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रैली निकाल टीबी से जंग के लिए जागरूक किया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Sat, 24 Mar 2018 07:55 PM IST
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टीबी के इलाज के लिए रैली निकालते छात्र-छात्राएं।
- फोटो : Amar Ujala
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में टीबी एंड चेस्ट विभाग की ओर से विश्व क्षयरोग दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस बीच एमबीबीएस के विद्यार्थियों और टीबी तथा चेस्ट विभाग ने मिलकर जागरूकता रैली निकाली। प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार के नेतृत्व में 400 विद्यार्थियों के साथ विभाग के शिक्षक और कर्मचारियों ने रैली में हिस्सा लिया। रैली कॉलेज तथा अस्पताल परिसर में घूमते हुए मुख्य द्वार पहुंची, फिर पर्ची काउंटर पहुंचकर खत्म हुई।
पर्ची काउंटर पर मौजूद मरीजों-तीमारदारों तथा विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्राचार्य ने बताया कि टीबी मात्र एक शारीरिक नहीं, बल्कि सामाजिक बीमारी भी है। समाज में फैले हुए कुपोषण, खून की कमी और गंदगी से इसका सीधा रिश्ता है। उन्होंने बताया की महिलाएं, कुपोषित बच्चों, बूढे़, मधुमेह तथा अन्य गंभीर रोग से पीड़ित मरीजों को टीबी होने की आशंका अधिक होती है। इसीलिए मलिन बस्तियों में टीबी के मरीजों के होने की अधिक आशंका होती है।
इस बीमारी का संपूर्ण इलाज ही एकमात्र बचाव है। सरकार ने 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य तय किया है। उच्च स्तरीय दवाएं और संपूर्ण तरह की टीबी जांचें सरकार मुफ्त करा रही है। एमडीआर (मल्टी ड्रग रजिस्टेंट) और एक्सडीआर (एक्सट्रा ड्रग रजिस्टेंट) टीबी के इलाज में तीन से चार लाख तक की दवाओं पर खर्च आता है, लेकिन दवाएं सरकार मुफ्त में उपलब्ध करा रही है। टीबी का हर मरीज अपने मुंह पर गमछा बांध कर रहे तो इसको फैलने से रोका जा सकता है। संचालन डॉ. अश्विनी मिश्र और डॉ. शालिनी गुप्ता ने किया।
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पर्ची काउंटर पर मौजूद मरीजों-तीमारदारों तथा विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्राचार्य ने बताया कि टीबी मात्र एक शारीरिक नहीं, बल्कि सामाजिक बीमारी भी है। समाज में फैले हुए कुपोषण, खून की कमी और गंदगी से इसका सीधा रिश्ता है। उन्होंने बताया की महिलाएं, कुपोषित बच्चों, बूढे़, मधुमेह तथा अन्य गंभीर रोग से पीड़ित मरीजों को टीबी होने की आशंका अधिक होती है। इसीलिए मलिन बस्तियों में टीबी के मरीजों के होने की अधिक आशंका होती है।
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इस बीमारी का संपूर्ण इलाज ही एकमात्र बचाव है। सरकार ने 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य तय किया है। उच्च स्तरीय दवाएं और संपूर्ण तरह की टीबी जांचें सरकार मुफ्त करा रही है। एमडीआर (मल्टी ड्रग रजिस्टेंट) और एक्सडीआर (एक्सट्रा ड्रग रजिस्टेंट) टीबी के इलाज में तीन से चार लाख तक की दवाओं पर खर्च आता है, लेकिन दवाएं सरकार मुफ्त में उपलब्ध करा रही है। टीबी का हर मरीज अपने मुंह पर गमछा बांध कर रहे तो इसको फैलने से रोका जा सकता है। संचालन डॉ. अश्विनी मिश्र और डॉ. शालिनी गुप्ता ने किया।
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