{"_id":"5c8e9986bdec22147163aa8f","slug":"111552849286-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्री-मेच्योर नवजात को जरूर कराएं स्तनपान : डॉ. सुषमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्री-मेच्योर नवजात को जरूर कराएं स्तनपान : डॉ. सुषमा
Mon, 18 Mar 2019 12:31 AM IST
ajay Kumar
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
Published by: ajay Kumar
Updated Mon, 18 Mar 2019 12:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर। समय से पूर्व प्रसव के चलते नवजात का जीवन खतरे में रहता है। इस खतरे से मां का दूध ही उसे बचा सकता है। ऐसे में प्री-मेच्योर नवजात को स्तनपान जरूर कराना चाहिए। दिल्ली के लेडी हार्डिंग अस्पताल के नियोनेटोलॉजी की विभागाध्यक्ष डॉ. सुषमा नांगलिया ने रविवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आयोजित सेमिनार में यह जानकारी दी। सेमिनार का आयोजन इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की जिला इकाई और बीआरडी के बाल रोग विभाग ने संयुक्त रूप से किया।
डॉ. नांगलिया ने बताया कि 27 सप्ताह से लेकर 37 सप्ताह तक के गर्भावस्था वाले नवजात को प्री-मेच्योर कहा जाता है। केजीएमयू के नियोनेटोलॉजी यूनिट की प्रभारी डॉ. माला कुमार ने बताया कि समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों में फेफड़े का विकास नहीं हो पाता है। दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के नियोनेटोलॉजी के विभागाध्यक्ष प्रो. सिद्धार्थ रामजी ने बताया कि प्री-मेच्योर बच्चे का वजन कम होता है उसके शरीर के कई अंगों का पूरी तरह से विकास नहीं होता।
ऐसे में उसे ज्यादा पौष्टिक दूध की दरकार होती है। मां के दूध सभी जरूरी तत्व हैं। बीएचयू के बालरोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि जन्म के दौरान नवजात के पेट में अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के बैक्टीरिया रहते हैं। बीमार नवजातों को आईसीयू में नसों के जरिए पोषण दिया जाता है। सेमिनार में पूर्व प्राचार्य डॉ. केपी कुशवाहा, बालरोग की विभागाध्यक्ष डॉ. महिमा मित्तल, आईएपी के अध्यक्ष डॉ. आरके सिंह, सचिव डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव, डॉ. अजय शंकर देवकुलियार, डॉ. बीके राय मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
डॉ. नांगलिया ने बताया कि 27 सप्ताह से लेकर 37 सप्ताह तक के गर्भावस्था वाले नवजात को प्री-मेच्योर कहा जाता है। केजीएमयू के नियोनेटोलॉजी यूनिट की प्रभारी डॉ. माला कुमार ने बताया कि समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों में फेफड़े का विकास नहीं हो पाता है। दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के नियोनेटोलॉजी के विभागाध्यक्ष प्रो. सिद्धार्थ रामजी ने बताया कि प्री-मेच्योर बच्चे का वजन कम होता है उसके शरीर के कई अंगों का पूरी तरह से विकास नहीं होता।
विज्ञापन
ऐसे में उसे ज्यादा पौष्टिक दूध की दरकार होती है। मां के दूध सभी जरूरी तत्व हैं। बीएचयू के बालरोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि जन्म के दौरान नवजात के पेट में अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के बैक्टीरिया रहते हैं। बीमार नवजातों को आईसीयू में नसों के जरिए पोषण दिया जाता है। सेमिनार में पूर्व प्राचार्य डॉ. केपी कुशवाहा, बालरोग की विभागाध्यक्ष डॉ. महिमा मित्तल, आईएपी के अध्यक्ष डॉ. आरके सिंह, सचिव डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव, डॉ. अजय शंकर देवकुलियार, डॉ. बीके राय मौजूद रहे।
विज्ञापन