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कैमरे में कैद कीं साझी संस्कृति की छवियां
Gorakhpur
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:30 AM IST
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गोरखपुर/ महराजगंज। ‘जर्नी इंडिया टू नेपाल बाई ट्रेन’ विषय पर बन रही डॉक्यूमेंट्री में गोरखपुर से नौतनवां तक के ट्रेन से सफर के उन रोचक पहलुओं को देखा और महसूस किया जा सकेगा, जो मुसाफिरों के लिए यादगार बनते हैं। यह डॉक्यूमेंट्री रेल यात्रा के रोमांच ही नहीं बल्कि भारत और नेपाल की साझी संस्कृति से भी परिचित कराएगी।
जर्मनी टीवी एसडब्ल्यूआर के प्रोग्राम रोमांटिक रेलवे जर्नी के लिए डॉक्यूमेंट्री फिल्म बना रहीं डायरेक्टर सुजानी मायर हॉगमैन के निर्देशन में टीम के सदस्यों ने बुधवार को रेल यात्रा, धर्म-संस्कृति व पर्यटन के हिसाब से महत्वपूर्ण दृश्य शूट किए। सुबह करीब नौ बजे नौतनवां जाने वाली पैसेंजर में सवार होकर ट्रेन के इंजन और उसकी खूबियों के साथ मुसाफिरों के अनुभव रिकॉर्ड किए। बीच के स्टेशन पर उतर कर कुछ दूर कार में सवार होकर चलती ट्रेन के भी शॉट लिए। नेपाल जा रहे विदेशी पर्यटकों से सफर के दौरान के उनके अनुभव साझा किए। जाना कि उन्हें सफर कैसा लगा, बस और रेल के सफर को लेकर सवाल पूछे । मानीराम स्टेशन पर ट्रेन रुकी तो उतरते-चढ़ते पैसेंजर और स्टेशन के दृश्य शूट किए। यह देख कर यात्रियों की भीड़ जमा हो गई। लोग शूटिंग की वजह जानने के लिए उत्सुक थे। डॉक्यमेंट्री को रोचक बनाने के लिए कैमरामैन जोखिम क्रूग ने छोटे से स्टेशन पर मुसाफिरों की भीड़, आनंदनगर और नौतनवां स्टेशन पर दोनों और से प्लेटफॉर्म पर आती ट्रेनों के दृश्य लिए तो रिकॉर्डर क्रिस्टीना एप्पल ने इंजन, हॉर्न, चलती ट्रेन की आवाज के साथ यात्रियों के लिए किए जा रहे एनाउंसमेंट रिकॉर्ड किए।
इस डॉक्यूमेंट्री में जहां धर्म के लिहाज से वाराणसी में विश्वनाथ मंदिर, गंगाघाट पर होने वाली आरती, गोरखनाथ मंदिर के शॉट लिए गए हैं, वहीं रेल सफर से जुड़े दृश्य भी लिए गए हैं। बुधवार की शाम टीम सोनौली सीमा के आसपास महत्वपूर्ण दृश्य शूट करने के बाद नेपाल रवाना हो गई। टीम की सदस्य इंडिया प्रोड्यूसर प्राची बारी ने बताया कि लुंबिनी, चितवन नेशनल पार्क, पशुपति नाथ मंदिर सहित प्रसिद्ध जगहें शूट की जाएंगी। साथ ही जयनगर से जनकपुर धाम तक 27 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल में बनी रेलवे लाइन के भी दृश्य लिए जाएंगे।
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जर्मनी टीवी एसडब्ल्यूआर के प्रोग्राम रोमांटिक रेलवे जर्नी के लिए डॉक्यूमेंट्री फिल्म बना रहीं डायरेक्टर सुजानी मायर हॉगमैन के निर्देशन में टीम के सदस्यों ने बुधवार को रेल यात्रा, धर्म-संस्कृति व पर्यटन के हिसाब से महत्वपूर्ण दृश्य शूट किए। सुबह करीब नौ बजे नौतनवां जाने वाली पैसेंजर में सवार होकर ट्रेन के इंजन और उसकी खूबियों के साथ मुसाफिरों के अनुभव रिकॉर्ड किए। बीच के स्टेशन पर उतर कर कुछ दूर कार में सवार होकर चलती ट्रेन के भी शॉट लिए। नेपाल जा रहे विदेशी पर्यटकों से सफर के दौरान के उनके अनुभव साझा किए। जाना कि उन्हें सफर कैसा लगा, बस और रेल के सफर को लेकर सवाल पूछे । मानीराम स्टेशन पर ट्रेन रुकी तो उतरते-चढ़ते पैसेंजर और स्टेशन के दृश्य शूट किए। यह देख कर यात्रियों की भीड़ जमा हो गई। लोग शूटिंग की वजह जानने के लिए उत्सुक थे। डॉक्यमेंट्री को रोचक बनाने के लिए कैमरामैन जोखिम क्रूग ने छोटे से स्टेशन पर मुसाफिरों की भीड़, आनंदनगर और नौतनवां स्टेशन पर दोनों और से प्लेटफॉर्म पर आती ट्रेनों के दृश्य लिए तो रिकॉर्डर क्रिस्टीना एप्पल ने इंजन, हॉर्न, चलती ट्रेन की आवाज के साथ यात्रियों के लिए किए जा रहे एनाउंसमेंट रिकॉर्ड किए।
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इस डॉक्यूमेंट्री में जहां धर्म के लिहाज से वाराणसी में विश्वनाथ मंदिर, गंगाघाट पर होने वाली आरती, गोरखनाथ मंदिर के शॉट लिए गए हैं, वहीं रेल सफर से जुड़े दृश्य भी लिए गए हैं। बुधवार की शाम टीम सोनौली सीमा के आसपास महत्वपूर्ण दृश्य शूट करने के बाद नेपाल रवाना हो गई। टीम की सदस्य इंडिया प्रोड्यूसर प्राची बारी ने बताया कि लुंबिनी, चितवन नेशनल पार्क, पशुपति नाथ मंदिर सहित प्रसिद्ध जगहें शूट की जाएंगी। साथ ही जयनगर से जनकपुर धाम तक 27 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल में बनी रेलवे लाइन के भी दृश्य लिए जाएंगे।
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