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आरपीएसएफ ट्रेनिंग सेंटर का होगा कायाकल्प
Gorakhpur
Updated Wed, 07 Aug 2013 05:34 AM IST
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गोरखपुर। आरपीएसएफ (रेलवे प्रोटक्शन स्पेशल फोर्स) रजही ट्रेनिंग सेंटर के कायाकल्प की कवायद शुरू हो गई है। यहां दो नये बैरक, एक शस्त्रागार, अधिकारियों के लिए सात कमरे और एक कार्यालय कक्ष बनाया जाएगा।
रजही ट्रेनिंग सेंटर में आरपीएसएफ की द्वितीय बटालियन और ट्रेनिंग ले रहे करीब 300 प्रशिक्षु रहते हैं। इनके रहने के लिए बैरक 1961 में बना था। बैरक की स्थिति काफी खराब हो गई है। दो साल पहले एक बैरक का कुछ हिस्सा गिर गया था। रेलवे प्रशासन ने दो नये बैरक और एक आधुनिक शस्त्रागार बनाने का निर्णय लिया है। प्रत्येक बैरक की क्षमता 30 बिस्तर की होगी। इसके निर्माण में अनुमानित लागत 92 लाख 97 हजार रुपये आएगी। जबकि शस्त्रागार के निर्माण में करीब 42 लाख रुपये खर्च होंगे। ट्रेनिंग सेंटर के प्रिंसिपल सुरेश कुमार ने बताया कि क्षमता से अधिक प्रशिक्षुओं के होने से काफी दिक्कत होती है। पहले सिर्फ ट्रेनिंग दी जाती थी, लेकिन इसके अतिरिक्त फोर्स के रहने और कंप्यूटर कोर्स चलाने से जगह कम पड़ रही है। भवन के जीर्णोद्धार और नये बैरक, कमरे बनाने के लिए डिमांड की गई थी। इसके बन जाने से काफी सहूलियत मिलेगी।
आरपीएसएफ ट्रेनिंग सेंटर में नये बैरक बनने से ट्रेनिंग ले रहे जवानों का काफी सहूलियत मिलेगी। टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो गई है। छह महीने में काम पूरा हो जाएगा।
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-आलोक कुमार सिंह, सीपीआरओ एनईआर
रजही ट्रेनिंग सेंटर में आरपीएसएफ की द्वितीय बटालियन और ट्रेनिंग ले रहे करीब 300 प्रशिक्षु रहते हैं। इनके रहने के लिए बैरक 1961 में बना था। बैरक की स्थिति काफी खराब हो गई है। दो साल पहले एक बैरक का कुछ हिस्सा गिर गया था। रेलवे प्रशासन ने दो नये बैरक और एक आधुनिक शस्त्रागार बनाने का निर्णय लिया है। प्रत्येक बैरक की क्षमता 30 बिस्तर की होगी। इसके निर्माण में अनुमानित लागत 92 लाख 97 हजार रुपये आएगी। जबकि शस्त्रागार के निर्माण में करीब 42 लाख रुपये खर्च होंगे। ट्रेनिंग सेंटर के प्रिंसिपल सुरेश कुमार ने बताया कि क्षमता से अधिक प्रशिक्षुओं के होने से काफी दिक्कत होती है। पहले सिर्फ ट्रेनिंग दी जाती थी, लेकिन इसके अतिरिक्त फोर्स के रहने और कंप्यूटर कोर्स चलाने से जगह कम पड़ रही है। भवन के जीर्णोद्धार और नये बैरक, कमरे बनाने के लिए डिमांड की गई थी। इसके बन जाने से काफी सहूलियत मिलेगी।
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आरपीएसएफ ट्रेनिंग सेंटर में नये बैरक बनने से ट्रेनिंग ले रहे जवानों का काफी सहूलियत मिलेगी। टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो गई है। छह महीने में काम पूरा हो जाएगा।
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-आलोक कुमार सिंह, सीपीआरओ एनईआर