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मां की आंखें चूम लें तो रोशनी बढ़ जाएगी...
Mon, 25 Mar 2019 12:23 AM IST
ajay Kumar
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
Published by: ajay Kumar
Updated Mon, 25 Mar 2019 12:23 AM IST
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कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयाोजन।
- फोटो : amar ujala
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गोरखपुर। ‘मुख्तसर होते हुए भी जिंदगी बढ़ जाएगी, मां की आंखें चूम लें तो रोशनी बढ़ जाएगी...’ मां की ममता और आंचल के महत्व बताने वाली इन पंक्तियों को सुनाकर प्रख्यात शायर मुनव्वर राना ने श्रोताओं को भावुक कर दिया। मौका था गैलेंट फाउंडेशन की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का। बरगदवां स्थित गैलेंट हाउस में जहां शायरों ने अपनी शायरी से माहौल में गंभीरता लाई तो वहीं हास्य कवियों ने अपनी रचनाओं से खूब ठहाके भी लगवाए। इसके पहले मंच का संचालन संभालते हुए शायर कलीम कैसर ने ‘कोशिश ये ज्यादा से न कुछ कम से हुई है, तामीरे वतन मैं से नहीं हम से हुई है’ सुनाकर एकता और भाईचारे को रेखांकित किया।
मशहूर शाएरा शबीना अदीब ने अपनी नज्म ‘अंधेरोें की हर एक साजिश यहां नाकाम हो जाए, उजाले हर तरफ हो रोशनी का नाम हो जाए, मेरी कोशिश तो नफरत को दिलों से दूर करना है, मेरा मकसद है दुनिया में मोहब्बत आम हो जाए।’ सुनाया तो काफी देर तक तालियां बजती रही। शबीना ने अपने पढ़ने के अलग अंदाज में ‘जो खानदानी रईस हैं वो मिजाज रखते हैं नरम अपना, तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई-नई है’ पढ़कर तमीज और तहजीब का फर्क भी समझाया। मुंबई से आए गोरखपुर निवासी कवि दिनेश बावरा ने ‘बीवी झल्लाई जोर से चिल्लाई, बोली वादे पर वादे, दिवाली पर हार दिलाऊंगा होली में सिंगापुर ले जाऊंगा, हम तो किस्मत को रो रहे हैं-विवाह को पूरे 5 साल हो गए हैं, शादी अब शादी न होकर जेल हो गई है, जिंदगी की तो साली राफेल हो गई है, हमने कहां नाराज मत हो तेरे लिया बहुत कुछ किया है, मगर रहस्य से पर्दा हटा नहीं सकता, अब आचार संहिता लग गई है तेरे लिए क्या किया बता नहीं सकता’ सुनाकर
सियासत पर तीखे व्यंग्य किए।
मुंबई के शायर शकील आजमी ने ‘हर घड़ी चश्मे-खरीदार में रहने के लिए, कुछ हुनर चाहिए बाजार में रहने के लिए, अब तो बदनामी से शोहरत का वो रिश्ता है कि लोग, नंगे हो जाते हैं अखबार में रहने के लिए।’ सुनाकर शोहरत के लिए नए-नए हथकंडे पर तंज कसा। दिल्ली से आईं अंकित सिंह ने ‘वो जिस पर रहमत हो, वो दौलत मांगता है क्या, मुहब्बत करने वाला मुहब्बत मांगता है क्या, तुम्हारा दिल कहे जब भी उजाला बन कर आ जाना, कभी उगता हुआ सूरज इजाजत मांगता है क्या’ सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी।
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कार्यक्रम के अंत में गैलेंट फाउंडेशन के सचिव चंद्र प्रकाश अग्रवाल ने सभी के प्रति आभार जताया। इस दौरान मेयर सीताराम जायसवाल, नगर विधायक डॉ आरएमडी अग्रवाल, विधायक विमलेश पासवान, पूर्व मेयर अंजू चौधरी, पूर्व मेयर सत्या पांडेय, कमिश्नर अमित गुप्ता, डीएम विजयेंद्र पांडियन, एसएसपी डॉ सुनील गुप्ता, जवाहर कसौधन, दीपक शर्मा आदि मौजूद रहे।
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मशहूर शाएरा शबीना अदीब ने अपनी नज्म ‘अंधेरोें की हर एक साजिश यहां नाकाम हो जाए, उजाले हर तरफ हो रोशनी का नाम हो जाए, मेरी कोशिश तो नफरत को दिलों से दूर करना है, मेरा मकसद है दुनिया में मोहब्बत आम हो जाए।’ सुनाया तो काफी देर तक तालियां बजती रही। शबीना ने अपने पढ़ने के अलग अंदाज में ‘जो खानदानी रईस हैं वो मिजाज रखते हैं नरम अपना, तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई-नई है’ पढ़कर तमीज और तहजीब का फर्क भी समझाया। मुंबई से आए गोरखपुर निवासी कवि दिनेश बावरा ने ‘बीवी झल्लाई जोर से चिल्लाई, बोली वादे पर वादे, दिवाली पर हार दिलाऊंगा होली में सिंगापुर ले जाऊंगा, हम तो किस्मत को रो रहे हैं-विवाह को पूरे 5 साल हो गए हैं, शादी अब शादी न होकर जेल हो गई है, जिंदगी की तो साली राफेल हो गई है, हमने कहां नाराज मत हो तेरे लिया बहुत कुछ किया है, मगर रहस्य से पर्दा हटा नहीं सकता, अब आचार संहिता लग गई है तेरे लिए क्या किया बता नहीं सकता’ सुनाकर
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सियासत पर तीखे व्यंग्य किए।
मुंबई के शायर शकील आजमी ने ‘हर घड़ी चश्मे-खरीदार में रहने के लिए, कुछ हुनर चाहिए बाजार में रहने के लिए, अब तो बदनामी से शोहरत का वो रिश्ता है कि लोग, नंगे हो जाते हैं अखबार में रहने के लिए।’ सुनाकर शोहरत के लिए नए-नए हथकंडे पर तंज कसा। दिल्ली से आईं अंकित सिंह ने ‘वो जिस पर रहमत हो, वो दौलत मांगता है क्या, मुहब्बत करने वाला मुहब्बत मांगता है क्या, तुम्हारा दिल कहे जब भी उजाला बन कर आ जाना, कभी उगता हुआ सूरज इजाजत मांगता है क्या’ सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी।
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कार्यक्रम के अंत में गैलेंट फाउंडेशन के सचिव चंद्र प्रकाश अग्रवाल ने सभी के प्रति आभार जताया। इस दौरान मेयर सीताराम जायसवाल, नगर विधायक डॉ आरएमडी अग्रवाल, विधायक विमलेश पासवान, पूर्व मेयर अंजू चौधरी, पूर्व मेयर सत्या पांडेय, कमिश्नर अमित गुप्ता, डीएम विजयेंद्र पांडियन, एसएसपी डॉ सुनील गुप्ता, जवाहर कसौधन, दीपक शर्मा आदि मौजूद रहे।