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फर्जी आदेश पर अभियुक्त को छुड़ाने के आरोपी को सजा
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Thu, 14 Apr 2016 12:56 AM IST
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अदालत
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इलाहाबाद हाई कोर्ट का फर्जी आदेश लगाकर हत्याभियुक्त को छुड़ाने के आरोपी को एसीजेएम वाकर शमीम रिजवी ने झंगहा क्षेत्र के बौठा निवासी अभियुक्त श्याम मोहन यादव को सात साल की कैद और 35 हजार रुपये अर्थदंड देने का फैसला सुनाया है।
कोर्ट में अभियोजन पक्ष की ओर से अभियोजन अधिकारी ओम शिव वासुदेव जायसवाल और वसीम लारी का कथन था कि इस फर्जीवाड़े की रिपोर्ट कैंट थाने में तत्कालीन सीजेएम शंभू नाथ सरोज ने दर्ज कराया था। थाने में दी तहरीर में उन्होंने कहा था कि झंगहा थाने में 1999 में दर्ज हत्या के मुकदमे में राम मोहन यादव जेल में निरुद्ध था।
अभियुक्त श्याम मोहन यादव इस मुकदमे में पैरवीकार था। श्याम मोहन ने हाई कोर्ट का एक फर्जी जमानत आदेश सीजेएम की कोर्ट में दाखिल कर दिया। तत्कालीन सीजेएम राम कृष्ण शुक्ला ने शंका होने पर उसे हाईकोर्ट में सत्यापन के लिए भेज दिया।
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वहां से उसे फर्जी घोषित कर दिया गया। फर्जी आदेश को कोर्ट में श्याम मोहन ने दाखिल किया था इसलिए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। कोर्ट ने अभियुक्त को दोषी पाते हुए उक्त सजा से दंडित किया।
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कोर्ट में अभियोजन पक्ष की ओर से अभियोजन अधिकारी ओम शिव वासुदेव जायसवाल और वसीम लारी का कथन था कि इस फर्जीवाड़े की रिपोर्ट कैंट थाने में तत्कालीन सीजेएम शंभू नाथ सरोज ने दर्ज कराया था। थाने में दी तहरीर में उन्होंने कहा था कि झंगहा थाने में 1999 में दर्ज हत्या के मुकदमे में राम मोहन यादव जेल में निरुद्ध था।
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अभियुक्त श्याम मोहन यादव इस मुकदमे में पैरवीकार था। श्याम मोहन ने हाई कोर्ट का एक फर्जी जमानत आदेश सीजेएम की कोर्ट में दाखिल कर दिया। तत्कालीन सीजेएम राम कृष्ण शुक्ला ने शंका होने पर उसे हाईकोर्ट में सत्यापन के लिए भेज दिया।
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वहां से उसे फर्जी घोषित कर दिया गया। फर्जी आदेश को कोर्ट में श्याम मोहन ने दाखिल किया था इसलिए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। कोर्ट ने अभियुक्त को दोषी पाते हुए उक्त सजा से दंडित किया।