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दो दिन से गायब युवक का गड्ढे में शव मिला
Updated Mon, 24 Jul 2017 12:31 AM IST
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परतावल। श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र के पिपरपाती गांव से दो दिन पहले गायब युवक का शव रविवार की सुबह गांव के बाहर सड़क किनारे गड्ढे में उतराया मिला। लोगों की सूचना पर पहुंचे घर वालों ने शव की शिनाख्त की। मनोरोगी बताए जा रहे युवक का शव पंचनामा कर पुलिस ने घर वालों को सौंप दिया। मृतक के घर वालों का रो-रो कर बुरा हाल है।
श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र के पिपरपाती गांव के मोहन (19) पुत्र रमपत बीते शुक्रवार के दोपहर में घर से किसी कार्य बस निकले और जब दूसरे दिन भी घर वापस नहीं आए तो परिजनों ने गांव से लेकर रिश्तेदार तक हर जगह ढूंढने की कोशिश की लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। परिवार वालों ने मोहन के गायब होने की लिखित सूचना श्यामदेउरवा पुलिस को दी।
रविवार को सुबह पिपरपाती के कुछ लोग चौराहे पर जा रहे थे कि पानी में उतराया शव दिखा। उससे बदबू आ रही थी। सड़क किनारे गड्ढे में जमा पानी में शव मिलने की सूचना पुलिस को दी गई। इसके बाद वहां गांव के तमाम लोग इकट्ठा हुए। घर वालों ने बताया कि मोहन को पहले से मिर्गी की बीमारी थी और वह मनोरोगी भी था।
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इस संबंध में इंस्पेक्टर श्यामदेउरवा श्रीकांत राय ने बताया कि मृतक मोहन को मिर्गी का दौरा आने की बात उसके घर वालों ने बताई है। पंचनामा कर शव परिजनों को सौंप दिया गया।
सदा के लिए दूर हो गया चार बहनों का दुलारा भाई
महराजगंज। श्यामदेउरवां थानाक्षेत्र के पिपरपाती गांव का मोहन माता-पिता के साथ ही अपनी चार बहनों का दुलारा भाई अब सदा के लिए उनसे दूर चला गया। रविवार की भोर में गांव के बगल में स्थित गड्ढे में उतराया शव मिलने से पूरा परिवार गमगीन हो उठम। भाई के मौत की खबर सुनने के बाद बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था। जिसे देख वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गई।
ग्राम सभा पिपरपाती निवासी रामपत का 19 वर्षीय पुत्र मोहन की मानसिक स्थिति कमजोर थी जिसके कारण परिवार का हर सदस्य उसे अपने सर आंखों पर बिठाए रखता था तथा हर छोटी सी छोटी ख़ुशी देने की कोशिश करता था। मोहन अपनी चार बहनों पुष्पा, उषा, रीना व करीना का बेहद ही दुलारा था। मां चुंगी देवी अपने बेटे मोहन को हद से ज्यादा प्यार व दुलार करती थी। मंद बुद्धि होने के कारन मां मोहन को अपने आंखों से ओझल नहीं होने देती थी। मगर कुदरत को कुछ और ही मंजूर था उससे ये ख़ुशी देखी न गई। विगत दिनों पूर्व घर से लापता मोहन का शव जब रविवार को सुबह गांव के पास स्थित एक गड्ढे में उतराता हुआ मिला तो पूरे परिवार में कोहराम मच गया। मां, बाप व बहनों की चीख-पुकार सुन हर किसी का मन द्रवित हो उठता था। हर किसी की जुबान पर बस यही बात थी कि ईश्वर किसी को भी ऐसा दिन न दिखाए।
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श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र के पिपरपाती गांव के मोहन (19) पुत्र रमपत बीते शुक्रवार के दोपहर में घर से किसी कार्य बस निकले और जब दूसरे दिन भी घर वापस नहीं आए तो परिजनों ने गांव से लेकर रिश्तेदार तक हर जगह ढूंढने की कोशिश की लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। परिवार वालों ने मोहन के गायब होने की लिखित सूचना श्यामदेउरवा पुलिस को दी।
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रविवार को सुबह पिपरपाती के कुछ लोग चौराहे पर जा रहे थे कि पानी में उतराया शव दिखा। उससे बदबू आ रही थी। सड़क किनारे गड्ढे में जमा पानी में शव मिलने की सूचना पुलिस को दी गई। इसके बाद वहां गांव के तमाम लोग इकट्ठा हुए। घर वालों ने बताया कि मोहन को पहले से मिर्गी की बीमारी थी और वह मनोरोगी भी था।
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इस संबंध में इंस्पेक्टर श्यामदेउरवा श्रीकांत राय ने बताया कि मृतक मोहन को मिर्गी का दौरा आने की बात उसके घर वालों ने बताई है। पंचनामा कर शव परिजनों को सौंप दिया गया।
सदा के लिए दूर हो गया चार बहनों का दुलारा भाई
महराजगंज। श्यामदेउरवां थानाक्षेत्र के पिपरपाती गांव का मोहन माता-पिता के साथ ही अपनी चार बहनों का दुलारा भाई अब सदा के लिए उनसे दूर चला गया। रविवार की भोर में गांव के बगल में स्थित गड्ढे में उतराया शव मिलने से पूरा परिवार गमगीन हो उठम। भाई के मौत की खबर सुनने के बाद बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था। जिसे देख वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गई।
ग्राम सभा पिपरपाती निवासी रामपत का 19 वर्षीय पुत्र मोहन की मानसिक स्थिति कमजोर थी जिसके कारण परिवार का हर सदस्य उसे अपने सर आंखों पर बिठाए रखता था तथा हर छोटी सी छोटी ख़ुशी देने की कोशिश करता था। मोहन अपनी चार बहनों पुष्पा, उषा, रीना व करीना का बेहद ही दुलारा था। मां चुंगी देवी अपने बेटे मोहन को हद से ज्यादा प्यार व दुलार करती थी। मंद बुद्धि होने के कारन मां मोहन को अपने आंखों से ओझल नहीं होने देती थी। मगर कुदरत को कुछ और ही मंजूर था उससे ये ख़ुशी देखी न गई। विगत दिनों पूर्व घर से लापता मोहन का शव जब रविवार को सुबह गांव के पास स्थित एक गड्ढे में उतराता हुआ मिला तो पूरे परिवार में कोहराम मच गया। मां, बाप व बहनों की चीख-पुकार सुन हर किसी का मन द्रवित हो उठता था। हर किसी की जुबान पर बस यही बात थी कि ईश्वर किसी को भी ऐसा दिन न दिखाए।