{"_id":"59d0fd9d4f1c1b71548b53ed","slug":"161506868637-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छोटे पड़ गए तालाब, नदी में विसर्जित हुईं मूर्तियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छोटे पड़ गए तालाब, नदी में विसर्जित हुईं मूर्तियां
Updated Sun, 01 Oct 2017 08:07 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
गोरखपुर।
नदियों के संरक्षण के लिए अस्थायी रूप से बनाए गए तालाबों में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन की प्रशासन की कोशिश फिर से नाकाम साबित हुई। शहर में स्थापित दो हजार से ज्यादा मूर्तियों के विसर्जन की व्यवस्था में पुलिस, प्रशासन और नगर निगम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान तालाबों के आसपास ज्यादा भीड़ उमड़ी तो कई प्रतिमाओं को सीधे राप्ती नदी में विसर्जित कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए नगर निगम ने राप्ती तट पर तीन तालाबों का निर्माण कराया था। इसके अलावा डोमिनगढ़ में दो तालाब बनाए गए थे। इन तालाबों में मूर्तियों का विसर्जन निर्धारित किया गया था। लेकिन जैसे-जैसे रात होती गई, वैसे वैसे विसर्जन करने पहुंचे श्रद्धालुओं को रेला उमड़ पड़ा। नगर निगम के इंतजाम नाकाफी साबित होने लगे। काफी ज्यादा भीड़ बढ़ने की वजह से कई पूजा समितियां मूर्ति लेकर सीधे नदी में पहुंचने लगे। स्थिति यह हुई कि एक मूर्ति तालाब में की जा रही थी तो एक सीधे नदी में। करीब-करीब यही सिलसिला पूरी रात चलता रहा। एक तरह से 50 प्रतिशत मूर्तियां सीधे नदी में ही विसर्जित की गईं। हालांकि नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी रबीश चंद्र का दावा है कि निगम की व्यवस्था के अनुसार अधिकांश मूर्तियां तालाब में विसर्जित की गईं।
नदियों के संरक्षण के लिए अस्थायी रूप से बनाए गए तालाबों में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन की प्रशासन की कोशिश फिर से नाकाम साबित हुई। शहर में स्थापित दो हजार से ज्यादा मूर्तियों के विसर्जन की व्यवस्था में पुलिस, प्रशासन और नगर निगम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान तालाबों के आसपास ज्यादा भीड़ उमड़ी तो कई प्रतिमाओं को सीधे राप्ती नदी में विसर्जित कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए नगर निगम ने राप्ती तट पर तीन तालाबों का निर्माण कराया था। इसके अलावा डोमिनगढ़ में दो तालाब बनाए गए थे। इन तालाबों में मूर्तियों का विसर्जन निर्धारित किया गया था। लेकिन जैसे-जैसे रात होती गई, वैसे वैसे विसर्जन करने पहुंचे श्रद्धालुओं को रेला उमड़ पड़ा। नगर निगम के इंतजाम नाकाफी साबित होने लगे। काफी ज्यादा भीड़ बढ़ने की वजह से कई पूजा समितियां मूर्ति लेकर सीधे नदी में पहुंचने लगे। स्थिति यह हुई कि एक मूर्ति तालाब में की जा रही थी तो एक सीधे नदी में। करीब-करीब यही सिलसिला पूरी रात चलता रहा। एक तरह से 50 प्रतिशत मूर्तियां सीधे नदी में ही विसर्जित की गईं। हालांकि नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी रबीश चंद्र का दावा है कि निगम की व्यवस्था के अनुसार अधिकांश मूर्तियां तालाब में विसर्जित की गईं।
विज्ञापन