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सांसदों के दर पहुंचे शिक्षामित्र
Updated Sun, 30 Jul 2017 09:37 PM IST
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सांसद कमलेश पासवान को ज्ञापन देते शिक्षामित्र।
- फोटो : Amar Ujala
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गोरखपुर।
समायोजन रद्द होने के बाद आंदोलित शिक्षामित्रों ने रविवार को जनप्रतिनिधियों के आवास पर सांकेतिक प्रदर्शन कर मांगपत्र दिया। बांसगांव संसदीय क्षेत्र से सांसद कमलेश पासवान और संतकबीरनगर से शरद त्रिपाठी की गैर मौजूदगी में उनके प्रतिनिधि को मांगपत्र की कॉपी देते हुए संसद में अध्यादेश लाकर सहायक अध्यादेश पद पर तैनात कराने की मांग की। सांसद की ओर से मंगलवार को दिल्ली में होने वाली बैठक में इसे प्रमुखता से उठाने का भरोसा दिया गया।
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ और आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के नेतृत्व में शिक्षामित्र रविवार की सुबह करीब 9 बजे मेडिकल कॉलेज स्थित सांसद कमलेश पासवान के घर पहुंचे और सांकेतिक प्रदर्शन किया। करीब आधे घंटे बाद सांसद ने शिक्षामित्रों से मुलाकात की। शिक्षामित्रों ने मांग किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल करे और राहत देने के लिए तत्काल नया अध्यादेश लाकर सहायक अध्यापक पद पर नियुक्त करे। तब तक वर्तमान में दिया जा रहा वेतन को बहाल रखा जाए। सांसद शरद त्रिपाठी अपने आवास पर मौजूद नहीं थे, उनके प्रतिनिधि ने मांगपत्र लेते हुए सांसद को मुहैया कराने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर अजय सिंह, गदाधर दुबे, अविनाश शुक्ल, रामदयाल यादव, बेचन सिंह, मनोज यादव, सुशील कुमार सिंह, लालधर निषाद, साहब यादव, अफजाल समानी, अंजनी पासवान, रामनिवास आदि मौजूद रहे।
मुश्किल यह कि ड्यूटी कहां करें
गोरखपुर। समायोजन रद्द होने से शिक्षामित्रों के सामने नई मुश्किल आ गई है। अब वे न तो शिक्षक हैं और न ही शिक्षामित्र। अविनाश शुक्ल कहते हैं कि सरकार कह रही है स्कूल में जाकर अध्यापन कार्य करें। लेकिन यह नहीं स्पष्ट किया है कि किस स्कूल पर जाएं, जहां शिक्षामित्र के रूप में मूल तैनाती थी या समायोजन होकर जिस स्कूल पर तैनात किए गए थे। अगर सही स्कूल पर ड्यूटी नहीं करते हैं तो उनका वेतन भी नहीं बनेगा। इस संबंध शिक्षाधिकारियों के पास भी कोई जवाब नहीं है।
समायोजन रद्द होने के बाद आंदोलित शिक्षामित्रों ने रविवार को जनप्रतिनिधियों के आवास पर सांकेतिक प्रदर्शन कर मांगपत्र दिया। बांसगांव संसदीय क्षेत्र से सांसद कमलेश पासवान और संतकबीरनगर से शरद त्रिपाठी की गैर मौजूदगी में उनके प्रतिनिधि को मांगपत्र की कॉपी देते हुए संसद में अध्यादेश लाकर सहायक अध्यादेश पद पर तैनात कराने की मांग की। सांसद की ओर से मंगलवार को दिल्ली में होने वाली बैठक में इसे प्रमुखता से उठाने का भरोसा दिया गया।
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ और आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के नेतृत्व में शिक्षामित्र रविवार की सुबह करीब 9 बजे मेडिकल कॉलेज स्थित सांसद कमलेश पासवान के घर पहुंचे और सांकेतिक प्रदर्शन किया। करीब आधे घंटे बाद सांसद ने शिक्षामित्रों से मुलाकात की। शिक्षामित्रों ने मांग किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल करे और राहत देने के लिए तत्काल नया अध्यादेश लाकर सहायक अध्यापक पद पर नियुक्त करे। तब तक वर्तमान में दिया जा रहा वेतन को बहाल रखा जाए। सांसद शरद त्रिपाठी अपने आवास पर मौजूद नहीं थे, उनके प्रतिनिधि ने मांगपत्र लेते हुए सांसद को मुहैया कराने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर अजय सिंह, गदाधर दुबे, अविनाश शुक्ल, रामदयाल यादव, बेचन सिंह, मनोज यादव, सुशील कुमार सिंह, लालधर निषाद, साहब यादव, अफजाल समानी, अंजनी पासवान, रामनिवास आदि मौजूद रहे।
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मुश्किल यह कि ड्यूटी कहां करें
गोरखपुर। समायोजन रद्द होने से शिक्षामित्रों के सामने नई मुश्किल आ गई है। अब वे न तो शिक्षक हैं और न ही शिक्षामित्र। अविनाश शुक्ल कहते हैं कि सरकार कह रही है स्कूल में जाकर अध्यापन कार्य करें। लेकिन यह नहीं स्पष्ट किया है कि किस स्कूल पर जाएं, जहां शिक्षामित्र के रूप में मूल तैनाती थी या समायोजन होकर जिस स्कूल पर तैनात किए गए थे। अगर सही स्कूल पर ड्यूटी नहीं करते हैं तो उनका वेतन भी नहीं बनेगा। इस संबंध शिक्षाधिकारियों के पास भी कोई जवाब नहीं है।
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