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राष्ट्र की रक्षा संन्यासी का पहला कर्तव्य : योगी
Updated Sat, 09 Sep 2017 08:43 PM IST
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गोरखपुर।
गोरक्ष पीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ व अवेद्यनाथ ने राष्ट्र धर्म को सभी धर्मों से ऊपर माना था। वे कहा करते थे कि भारत को भारत बनाए रखने की कुंजी सनातन हिंदू धर्म में हैं। गोरक्ष पीठ ने हमेशा उस संन्यासी परंपरा का अनुसरण किया जो मानती रही कि राष्ट्र धर्म ही हमारा धर्म है। राष्ट्र की रक्षा संन्यासी का प्रथम कर्तव्य है। कहा कि गोरक्ष पीठाधीश्वरों की शुरू की गई परंपरा आगे भी जारी रहेगी।
योगी गोरखनाथ मंदिर में चल रहे श्रद्धांजलि समारोह के अवसर पर शनिवार को अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। सीएम ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत हिंदुत्व के मूल्यों और आदर्शों की स्थापना के लिए राजनीति में आए। हिंदुत्व को राष्ट्रीयता मानने का जो मंत्र उन्होंने उस समय दिया था यदि उस समय मान लिया गया होता तो आज पूर्वोत्तर के राज्यों का अलगाववाद और जलता हुआ कश्मीर नहीं होता। उनका मानना था कि वृहद हिंदू समाज ही एकता की गारंटी है, और हिंदू समाज की एकता सामाजिक समरसता के बगैर संभव नहीं है।
कहा कि गोरक्ष पीठ हमेशा से राष्ट्रीय मुद्दों पर देश की जनता के साथ खड़ी रही। प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन के समय 1857 में तत्कालीन गोरक्ष पीठाधीश्वर ने भाग लिया था। चौरी चौरा कांड में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ को आरोपित किया गया था। ये घटनाएं इस बात की प्रमाण हैं कि गोरक्ष पीठ ने उस संन्यासी परम्परा का अनुसरण किया जो मानती रही कि राष्ट्र ही हमारा धर्म है। कहा कि गोरखपुर के वर्तमान स्वरूप के एक मात्र शिल्पी दिग्विजयनाथ महराज थे। बिखरे योगी समाज को उन्होंने एकजुट किया तथा धर्म और आध्यात्म को राष्ट्रवाद के साथ जोड़ने का कार्य किया।
गोरक्ष पीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ व अवेद्यनाथ ने राष्ट्र धर्म को सभी धर्मों से ऊपर माना था। वे कहा करते थे कि भारत को भारत बनाए रखने की कुंजी सनातन हिंदू धर्म में हैं। गोरक्ष पीठ ने हमेशा उस संन्यासी परंपरा का अनुसरण किया जो मानती रही कि राष्ट्र धर्म ही हमारा धर्म है। राष्ट्र की रक्षा संन्यासी का प्रथम कर्तव्य है। कहा कि गोरक्ष पीठाधीश्वरों की शुरू की गई परंपरा आगे भी जारी रहेगी।
योगी गोरखनाथ मंदिर में चल रहे श्रद्धांजलि समारोह के अवसर पर शनिवार को अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। सीएम ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत हिंदुत्व के मूल्यों और आदर्शों की स्थापना के लिए राजनीति में आए। हिंदुत्व को राष्ट्रीयता मानने का जो मंत्र उन्होंने उस समय दिया था यदि उस समय मान लिया गया होता तो आज पूर्वोत्तर के राज्यों का अलगाववाद और जलता हुआ कश्मीर नहीं होता। उनका मानना था कि वृहद हिंदू समाज ही एकता की गारंटी है, और हिंदू समाज की एकता सामाजिक समरसता के बगैर संभव नहीं है।
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कहा कि गोरक्ष पीठ हमेशा से राष्ट्रीय मुद्दों पर देश की जनता के साथ खड़ी रही। प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन के समय 1857 में तत्कालीन गोरक्ष पीठाधीश्वर ने भाग लिया था। चौरी चौरा कांड में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ को आरोपित किया गया था। ये घटनाएं इस बात की प्रमाण हैं कि गोरक्ष पीठ ने उस संन्यासी परम्परा का अनुसरण किया जो मानती रही कि राष्ट्र ही हमारा धर्म है। कहा कि गोरखपुर के वर्तमान स्वरूप के एक मात्र शिल्पी दिग्विजयनाथ महराज थे। बिखरे योगी समाज को उन्होंने एकजुट किया तथा धर्म और आध्यात्म को राष्ट्रवाद के साथ जोड़ने का कार्य किया।
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