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वन विभाग के पास रहेगी उद्यमी और बिल्डर को दी गई 150 एकड़ जमीन
Fri, 03 May 2019 01:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 03 May 2019 01:36 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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गोरखपुर। रामगढ़ताल परियोजना क्षेत्र में स्थित डेढ़ सौ एकड़ जमीन के मामले में शहर के उद्योगपति ओम प्रकाश जालान और बिल्डर अनिल त्रिपाठी को बड़ा झटका लगा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की नई दिल्ली की प्रमुख बेंच ने 29 अप्रैल 2019 को मीरा शुक्ला बनाम नगर निगम गोरखपुर के एक मामले में इस जमीन को उप्र वन विभाग को अपने कब्जे में रखने और वन क्षेत्र, वेटलैंड या जलाशय के तौर पर सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि इस जमीन पर किसी भी तरह का निर्माण नहीं होना चाहिए। प्रदेश सरकार या जीडीए पर्यटकों के लिए इसे ग्रीनलैंड के तौर पर विकसित करे और उसकी सुरक्षा भी करे। यही नहीं, कोर्ट ने प्रदेश सरकार को इस जमीन के आवंटन मामले की स्वतंत्र जांच कराने को भी कहा है। हालांकि इस मामले की विजिलेंस जांच पहले से चल रही है।
पूर्वी यूपी की नदियों और जल संग्रहकों की निगरानी के लिए बनी एनजीटी की अनुश्रवण समिति ने पिछले महीने ही रामगढ़ताल के पास की 150 एकड़ जमीन को एक उद्योगपति और बिल्डर को देने के मामले में आपत्ति दर्ज की थी। कमेटी ने एनजीटी को 98 पेज की रिपोर्ट भेज कहा था कि करीब दो दशक पहले उद्योगपति और बिल्डर को जमीन आवंटित करने में गंभीर अनियमितता बरती गई है। साथ ही अपनी रिपोर्ट में यूपी वन विभाग को यह जमीन वापस लेने, वहां पहले से मौजूद 9500 पेड़ सुरक्षित रखने, इसे जंगल और वेटलैंड के रूप में विकसित करने तथा प्रदेश सरकार से स्वतंत्र एजेंसी से इसकी जांच कराने व अनियमितता में लिप्त अफसरों, कर्मचारियों पर कार्रवाई की भी संस्तुति की थी।
उद्योगपति और बिल्डर से डेढ़ सौ एकड़ जमीन वन विभाग को वापस दिलाने के एनजीटी के आदेश का जल्द पालन शुरू किया जाएगा। एनजीटी के सभी आदेशों को प्राधिकरण हाई कोर्ट में चल रही पुर्नविचार याचिका पर छह मई को होने वाली सुनवाई में पेश करेगा। साथ ही प्रदेश सरकार भी एनजीटी के आदेश को कोर्ट के सामने रखेगा।
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- राम सिंह गौतम, सचिव, गोरखपुर विकास प्राधिकरण
एनजीटी ने हमारा पक्ष नहीं सुना। जीडीए ने जो तथ्य रखे उसी पर फैसला सुना दिया है। इस मामले मेें एनजीटी के समक्ष पुनर्विचार की अर्जी लगाई जाएगी।
- ओमप्रकाश जालान, उद्योगपति
एनजीटी ने कोई नोटिस नहीं दिया। एकतरफा सुनवाई करके फैसला दिया है। जीडीए ने तथ्यों को छिपाकर मामले को उलझाने की कोशिश की है।
- अनिल त्रिपाठी, भव्या कॉलोनाइर्जस
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पूर्वी यूपी की नदियों और जल संग्रहकों की निगरानी के लिए बनी एनजीटी की अनुश्रवण समिति ने पिछले महीने ही रामगढ़ताल के पास की 150 एकड़ जमीन को एक उद्योगपति और बिल्डर को देने के मामले में आपत्ति दर्ज की थी। कमेटी ने एनजीटी को 98 पेज की रिपोर्ट भेज कहा था कि करीब दो दशक पहले उद्योगपति और बिल्डर को जमीन आवंटित करने में गंभीर अनियमितता बरती गई है। साथ ही अपनी रिपोर्ट में यूपी वन विभाग को यह जमीन वापस लेने, वहां पहले से मौजूद 9500 पेड़ सुरक्षित रखने, इसे जंगल और वेटलैंड के रूप में विकसित करने तथा प्रदेश सरकार से स्वतंत्र एजेंसी से इसकी जांच कराने व अनियमितता में लिप्त अफसरों, कर्मचारियों पर कार्रवाई की भी संस्तुति की थी।
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उद्योगपति और बिल्डर से डेढ़ सौ एकड़ जमीन वन विभाग को वापस दिलाने के एनजीटी के आदेश का जल्द पालन शुरू किया जाएगा। एनजीटी के सभी आदेशों को प्राधिकरण हाई कोर्ट में चल रही पुर्नविचार याचिका पर छह मई को होने वाली सुनवाई में पेश करेगा। साथ ही प्रदेश सरकार भी एनजीटी के आदेश को कोर्ट के सामने रखेगा।
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- राम सिंह गौतम, सचिव, गोरखपुर विकास प्राधिकरण
एनजीटी ने हमारा पक्ष नहीं सुना। जीडीए ने जो तथ्य रखे उसी पर फैसला सुना दिया है। इस मामले मेें एनजीटी के समक्ष पुनर्विचार की अर्जी लगाई जाएगी।
- ओमप्रकाश जालान, उद्योगपति
एनजीटी ने कोई नोटिस नहीं दिया। एकतरफा सुनवाई करके फैसला दिया है। जीडीए ने तथ्यों को छिपाकर मामले को उलझाने की कोशिश की है।
- अनिल त्रिपाठी, भव्या कॉलोनाइर्जस