{"_id":"5d5daeca8ebc3e6c3c625264","slug":"ambulence-gorakhpur-news-gkp318484418","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकारी एंबुलेंस के मरीज को निजी एंबुलेंस में ‘बेचते’ रंगे हाथ पकड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकारी एंबुलेंस के मरीज को निजी एंबुलेंस में ‘बेचते’ रंगे हाथ पकड़ा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकारी एंबुलेंस के मरीज को निजी एंबुलेंस में ‘बेचते’ रंगे हाथ पकड़ा
मेडिकल कॉलेज। सरकारी एंबुलेंस (108 नंबर) चालक को एक मरीज को नर्सिंग होम के लिए ‘बेचते’ हुए, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ गणेश आचार्य ने बुधवार को रंगे हाथों पकड़ लिया। 108 सेवा का चालक मरीज को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने लाया था, लेकिन उसे कॉलेज कैंपस में ही एक नर्सिंग होम की एंबुलेंस में शिफ्ट किया जा रहा था।
निजी एंबुलेंस चालक को पुलिस के हवाले कर दिया गया और 108 नंबर के एंबुलेंस कर्मचारियों का परिचयपत्र जब्त कर लिया गया। इसके बाद प्राचार्य ने मरीज को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराके इलाज शुरू करवा दिया।
यह खुला खेल है कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाहर निजी एंबुलेंस वैन खड़ी करके मरीज व उनके परिजनों को बरगलाया जाता है। साथ ही बिचौलियों के माध्यम से मरीजों को फंसाकर नर्सिंग होम ले जाते हैं। प्राचार्य के मुताबिक सरकारी एंबुलेंस से आने वाले मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया जाना चाहिए था लेकिन उसे सरकारी एंबुलेंस से ही सीधे निजी एंबुलेंस (जेजे हास्पिटल, बस्ती) में शिफ्ट किया जाने लगा। इस दौरान मेरी निगाह पड़ गई और वैन को रुकवा लिया। पूछताछ से पता चला कि बिचौलिए मरीजों को पकड़ते हैं, फिर कहते हैं कि मेडिकल कॉलेज में जगह नहीं है। निजी नर्सिंग होम में बढ़िया इलाज हो जाएगा। परेशान मरीज व तीमारदार उनके झांसे में आ जाते हैं। नर्सिंग होम में जब मरीज आर्थिक रूप से टूट जाता है, उसकी हालत और बिगड़ जाती है, फिर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। जिस एंबुलेंस को पकड़ा गया था, उसके चालक को गुलरिहा पुलिस के हवाले कर दिया गया है। मेडिकल कॉलेज पुलिस चौकी इंचार्ज गौरव कुमार कन्नौजिया ने बताया कि निजी एंबुलेंस मानबेला चिलुआताल निवासी रिजवान के नाम है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच होगी। एंबुलेंस बस्ती की बताई जा रही है, लेकिन वह गोरखपुर की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज। सरकारी एंबुलेंस (108 नंबर) चालक को एक मरीज को नर्सिंग होम के लिए ‘बेचते’ हुए, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ गणेश आचार्य ने बुधवार को रंगे हाथों पकड़ लिया। 108 सेवा का चालक मरीज को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने लाया था, लेकिन उसे कॉलेज कैंपस में ही एक नर्सिंग होम की एंबुलेंस में शिफ्ट किया जा रहा था।
निजी एंबुलेंस चालक को पुलिस के हवाले कर दिया गया और 108 नंबर के एंबुलेंस कर्मचारियों का परिचयपत्र जब्त कर लिया गया। इसके बाद प्राचार्य ने मरीज को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराके इलाज शुरू करवा दिया।
विज्ञापन
यह खुला खेल है कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाहर निजी एंबुलेंस वैन खड़ी करके मरीज व उनके परिजनों को बरगलाया जाता है। साथ ही बिचौलियों के माध्यम से मरीजों को फंसाकर नर्सिंग होम ले जाते हैं। प्राचार्य के मुताबिक सरकारी एंबुलेंस से आने वाले मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया जाना चाहिए था लेकिन उसे सरकारी एंबुलेंस से ही सीधे निजी एंबुलेंस (जेजे हास्पिटल, बस्ती) में शिफ्ट किया जाने लगा। इस दौरान मेरी निगाह पड़ गई और वैन को रुकवा लिया। पूछताछ से पता चला कि बिचौलिए मरीजों को पकड़ते हैं, फिर कहते हैं कि मेडिकल कॉलेज में जगह नहीं है। निजी नर्सिंग होम में बढ़िया इलाज हो जाएगा। परेशान मरीज व तीमारदार उनके झांसे में आ जाते हैं। नर्सिंग होम में जब मरीज आर्थिक रूप से टूट जाता है, उसकी हालत और बिगड़ जाती है, फिर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। जिस एंबुलेंस को पकड़ा गया था, उसके चालक को गुलरिहा पुलिस के हवाले कर दिया गया है। मेडिकल कॉलेज पुलिस चौकी इंचार्ज गौरव कुमार कन्नौजिया ने बताया कि निजी एंबुलेंस मानबेला चिलुआताल निवासी रिजवान के नाम है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच होगी। एंबुलेंस बस्ती की बताई जा रही है, लेकिन वह गोरखपुर की है।
विज्ञापन