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नदी घाटों पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sat, 04 Nov 2017 07:36 PM IST
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कार्तिक पूर्णिमा पर राप्ती तट पर स्नान करते श्रद्धालु।
- फोटो : Amar Ujala
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कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान के लिए नदी, घाटों पर शनिवार को श्रद्धा का सैलाब उमड़ा। लोगाें ने स्नान के बाद दान किया और पुण्य कमाया। कई जगहों पर कार्तिक पूर्णिमा देव दीपावली के तौर पर भी मनाया गया। इस मौके पर लोगों ने दीपदान किया।
राप्ती तट स्थित स्नान घाटों पर भोर से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। सूर्योदय से पहले ही घाट पर खचाखच भीड़ जमा हो गई। लोगों ने स्नान एवं पूजन के बाद दान भी दिया। कई लोगों ने घाट पर गोदान किया। इस मौके पर मेले में बड़ों ने जरूरत के सामान खरीदे तो बच्चों ने मिठाइयां और खिलौने। कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे में शाम को तुलसी के नीचे और जलाशयों के पास दीपदान करने की परंपरा लोगों ने श्रद्धा से पूरी की और प्रकृति के प्रति श्रद्धा दर्शाते हुए भगवान विष्णु की उपासना की।
इसी दिन विष्णु ने लिया था मत्स्यावतार
मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु का मत्स्यावतार हुआ था। इसलिए इस तिथि पर किए गए पुण्य कार्य का फल दस गुना बढ़ जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना एवं दीपदान करने से पुनर्जन्म के कष्ट से छुटकारा मिलने की मान्यता के चलते असुरन चौक स्थित विष्णु मंदिर में पूरे दिन श्रद्धालुओं का आना लगा रहा।
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हनुमान मंदिर व सूरजकुंड पर हुआ दीपदान
हनुमान मंदिर और सूरजकुंड धाम में देव दीपावली मनाई गई। हनुमान मंदिर बेतियाहाता में भगवान की पूजा अर्चना से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। आयोजन का सिलसिला भजन संध्या के साथ समाप्त हुआ। सूरजकुंड धाम में हुए आयोजन के जरिए सूर्यकुंड धाम विकास समिति ने 5500 दीपों से सरोवर को सजाया और लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया गया।
भूले-भटकों को उनके परिवार से मिलाया
राप्ती तट पर नागरिक सुरक्षा कोतवाली डिवीजन व सिविल लाइंस डिवीजन ने सहायता शिविर लगाकर श्रद्धालुओं का सहयोग किया और भूले-बिछड़े लोगों को उनके घर वालों से मिलाया। शिविर प्रभारी कोतवाली डिवीजन के डिविजनल वार्डेन राजकुमार गुप्ता ने बताया कि लगभग 20 भटके हुए बच्चों व बुजुर्गों को उनके परिवारों से मिलवाया गया। शिविर में संतोष श्रीवास्तव, विकास जालान, सुरेश सैनी, रवींद्र गौड़, गुफरान कदर, राजेश कुशवाहा, हरि नारायण दुबे, मारुति श्रीवास्तव, जयहिंद निषाद, बैजनाथ मौर्य, अनुज श्रीवास्तव आदि की सहभागिता रही।
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राप्ती तट स्थित स्नान घाटों पर भोर से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। सूर्योदय से पहले ही घाट पर खचाखच भीड़ जमा हो गई। लोगों ने स्नान एवं पूजन के बाद दान भी दिया। कई लोगों ने घाट पर गोदान किया। इस मौके पर मेले में बड़ों ने जरूरत के सामान खरीदे तो बच्चों ने मिठाइयां और खिलौने। कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे में शाम को तुलसी के नीचे और जलाशयों के पास दीपदान करने की परंपरा लोगों ने श्रद्धा से पूरी की और प्रकृति के प्रति श्रद्धा दर्शाते हुए भगवान विष्णु की उपासना की।
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इसी दिन विष्णु ने लिया था मत्स्यावतार
मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु का मत्स्यावतार हुआ था। इसलिए इस तिथि पर किए गए पुण्य कार्य का फल दस गुना बढ़ जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना एवं दीपदान करने से पुनर्जन्म के कष्ट से छुटकारा मिलने की मान्यता के चलते असुरन चौक स्थित विष्णु मंदिर में पूरे दिन श्रद्धालुओं का आना लगा रहा।
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हनुमान मंदिर व सूरजकुंड पर हुआ दीपदान
हनुमान मंदिर और सूरजकुंड धाम में देव दीपावली मनाई गई। हनुमान मंदिर बेतियाहाता में भगवान की पूजा अर्चना से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। आयोजन का सिलसिला भजन संध्या के साथ समाप्त हुआ। सूरजकुंड धाम में हुए आयोजन के जरिए सूर्यकुंड धाम विकास समिति ने 5500 दीपों से सरोवर को सजाया और लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया गया।
भूले-भटकों को उनके परिवार से मिलाया
राप्ती तट पर नागरिक सुरक्षा कोतवाली डिवीजन व सिविल लाइंस डिवीजन ने सहायता शिविर लगाकर श्रद्धालुओं का सहयोग किया और भूले-बिछड़े लोगों को उनके घर वालों से मिलाया। शिविर प्रभारी कोतवाली डिवीजन के डिविजनल वार्डेन राजकुमार गुप्ता ने बताया कि लगभग 20 भटके हुए बच्चों व बुजुर्गों को उनके परिवारों से मिलवाया गया। शिविर में संतोष श्रीवास्तव, विकास जालान, सुरेश सैनी, रवींद्र गौड़, गुफरान कदर, राजेश कुशवाहा, हरि नारायण दुबे, मारुति श्रीवास्तव, जयहिंद निषाद, बैजनाथ मौर्य, अनुज श्रीवास्तव आदि की सहभागिता रही।