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सुहागिनें आज मनाएंगी हरितालिका तीज

Wed, 23 Aug 2017 08:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Wed, 23 Aug 2017 08:19 PM IST
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सुहागिनें आज मनाएंगी हरितालिका तीज
हरितालिका तीज के लिए श्रृंगार का सामान खरीदतीं महिलाएं। - फोटो : Amar Ujala
अखंड सुहाग की कामना के साथ सुहागिनें हरितालिका तीज का पर्व श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के माहौल में गुरुवार को मनाएंगी। विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र की कामना के साथ ही निराजल उपवास रखेंगी और शुक्रवार सुुबह व्रत का पारन करेंगी। अविवाहित कन्याएं भी मनचाहे वर के लिए ये व्रत रखती हैं।
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ज्योतिषाचार्य पंडित शरद चंद मिश्र के मुताबिक गुरुवार को हस्त नक्षत्र है। दोपहर में 3:56 मिनट के साथ सूर्यास्त से पूर्व 6:22 मिनट तक पूजा के लिए उत्तम मुहुर्त है। क्योंकि शिव-पार्वती की पूजा के लिए प्रदोष (सायंकाल) को अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसदिन व्रती महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती की बालू या मिट्टी की मूर्ति बनाकर पूजन करती हैं और मां पार्वती की कथा भी सुनती हैं। तैयारियों को लेकर तीज का प्रभाव बाजारों में भी नजर आया। महिलाएं ने देर शाम तक गोलघर स्थित दुकानों में हाथों पर मेहंदी रचाती रहीं। वहीं घंटाघर, अलीनगर, असुरन, रुस्तमपुर में शृंगार, फल-फूल की खरीदारी हुई। इसके चलते शहर के प्रमुख चौराहों पर देर रात तक चहल-पहल बनी रही।
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हरितालिका तीज की कथा
मान्यता है कि सती ने देह का त्यागकर हिमालय के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया। बड़ी हुईं तो महाराज हिमालय को उनके विवाह की चिंता हुई। नारद ने पार्वती का विवाह भगवान विष्णु के साथ कराने की सलाह दी और हिमालय को ले जाकर विवाह का दिन भी निर्धारित कर दिया। पार्वती को अपने पुनर्जन्म का स्मरण था और वह अपने स्वामी शिव से मिलन की कामना में मग्न रहतीं थीं। पार्वती की सखियों को जब विष्णु से विवाह की जानकारी होती है तो वह पार्वती को वन में ले जाकर छुपा देती हैं। वहीं रहकर तपस्या करते हुए पार्वती ने शिव को प्राप्त किया। सखियों के द्वारा हरण किए जाने के कारण इस व्रत का नाम हरितालिका व्रत हुआ।
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शिव को रात्रि पूजा है पसंद
ज्योतिषाचार्य नरेंद्र कुमार उपाध्याय ने बताया कि शिव को रात्रि पूजा पसंद हैं। पूजा के लिए प्रदोष काल सबसे उत्तम माना जाता है। इस दौरान शिव शक्ति की आराधना से सभी मुरादें पूरी होती हैं। सुबह स्नान ध्यान के बाद इस मांगलिक व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
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