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फर्जी अंकपत्र की जांच शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Nov 2017 01:55 AM IST
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गोरखपुर। फर्जी अंकपत्र के जरिए शिक्षक बनने वालों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। आगरा यूनिवर्सिटी का फर्जी अंकपत्र लगाकर नियुक्ति कराने का मामला तूल पकड़े जाने के बाद जिले के शिक्षकों की जांच शुरू कर दी गई है। सूत्रों की माने तो कई शिक्षकों ने फर्जी अंकपत्र के आधार पर नौकरी हासिल की है। सभी ने ज्वाइनिंग के समय विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से अपने पक्ष में रिपोर्ट में लगवा ली थी।
विशिष्ट बीटीसी के तहत बीएड डिग्री धारकों की नियुक्ति वर्ष 2005 में हुई थी। बताया जा रहा है कि इस दौरान जमकर धांधली हुई थी और बहुत सारे लोगों ने फर्जी अंकपत्र लगाकर नियुक्ति हासिल करने में कामयाबी हासिल कर ली। पकड़ में आने से बचने के लिए बहुत सारे शिक्षकों ने गैर जनपद तबादला करा लिया। शासन स्तर पर मामला पकड़ में आने के बाद अब नए सिरे से जांच शुरू की गई है। बीएसए ने वर्ष 2005 से 2017 तक नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों के बीए व बीएड के अंकपत्रों की फोटोकॉपी सभी खंड शिक्षाधिकारियों से मांगी है।
विशिष्ट बीटीसी के तहत बीएड डिग्री धारकों की नियुक्ति वर्ष 2005 में हुई थी। बताया जा रहा है कि इस दौरान जमकर धांधली हुई थी और बहुत सारे लोगों ने फर्जी अंकपत्र लगाकर नियुक्ति हासिल करने में कामयाबी हासिल कर ली। पकड़ में आने से बचने के लिए बहुत सारे शिक्षकों ने गैर जनपद तबादला करा लिया। शासन स्तर पर मामला पकड़ में आने के बाद अब नए सिरे से जांच शुरू की गई है। बीएसए ने वर्ष 2005 से 2017 तक नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों के बीए व बीएड के अंकपत्रों की फोटोकॉपी सभी खंड शिक्षाधिकारियों से मांगी है।
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