{"_id":"5999d1624f1c1b330f8b46e1","slug":"111503252834-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"1998 की याद ताजा हुई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
1998 की याद ताजा हुई
Updated Sun, 20 Aug 2017 11:43 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेंहदावल(संतकबीरनगर)। राप्ती के बढ़ते जलस्तर से लोगों को वर्ष 1998 में आई बाढ़ विभीषिका की याद ताजा हो गई। बानडूमर निवासी बुजुर्ग ग्रामीण देवीलाल ने बताया कि वैसे तो इस क्षेत्र में 1991 से लेकर 1998 तक बाढ़ की त्रासदी उन्होंने देखी। लेकिन, 1998 में स्थिति भयावह थी। इसे याद करने पर आज भी शरीर कांपने लगता है। बढया ठाठर के मघईपुर निवासी नरेश ने कहा कि 1992-93 में बेलौली गांव के पास तटबंध में कटान के कारण पूर्वी कछार क्षेत्र पूरी तरह से जलमग्न हो गया था। अचानक हुए इस कटान के कारण सुरक्षित ठिकानों पर भी नहीं पहुंच पाए थे। उसके बाद कभी बेलौली में कटान की स्थिति नही आई। वर्तमान में राप्ती उफान पर हैं। ऐसे में बाढ़ का डर बना हुआ है। करमैनी निवासी लालजी शाही का कहना हैं कि बाढ़ ग्रस्त इलाका बहुत समय पूर्व से चला आ रहा है। बताते है कि 1934,1938 में भी भीषण बाढ़ आई थी लेकिन वह 1998 की बाढ़ की विभीषिका की वह काली रात आज तक नहीं भूल पाए, जब करमैनी-बेलौली तटबंध सुरक्षित रहने के बाद भी सिद्धार्थनगर जनपद के बंजरहा कटान में मेंहदावल क्षेत्र को जलमग्न करते हुए राप्ती ने भारी तबाही मचाई थी। वैसे तो 1990-91, 92, 93 में भी यह क्षेत्र बाढ़ ग्रस्त रहा पर अत्यधिक कष्टदायी 1998 की वह रात थी, जब राप्ती ने पूर्वी उत्तरी कछार क्षेत्र को अपने आगोश में लेते हुए धनजन का जबरदस्त नुकसान किया था। बढया ठाठर निवासी मुन्नीलाल ने बताया कि वर्तमान में करमैनी-बेलौली की राप्ती नदी का जलस्तर 1998 की याद 19 वर्ष बाद ताजा कर रही है। जब यही राप्ती नदी कछार क्षेत्र में भारी तबाही के साथ सैकड़ों मकानों को बहाव में लेते हुए क्षेत्र को पूरी तरह मैरुंड कर दिया था। लोग तबाही के इस मंजर मे बदहवास हालत मे खुले आसमान के नीचे मेंहदावल शहर मे विभिन्न जगहों पर शरण लेकर महीनों खानाबदोश की जिन्दगी बसर किए थे। एक बार फिर नदी के बढते जलस्तर को देख कर वही खौफ कछारवासियों को सता रहा है।
विज्ञापन