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घर के सामने कट बंद करा दी जए

Tue, 20 Jun 2017 02:23 AM IST
Updated Tue, 20 Jun 2017 02:23 AM IST
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घर के सामने कट बंद करा दी जए

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टीपी शाही
गोखपुर। साहब, मेरे घर के सामने डिवाइडर में बना कट बंद करा दीजिए, इसके चलते मेरे बेटे की जान चली गई। यह कहना था उस शख्स का जिसने नौसड़ से कालेसर तक के बीच बन रहे डिवाइडर का विरोध ही नहीं किया था बल्कि रात में अपने घर के सामने का हिस्सा ढहा भी दिया था। ‘अमर उजाला’ संवाददाता जब फोरलेन पर हो रही दुर्घटनाओं का कारण पता करने निकले तो उन्हें इस घटना की जानकारी हुई। स्वयं निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता ने भी इसकी पुष्टि की। दुर्घटना से बचाव के लिए लंबे-लंबे डिवाइडर बनाने का प्रावधान है, लेकिन निर्माण के दौरान लोग विरोध करने लगते हैं और जब दुर्घटनाएं होती हैं तो हो-हल्ला भी मचाते हैं।
लोगों की इसी जिद के चलते पैडलेगंज से कालेसर तक फोरलेन के बीच बने कट डैंजर प्वाइंट बन गए हैं। इसके चलते आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। पैडलेगंज से कालेसर तक करीब 15 किलोमीटर लंबे फोरलेन का निर्माण पीडब्ल्यूडी ने कराया है। इस सड़क के बीच में डिवाइडर बनाया गया है। लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता एके सिंह की मानें तो डिवाइडर इसलिए बनाया जाता है कि दोनों तरफ की ट्रैफिक अलग रहे और हादसे न हों, लेकिन इस सड़क पर 10-10 मीटर पर कई स्थानों पर कट बने हैं जो दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। मुख्य अभियंता एसपी सक्सेना कहते हैं कि कट का कोई प्रावधान नहीं है। प्रमुख चौराहों पर कट बन सकता है। लखनऊ के शहीद पथ को देख लीजिये, वहां पर कोई कट नहीं है। यहां डिवाइडर बनाते समय कुछ लोग जबरन उसे तोड़कर कट बना देते हैं। इससे दुर्घटनाएं होने लगती हैं।
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लोगों ने साझा किए अपने अनुभव

फोरलेन का कट मौत का दरवाजा : बृजेश
पैडलेगंज से कालेसर के बीच रहने वाले शिक्षक बृजेश मणि मिश्र बताते हैं कि फोरलेन पर वाहन सवार तेज रफ्तार से चलते हैं। इसी बीच डिवाइडर में बने कट से लोग अचानक अंदर-बाहर होने लगते हैं। इससे दुर्घटनाएं होती हैं। फोरलेन के कट मुसाफिरों के लिए मौत का दरवाजा साबित हो रहे हैं। इन्हें तत्काल बंद करा देना चाहिए।
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आए दिन गाड़ियां भिड़ती रहती हैं : बघेल
इंदिरानगर में बाढ़ खंड कार्यालय के सामने चाट का ठेला लगाने वाले मलखान बघेल ने बताया कि वह हर रोज दुर्घटनाओं के साक्षी बनते हैं। सड़क पर बने कट की वजह से आए दिन गाड़ियां एक-दूसरे से भिड़ती रहती हैं। लोग गाड़ियों की चपेट में आकर घायल हो जाते हैं। बहुतों के हाथ-पैर टूट जाते हैं। कई लोगों की तो मौत भी हो गई होगी।

मैं खुद हादसे का हो चुका हूं शिकार : अमित
इंदिरानगर से किसी काम से फोरलेन आए अमित कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि उनका अक्सर यहां आना-जाना होता है। एक बार वह कट पार कर ही रहे थे कि एक गाड़ी वाले ने टक्कर मार दी। वह तो किसी तरह बच गए पर कट के पास खड़े पोल में गाड़ी भिड़ गई। गाड़ी तो क्षतिग्रस्त हो ही गई, उसमें बैठे कई लोग घायल हो गए।


कोट :
नौसड़ से कालेसर तक केवल दो कट का ही प्रावधान था मगर जब डिवाइडर बन रहा था तो अनेक जगह लोगों ने जबरन डिवाइडर ढहाकर बड़ा गैप कर दिया। मना करने पर वे मारपीट पर आमादा हो जाते थे। एक व्यक्ति ने तो बना बनाया डिवाइडर रात में गिरा दिया, मगर सप्ताह भर बाद आकर मुझसे कहने लगा, साहब मेरे घर के पास का कट बंद करा दीजिये। इसी कट की वजह से दुर्घटना हुई और मेरे बेटे की मौत हो गई।
- आरजे प्रसाद, अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड भवन
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