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29 साल बाद मिली बिना लाइसेंस दूध बेचने की सजा
Gorakhpur
Updated Thu, 27 Nov 2014 05:30 AM IST
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गोरखपुर। बिना लाइसेंस दूध बेचने पर एक दूध कारोबारी को जहां 29 साल बाद सजा मिली वहीं नमूना भरने का विरोध करने तथा फूड इंस्पेक्टर से हाथापाई भी एक दूध व्यवसाई के लिए मंहगी पड़ गई। बिना लाइसेंस दूध बेचने पर तो उसे सजा मिली ही नमूना न भरने देने पर भी कोर्ट ने उसे अलग से सजा सुनाई।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल राय के मुताबिक 31 मई 1985 को महराजगंज के ब्रिजमनगंज से दूध व्यवसाई बुद्धू के यहां से नमूना लिया गया था। जांच के दौरान वह दूध बेचने का लाइसेंस नहीं दिखा पाया। उधर नमूनों की जांच में भी दूध में वसा कम पाया गया। इस पर महकमे ने कोर्ट में वाद दाखिल कर रखा था। करीब 29 साल बाद अपर मुख्य न्याय दंडाधिकारी प्रथम ने बिना लाइसेंस के दूध बेचने पर बुद्धू को छह माह का कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
इसी तरह 11 अप्रैल 1999 को महेसरा पुल के पास बिना लाइसेंस के दूध बेच रहे सरोज उर्फ संजय ने खाद्य निरीक्षक से मारपीट की और दूध का नमूना भी नहीं लेने दिया। इस मामले में अपर मुख्य न्याय दंडाधिकारी प्रथम ने बिना लाइसेंस के दूध बेचने पर सरोज को छह माह का कारावास और एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाने के अलावा खाद्य निरीक्षक से मारपीट पर एक साल का कारावास और दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
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राजस्थान से आए नमक के नमूने लिए गए
राजस्थान के नागौर से लाए गए विभिन्न ब्रांड के नमक के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने चार नमूने लिए। उन्होंने यह कार्रवाई बुधवार की दोपहर मोतीराम अड्डा के पास उस समय की जब रेलवे स्टेशन पर रैक से माल उतारने के बाद उसे ट्रक में रखकर ले जाया जा रहा था। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल राय ने बताया कि जो नमूने लिए गए हैं उनमें टोयटा सॉल्ट, दिनकर प्रीमियम, टाटो सॉल्ट और कलका सॉल्ट ब्रांड के नमक शामिल हैं। इन्हें देवरिया, मऊ और बहराइच ले जाया जा रहा था। कार्रवाई करने वाली टीम में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी के अलावा खाद्य सुरक्षा अधिकारी अजीत कुमार, नरेंद्र प्रताप सिंह, कन्हैया लाल वर्मा आदि शामिल थे।
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मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल राय के मुताबिक 31 मई 1985 को महराजगंज के ब्रिजमनगंज से दूध व्यवसाई बुद्धू के यहां से नमूना लिया गया था। जांच के दौरान वह दूध बेचने का लाइसेंस नहीं दिखा पाया। उधर नमूनों की जांच में भी दूध में वसा कम पाया गया। इस पर महकमे ने कोर्ट में वाद दाखिल कर रखा था। करीब 29 साल बाद अपर मुख्य न्याय दंडाधिकारी प्रथम ने बिना लाइसेंस के दूध बेचने पर बुद्धू को छह माह का कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
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इसी तरह 11 अप्रैल 1999 को महेसरा पुल के पास बिना लाइसेंस के दूध बेच रहे सरोज उर्फ संजय ने खाद्य निरीक्षक से मारपीट की और दूध का नमूना भी नहीं लेने दिया। इस मामले में अपर मुख्य न्याय दंडाधिकारी प्रथम ने बिना लाइसेंस के दूध बेचने पर सरोज को छह माह का कारावास और एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाने के अलावा खाद्य निरीक्षक से मारपीट पर एक साल का कारावास और दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
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राजस्थान से आए नमक के नमूने लिए गए
राजस्थान के नागौर से लाए गए विभिन्न ब्रांड के नमक के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने चार नमूने लिए। उन्होंने यह कार्रवाई बुधवार की दोपहर मोतीराम अड्डा के पास उस समय की जब रेलवे स्टेशन पर रैक से माल उतारने के बाद उसे ट्रक में रखकर ले जाया जा रहा था। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल राय ने बताया कि जो नमूने लिए गए हैं उनमें टोयटा सॉल्ट, दिनकर प्रीमियम, टाटो सॉल्ट और कलका सॉल्ट ब्रांड के नमक शामिल हैं। इन्हें देवरिया, मऊ और बहराइच ले जाया जा रहा था। कार्रवाई करने वाली टीम में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी के अलावा खाद्य सुरक्षा अधिकारी अजीत कुमार, नरेंद्र प्रताप सिंह, कन्हैया लाल वर्मा आदि शामिल थे।