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काव्य की रसधारा में भीगे श्रोता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Sun, 28 Jan 2018 08:37 PM IST
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यूनिवर्सिटी के संवाद भवन मे कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ।
- फोटो : Amar Ujala
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‘मेरे जिगर में शौक से खंजर उतार दे /हाँ! मुझे तड़पने का इख्तियार दे।’ ये शेर जमुना प्रसाद उपाध्याय ने गोरखपुर यूनिवर्सिटी के संवाद भवन में पढ़ा तो माया पांडेय की स्मृति में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन तालियों की गूंज से आबाद हो उठा। इससे पूर्व शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। संचालन बाराबंकी से आए कवि रामकिशोर तिवारी ने किया।
लखनऊ के वाहिद अली ‘वाहिद’ ने अपनी बहुचर्चित अली-बजरंग बली रचना सुनाई तो समा बांध दिया। इसके बाद बारी आई हास्य कवि बादशाह तिवारी ‘प्रेमी’ की। उन्होंने अपनी रचनाओं से लोगों को जमकर हंसाया। मऊ के डॉ. कमलेश राय ने भोजपुरी में रचनाएं सुनाकर वाहवाही लूटी। अर्चना मालवीय, प्रीति गुप्ता, अभिषेक पांडेय और स्वयं चेतना पांडेय ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं का खूब मनोरंजन किया।
इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत में लोक गायिका उर्मिला शुक्ल और लोक गायक गुलाब तिवारी को कुलपति प्रो. वीके सिंह ने सम्मानित किया। अतिथियों का स्वागत डॉ. चेतना पांडेय ने किया। अध्यक्षता प्रो. चित्तरंजन मिश्र की रही और आभार ज्ञापन नरसिंह बहादुर चन्द ने किया।
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लखनऊ के वाहिद अली ‘वाहिद’ ने अपनी बहुचर्चित अली-बजरंग बली रचना सुनाई तो समा बांध दिया। इसके बाद बारी आई हास्य कवि बादशाह तिवारी ‘प्रेमी’ की। उन्होंने अपनी रचनाओं से लोगों को जमकर हंसाया। मऊ के डॉ. कमलेश राय ने भोजपुरी में रचनाएं सुनाकर वाहवाही लूटी। अर्चना मालवीय, प्रीति गुप्ता, अभिषेक पांडेय और स्वयं चेतना पांडेय ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं का खूब मनोरंजन किया।
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इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत में लोक गायिका उर्मिला शुक्ल और लोक गायक गुलाब तिवारी को कुलपति प्रो. वीके सिंह ने सम्मानित किया। अतिथियों का स्वागत डॉ. चेतना पांडेय ने किया। अध्यक्षता प्रो. चित्तरंजन मिश्र की रही और आभार ज्ञापन नरसिंह बहादुर चन्द ने किया।
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