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शस् त्र पूजा हमारी परम्परा एवं संस्कृति
Updated Mon, 02 Oct 2017 12:31 AM IST
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गोरखपुर।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर से विजय दशमी के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश व बिहार के प्रज्ञा प्रवाह के संगठन मंत्री रामआशीष ने कहा कि शस्त्र पूजा हमारी परंपरा नहीं बल्कि संस्कृति है।
वे इंपीरियल गार्डेन राजेंद्रनगर में आरएसएस की ओर से आयोजित शस्त्र पूजा कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। कहा कि संपूर्ण हिंदू समाज को एक करने का लक्ष्य होना चाहिए। इसके लिए हिंदू समाज की विभाजक रेखाओं को खत्म करना होगा। यह स्वीकार्य करना होगा कि हर एक आत्मा समान है। हर व्यक्ति में समानता है। कहा कि भारत का रीढ़ धर्म है, इसे बचाना है। धर्म की खिलाफत देश और समाज दोनों के लिए घातक है। अगर हम सनातन हिंदू धर्म की उपेक्षाओं को सहन करते रहे तो स्थिति बहुत ही भयावह होगी। इसलिए देश की पहचान भारतीय संस्कृति को बचाना होगा। यह राष्ट्र हिंदुओं का है। इसलिए इसकी रक्षा करना हम सब का कर्तव्य है। कहा कि सभी भारतीय देवी- देवताओं के हाथों में शस्त्र होता है। शक्ति पूजा हमारी संस्कृति है।
महाभारत का दृष्टांत देते हुए उन्होंने कहा कि अर्जुन अगर वह शस्त्र नहीं उठाते तो अन्याय की विजय संभव थी। पहले युद्ध में योद्धा अपने वाणों से प्रणाम करते थे। ऐसे में हम शास्त्र के साथ शस्त्र पूजन नहीं छोड़ सकते। इस मौके पर यशपाल सिंह, पृथ्वीराज सिंह, डा. राकेश सिंह, वैरिस्टर, प्रवीण, दुर्गेश, मुकेश, अनंत आदि मौजूद रहे।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर से विजय दशमी के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश व बिहार के प्रज्ञा प्रवाह के संगठन मंत्री रामआशीष ने कहा कि शस्त्र पूजा हमारी परंपरा नहीं बल्कि संस्कृति है।
वे इंपीरियल गार्डेन राजेंद्रनगर में आरएसएस की ओर से आयोजित शस्त्र पूजा कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। कहा कि संपूर्ण हिंदू समाज को एक करने का लक्ष्य होना चाहिए। इसके लिए हिंदू समाज की विभाजक रेखाओं को खत्म करना होगा। यह स्वीकार्य करना होगा कि हर एक आत्मा समान है। हर व्यक्ति में समानता है। कहा कि भारत का रीढ़ धर्म है, इसे बचाना है। धर्म की खिलाफत देश और समाज दोनों के लिए घातक है। अगर हम सनातन हिंदू धर्म की उपेक्षाओं को सहन करते रहे तो स्थिति बहुत ही भयावह होगी। इसलिए देश की पहचान भारतीय संस्कृति को बचाना होगा। यह राष्ट्र हिंदुओं का है। इसलिए इसकी रक्षा करना हम सब का कर्तव्य है। कहा कि सभी भारतीय देवी- देवताओं के हाथों में शस्त्र होता है। शक्ति पूजा हमारी संस्कृति है।
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महाभारत का दृष्टांत देते हुए उन्होंने कहा कि अर्जुन अगर वह शस्त्र नहीं उठाते तो अन्याय की विजय संभव थी। पहले युद्ध में योद्धा अपने वाणों से प्रणाम करते थे। ऐसे में हम शास्त्र के साथ शस्त्र पूजन नहीं छोड़ सकते। इस मौके पर यशपाल सिंह, पृथ्वीराज सिंह, डा. राकेश सिंह, वैरिस्टर, प्रवीण, दुर्गेश, मुकेश, अनंत आदि मौजूद रहे।
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