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डॉ. कफील मुलाहिजा बैरक में शिफ्ट, डॉ. राजीव तन्हा
Updated Tue, 05 Sep 2017 01:32 AM IST
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गोरखपुर।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के निलंबित पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र के साथ 24 घंटे समय गुजारने वाले डॉ. कफील खान को सोमवार की देर रात अचानक मिलेनियम बैरक के बगल में स्थित मुलाहिजा बैरक में शिफ्ट कर दिया गया। यह बैरक पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की बैरक के बगल में है। उधर, डॉ. पूर्णिमा ने थाईलैंड की महिला तस्कर के साथ बातचीत की। डॉ. पूर्णिमा ने सजायाफ्ता पूर्व मंत्री अमरमणि की पत्नी मधुमणि के बैरक में रहने की इच्छा जताई है। हालांकि जेल प्रशासन ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। डॉ. पूर्णिमा जिस बैरक में हैं, उसमें 39 और महिलाएं हैं।
बीआरडी कांड के मुख्य आरोपी डॉ. राजीव और डॉ. कफील को सोमवार को दिन में नेहरू बैरक में रखा गया था लेकिन देर रात बैरक बदल दी गई। जेल के सूत्रों ने बताया कि दोनों काफी काफी खुश थे। जेल में दाखिल होने के बाद डॉ. कफील और पूर्व प्राचार्य बातों में मशगूल रहे। इसका संज्ञान आला अफसरों ने लिया। डीआईजी जेल यादवेंद्र शुक्ला देर रात जिला जेल पहुंचे। पूरी व्यवस्था की समीक्षा की। इसके बाद ही बैरक बदलने का फैसला हुआ। डॉ. कफील को इस बैरक में कुछ समय ही रखा जाएगा, फिर सामान्य कैदियों की बैरक में शिफ्ट कर दिया जाएगा। डॉ. कफील के साथ कैदी मारपीट न करें, इसका ध्यान रखा जा रहा है। सुरक्षा कारणों का हवाला भी दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक डॉ. राजीव और डॉ. कफील के बीच कोड वर्ड में बात करने को गंभीर माना गया। यह भी कहा गया कि मुख्य आरोपियों को एक साथ एक बैरक में रखे जाने पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने नाराजगी जताई थी। इस कारण आनन-फानन में बैरक बदल दी गई। सूत्रों ने बताया कि पूर्व मंत्री अमरमणि अपने रसूक का इस्तेमाल कर जब बीमारी के बहाने मेडिकल कॉलेज में भर्ती थे, तो डॉक्टर राजीव ही वहां के प्रिंसिपल थे। यही वजह है कि डॉ. राजीव को अमरमणि की बैरक में नहीं रखा गया ताकि सवाल न उठ सके। उधर, डॉ. पूर्णिमा की डिमांड भी जेल प्रशासन पूरी कर रहा है। इसी का नतीजा है कि डीआईजी जेल को गोरखपुर में कैंप करना पड़ रहा है। सोमवार की देर शाम गोरखपुर पहुंचे डीआईजी यादवेंद्र शुक्ला अब एक सप्ताह तक गोरखपुर में ही रहेंगे। वह जेल की व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करेंगे। उन्होंने कहा कि जेल के हालात जल्द ही सामान्य हो जाएंगे।
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आदर्श बंदी हटाए गए
डॉक्टर राजीव को सुरक्षा का हवाला देकर नेहरू बैरक में ही रखा गया है। हालांकि उनके आसपास से आदर्श बंदियों को भी हटा दिया गया। अब डॉ. राजीव अकेले बैरक में हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के निलंबित पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र के साथ 24 घंटे समय गुजारने वाले डॉ. कफील खान को सोमवार की देर रात अचानक मिलेनियम बैरक के बगल में स्थित मुलाहिजा बैरक में शिफ्ट कर दिया गया। यह बैरक पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की बैरक के बगल में है। उधर, डॉ. पूर्णिमा ने थाईलैंड की महिला तस्कर के साथ बातचीत की। डॉ. पूर्णिमा ने सजायाफ्ता पूर्व मंत्री अमरमणि की पत्नी मधुमणि के बैरक में रहने की इच्छा जताई है। हालांकि जेल प्रशासन ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। डॉ. पूर्णिमा जिस बैरक में हैं, उसमें 39 और महिलाएं हैं।
बीआरडी कांड के मुख्य आरोपी डॉ. राजीव और डॉ. कफील को सोमवार को दिन में नेहरू बैरक में रखा गया था लेकिन देर रात बैरक बदल दी गई। जेल के सूत्रों ने बताया कि दोनों काफी काफी खुश थे। जेल में दाखिल होने के बाद डॉ. कफील और पूर्व प्राचार्य बातों में मशगूल रहे। इसका संज्ञान आला अफसरों ने लिया। डीआईजी जेल यादवेंद्र शुक्ला देर रात जिला जेल पहुंचे। पूरी व्यवस्था की समीक्षा की। इसके बाद ही बैरक बदलने का फैसला हुआ। डॉ. कफील को इस बैरक में कुछ समय ही रखा जाएगा, फिर सामान्य कैदियों की बैरक में शिफ्ट कर दिया जाएगा। डॉ. कफील के साथ कैदी मारपीट न करें, इसका ध्यान रखा जा रहा है। सुरक्षा कारणों का हवाला भी दिया गया।
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सूत्रों के मुताबिक डॉ. राजीव और डॉ. कफील के बीच कोड वर्ड में बात करने को गंभीर माना गया। यह भी कहा गया कि मुख्य आरोपियों को एक साथ एक बैरक में रखे जाने पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने नाराजगी जताई थी। इस कारण आनन-फानन में बैरक बदल दी गई। सूत्रों ने बताया कि पूर्व मंत्री अमरमणि अपने रसूक का इस्तेमाल कर जब बीमारी के बहाने मेडिकल कॉलेज में भर्ती थे, तो डॉक्टर राजीव ही वहां के प्रिंसिपल थे। यही वजह है कि डॉ. राजीव को अमरमणि की बैरक में नहीं रखा गया ताकि सवाल न उठ सके। उधर, डॉ. पूर्णिमा की डिमांड भी जेल प्रशासन पूरी कर रहा है। इसी का नतीजा है कि डीआईजी जेल को गोरखपुर में कैंप करना पड़ रहा है। सोमवार की देर शाम गोरखपुर पहुंचे डीआईजी यादवेंद्र शुक्ला अब एक सप्ताह तक गोरखपुर में ही रहेंगे। वह जेल की व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करेंगे। उन्होंने कहा कि जेल के हालात जल्द ही सामान्य हो जाएंगे।
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आदर्श बंदी हटाए गए
डॉक्टर राजीव को सुरक्षा का हवाला देकर नेहरू बैरक में ही रखा गया है। हालांकि उनके आसपास से आदर्श बंदियों को भी हटा दिया गया। अब डॉ. राजीव अकेले बैरक में हैं।