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वार्डों की हुई जांच, मिली कमियां
Updated Mon, 17 Jul 2017 12:03 AM IST
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देवरिया। सीएचसी और पीएचसी केंद्रों पर बने इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर का अपर मुख्य चिकित्साधिकारी ने निरीक्षण किया। वार्डों में दवाओं का रखरखाव और वार्डों की व्यवस्था बेहतर मिली लेकिन इसके लिए बनाए गए रजिस्टर सही नहीं मिले। इसके लिए जिम्मेदारों को हिदायत दी गई।
सीएचसी पर इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर बनाया गया है, ताकि तत्काल में रोगियों को स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज मुहैया हो सके। इसके लिए जेई/एईएस वार्ड बनाया गया है। जांच की जानकारी होने पर सलेमपुर सीएचसी के वार्ड में बेड पर पड़े मैले चादर बदलने और उस पर जमी धूल की सफाई आनन-फानन में शुरू कर दी गई। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. डीबी शाही शाम करीब चार बजे पहुंचे और करीब एक घंटे तक बारीकी से जांच की। सब कुछ ठीक मिला, लेकिन अस्पताल में ब्लड की सभी जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। वहीं इससे जुड़े बनाए गए रजिस्टर का रखरखाव सही नहीं था। इसे ठीक करने के लिए डॉ. राजेश कुमार को हिदायत दी। इसके पूर्व भागलपुर पीएचसी और लार सीएचसी पर भी जेई/एईएस वार्डों की जांच की गईा। डॉ. डीबी शाही ने बताया कि तीन अस्पतालों के इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटरों की जांच की गई। थोड़ी बहुत सभी अस्पतालों में कमी मिली। इसे ठीक करने को कहा गया।
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सीएचसी पर इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर बनाया गया है, ताकि तत्काल में रोगियों को स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज मुहैया हो सके। इसके लिए जेई/एईएस वार्ड बनाया गया है। जांच की जानकारी होने पर सलेमपुर सीएचसी के वार्ड में बेड पर पड़े मैले चादर बदलने और उस पर जमी धूल की सफाई आनन-फानन में शुरू कर दी गई। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. डीबी शाही शाम करीब चार बजे पहुंचे और करीब एक घंटे तक बारीकी से जांच की। सब कुछ ठीक मिला, लेकिन अस्पताल में ब्लड की सभी जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। वहीं इससे जुड़े बनाए गए रजिस्टर का रखरखाव सही नहीं था। इसे ठीक करने के लिए डॉ. राजेश कुमार को हिदायत दी। इसके पूर्व भागलपुर पीएचसी और लार सीएचसी पर भी जेई/एईएस वार्डों की जांच की गईा। डॉ. डीबी शाही ने बताया कि तीन अस्पतालों के इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटरों की जांच की गई। थोड़ी बहुत सभी अस्पतालों में कमी मिली। इसे ठीक करने को कहा गया।
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