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मुंहफट मगर विनम्र कवि थे सतन

Sun, 23 Jul 2017 01:26 AM IST
Updated Sun, 23 Jul 2017 01:26 AM IST
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मुंहफट मगर विनम्र कवि थे सतन

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गोरखपुर।
कम व गंभीर लेखन से पहचान बना गए भोजपुरी कवि सत्यनारायण मिश्र ‘सत्तन’ मुंहफट मगर विनम्र रचनाकार थे। उनकी मुंहफट्टई का मतलब किसी के प्रति असम्मान नहीं, वरन जो भी मन में आए उसे विनम्रता पूर्वक बयां कर देना था। ये बातें प्रो. रामदेव शुक्ल ने गोरखपुर यूनिवर्सिटी में सत्तन की दूसरी पुण्यतिथि पर आयोजित विचार गोष्ठी में अध्यक्षीय संबोधन के दौरान कहीं। संचालन धर्मेंद्र त्रिपाठी ने किया।

प्रो. शुक्ल ने कहा कि विलक्षण प्रतिभा के धनी सत्तन की कविताएं भोजपुरी साहित्य की अमूल्य थाती हैं। वरिष्ठ कवि देवेंद्र आर्य ने कहा कि सत्तन सर्वाधिक मौलिक रचनाकार थे। अपनी स्मृतियों को साझा करते हुए नरसिंह बहादुर चंद और डॉ. सूर्यदेव पाठक पराग ने कहा भोजपुरी भाषा के विकास को लेकर उनके जनून की जितनी भी प्रशंसा की जाए, कम होगी। श्रीधर मिश्र, वीरेंद्र मिश्र दीपक, राजेश राज, परमहंस मिश्र प्रचंड, प्रेमनाथ मिश्र, बृजेश राय, ओमप्रकाश पांडेय आचार्य, रवीन्द्र मोहन त्रिपाठी, राम सुधार सिंह सैंथवार, अवधेश शर्मा नन्द, अरविंद अकेला, चंदेश्वर परवाना, भरत शर्मा, इंजीनियर राजेश्वर सिंह, जेएच पारकर, कुमार अभिनीत और ज्योत्सना कश्यप ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इसके पूर्व सत्तन के चित्र पर पुष्पांजलि देकर उन्हें नमन किया गया। साथ ही हाल ही में दिवंगत हुए भोजपुरी के कवि एवं वरिष्ठ पत्रकार हरींद्र दिवेदी उर्फ अरुण गोरखपुरी को भी श्रद्धांजलि दी गई।
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