फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   कोई खा रहा नमक-चावल, किसी को वो नसीब भी नहीं

कोई खा रहा नमक-चावल, किसी को वो नसीब भी नहीं

Wed, 23 Aug 2017 11:11 PM IST
Updated Wed, 23 Aug 2017 11:11 PM IST
विज्ञापन
कोई खा रहा नमक-चावल, किसी को वो नसीब भी नहीं
जोगिया(सिद्धार्थनगर)। प्रशासन लाख दावा करे कि सभी बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। बावजूद इसके अभी भी चौतरफा बाढ़ के पानी से गिरे कई गांव ऐसे हैं जहां राहत सामग्री नहीं पहुंच सकी है। जोगिया ब्लॉक का लोधपुरवा गांव भी इनमें से एक है। बुधवार दोपहर तक गांव के बाढ़ पीड़ित सरकारी इमदाद की बाट जोहते रहे। पर, मदद नहीं मिली। यह गांव पिछले एक सप्ताह से बाढ़ के पानी से घिरा है और लोग घरों की छतों पर शरण लिए हैं। गांव में कोई नमक-चावल खाकर पेट भर रहा है तो किसी को यह भी मयस्सर नहीं। व्यक्तिगत तौर पर कुछ लोगों ने लाई-चना वितरित किया है। बूढ़ी राप्ती के किनारे स्थित होने के कारण अभी भी कमर तक पानी गांव में लगा हुआ है। ग्रामीण घरों की छतों पर शरण लिए हुए हैं। जो कुछ उनके पास था, उसी से काम चला रहे हैं। गांव के भवानी प्रसाद अफसरों द्वारा राहत सामग्री पहुंचने के दावे को झूठा बताते हैं। कहा कि सामग्री पहुंचाना तो दूर जिम्मेदार झांकने तक नहीं आए। बुधवार की सुबह ही एक व्यक्ति ने अपनी तरफ से लाई-चना व बिस्किट बंटवाया है। रमेश कुमार, कमलावती देवी, कमलेश लोधी ने बताया कि घर में रखा अनाज बारिश में भीग गया। थोड़ा-बहुत जो बचा है, उसे ही सूखा कर पका रहे हैं। गांव से बाहर जाने के लिए नाव न होने से नमक-चावल ही खा रहे हैं। सुरेश चंद्र, तौलेश्वर और गीता देवी का कहना था कि कमर तक पानी होने के कारण घर से बाहर निकलने में भी डर लग रहा है। नाव भी नहीं दी गई है। चंद्रकिशोर, लवकुश, तौलेश्वर प्रसाद आदि ने भी प्रशासन से मदद न मिलने की बात कही। उधर, 14 अगस्त को लखनापार-बैदौला बांध टूटने से जलमग्न लखनापार गांव का भी हाल बुरा है। बांध से ठीक सटे इस गांव में भी पानी कमर तक लगा हुआ है। दूसरों की मदद पर ग्रामीण पेट भर रहे हैं। मंगलवार को कोई खाना लेकर नहीं पहुंचा तो ग्रामीणों को भूखे ही सोना पड़ा। ग्राम प्रधान विक्रम ने बताया कि पानी कम हो रहा है, लेकिन मुश्किलें बरकरार है। स्थिति सामान्य होने में अभी कई दिन लगेंगे।
विज्ञापन

पैकेट में नहीं था चावल, सिर्फ आटा ही मिला
बाढ़ग्रस्त उदयपुर गांव में मंगलवार को राहत सामग्री वितरित की गई। सामग्री पाने वाले बृजेश सिंह ने बताया कि पैकेट में चावल, आटा, आलू सब होने की बात कही जा रही है, जबकि उन्हें मिले पैकेट में सिर्फ आटा ही था। इस गांव में करीब 375 लोगों को राहत सामग्री बांटी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed