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पूर्वांचल में भी पवन चक्की से पैदा होगी बिजली
Gorakhpur
Updated Sun, 26 May 2013 05:30 AM IST
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गोरखपुर। गुजरात और तमिलनाडु की तर्ज पर अब पूर्वांचल में भी पवन चक्की से बिजली पैदा की जा सकेगी। इसके लिए मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज के इलेक्ट्रिकल विभाग ने पवन गति के सटीक पूर्वानुमान के लिए पहले से विकसित सॉफ्टवेयर को और समृद्ध किया है। इस समृद्ध सॉफ्टवेयर के जरिये पवन गति का कम समय मेंसटीक पूर्वानुमान किया जा सकेगा।
अब तक जिस उपलब्ध तकनीक से पवन गति का पूर्वानुमान किया जा रहा था उससे पवन गति के मापन में समय भी ज्यादा लगता था। साथ ही सटीक पूर्वानुमान नहीं हो पा रहा था। अब उस साफ्टवेयर को और समृद्ध कर दिया गया है। जिस स्थान पर पवन चक्की से बिजली पैदा करने को पावर स्टेशन बनाना है वहां साल भर की हवा की गति के आंकडे़ को एकत्र कर उसका औसत निकाला जाएगा। फिर उसके आधार पर समृद्ध सॉफ्टवेयर के जरिये पूर्वानुमान किया जा सकेगा।
पवन की गति का सही पूर्वानुमान हो जाने की सूरत में पावर प्लांट लगाने की सार्थकता सिद्ध हो सकेगी। अब विभाग ऐसी किसी भी संस्था को अपनी मदद दे सकता है जो गैर पारंपरिक विधि से बिजली पैदा करना चाहती हो। उन्होंने बताया कि नॉन कन्वेंशनल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (नेडा) ने पवन गति का मापन कराया है। एमएमएमईसी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. केजी उपाध्याय ने बताया कि सॉफ्टवेयर को और समृद्ध करने का काम शोध छात्र अरुण चौधरी ने किया है।
अब तक जिस उपलब्ध तकनीक से पवन गति का पूर्वानुमान किया जा रहा था उससे पवन गति के मापन में समय भी ज्यादा लगता था। साथ ही सटीक पूर्वानुमान नहीं हो पा रहा था। अब उस साफ्टवेयर को और समृद्ध कर दिया गया है। जिस स्थान पर पवन चक्की से बिजली पैदा करने को पावर स्टेशन बनाना है वहां साल भर की हवा की गति के आंकडे़ को एकत्र कर उसका औसत निकाला जाएगा। फिर उसके आधार पर समृद्ध सॉफ्टवेयर के जरिये पूर्वानुमान किया जा सकेगा।
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पवन की गति का सही पूर्वानुमान हो जाने की सूरत में पावर प्लांट लगाने की सार्थकता सिद्ध हो सकेगी। अब विभाग ऐसी किसी भी संस्था को अपनी मदद दे सकता है जो गैर पारंपरिक विधि से बिजली पैदा करना चाहती हो। उन्होंने बताया कि नॉन कन्वेंशनल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (नेडा) ने पवन गति का मापन कराया है। एमएमएमईसी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. केजी उपाध्याय ने बताया कि सॉफ्टवेयर को और समृद्ध करने का काम शोध छात्र अरुण चौधरी ने किया है।
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