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दुर्गा पंडाल: प्रतिस्पर्धा में खतरों की अनदेखी

Sun, 14 Oct 2018 11:33 PM IST
Updated Sun, 14 Oct 2018 11:33 PM IST
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दुर्गा पंडाल: प्रतिस्पर्धा में खतरों की अनदेखी

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दुर्गा पूजा पंडाल: प्रतिस्पर्धा में खतरों की अनदेखी
हाईटेंशन लाइन से सटकर बने हैं पूजा पंडाल
न अग्निशमन यंत्र, न ही रेत आदि की व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। शारदीय नवरात्र पर दुर्गा पूजन के लिए महीने भर पहले से ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं। शहर से लेकर देहात तक दुर्गा प्रतिमा स्थापित करने के लिए पंडाल सजाए जाते हैं। आयोजकों में भव्य पंडाल सजाने की प्रतिस्पर्धा होती है। ऐसे में खतरों की भी अनदेेेखी कर दी जाती है। इस बार कुछ पूजा पंडाल हाईटेंशन तार के नीचे या सटकर बनाए गए हैं।
शहर के मंगलबाजार, पुरानी बस्ती, अस्पताल चौराहा, रोडवेज तिराहा, गांधीनगर, कंपनी बाग सहित अन्य स्थानों पर भव्य पंडाल सजाए गए हैं। करीब एक महीने से कारीगर यहां डेरा डाल हुए थे। आकर्षक और सबसे भव्य पंडाल बनाने में दिन रात एक किए हुए थे। इन पर आयोजकों की ओर से भारी भरकम रकम भी खर्च की जाती है। उधर, प्रतिस्पर्धा के चक्कर में कुछ पूजा पंडाल ऐसे बना दिए हैं जिनके ऊपर से बिजली का तार गुजरा है। ऐसे में हल्की सी चिंगारी भयावह हो सकती है। शहर में सप्तमी के दिन दुर्गा प्रतिमाओं के पट खोले जाने की परंपरा है जिसके बाद भारी भीड़ होती है।जागरण, कीर्तन आदि के लिए नामी गायकों को बुलाया जाता है। सप्तमी के बाद से शहर में मेला शुरू हो जाता है। गांव के लोग भी पहुंचते हैं। लेकिन इन पंडालों में न तो अग्निशमन यंत्र है न ही आग जैसी घटना को रोकने के लिए रेत आदि की व्यवस्था। आपात स्थिति से निपटने के लिए एक ही विकल्प फायर ब्रिगेड बचता है। मेले के दौरान शहर में इतनी अधिक भीड़ होती है कि राह चल पाना मुश्किल हो जाता है।
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दुर्गा पूजा पंडालों की बढ़ती ऊंचाई और खतरों की अनदेखी के संबंध में क्षेत्राधिकारी आलोक सिंह का कहना है कि उन्हें मामले की जानकारी है। शहर में करीब 200 प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। पुलिस टीम ने सभी पंडालों की सर्वे भी किया है। आयोजकों को सुरक्षा के मानक पर एक पत्र वितरित किया गया है। भविष्य में पंडालों की ऊंचाई कम करने को भी कहा गया है। दुर्गा पूजा पंडालों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी व फौरी उपाय नहीं किए जाने के संबंध में प्रभारी जिलाधिकारी अरविंद कुमार पांडेय ने कहा कि लोगों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। निरीक्षण कर पंडाल में सुरक्षा के इंतजाम देखे जाएंगे। जरूरत पड़ने पर आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।
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