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चादर चढ़ाकर पूरी की बाले मियां के लगन की रस्म
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Sun, 04 Mar 2018 07:39 PM IST
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चादरपोशी करने जाते जायरीन।
- फोटो : Amar Ujala
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सैय्यद सालार मसूद गाजी रहमतुल्लाह अलैह उर्फ बाले मियां के सालाना लगन की रस्म रविवार को बहरामपुर स्थित उनके दरगाह पर धूमधाम से पूरी की गई। इस बीच सुबह से ही दरगाह पर जायरीनों का तांता लगा रहा। लोगों ने चादर चढ़ाकर दुआएं मांगीं।
लगन कार्यक्रम का प्रारंभ सुबह फज्र की नमाज के बाद मजार शरीफ के गुस्ल से हुआ। इसके बाद कुरानख्वानी हुई। फिर दरगाह कमेटी की तरफ से परंपरागत चादर व गागर पेश कर लगन की रस्म अदा की गई। इस मौके पर देश में शांति, एकता व सौहार्द के लिए दुआएं र्हुइं। कव्वालों ने दरगाह पर नातिया कलाम पेश किया। इसके बाद दरगाह पर उमड़े जायरीनों की ओर से चादरपोशी का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर शाम तक जारी रहा। घोड़ों, बैंडबाजों, शहनाई, ढोल-नगाड़ों आदि के बीच नाचते-गाते, चादर लिए चले आ रहे हजारों की संख्या में जायरीन बाले मियां की दरगाह पर चादर चढ़ाते, दुआएं मांगते और प्रसाद ग्रहण करते नजर आए।
रिवायती रूप से लगन का कार्यक्रम संपन्न कराने वालों में सूरजकुंड के दीना कन्नौजिया, बसंतपुर के घूरे कन्नौजिया, बसंतपुर नरकटिया के अताउल्लाह उर्फ भल्लर, बक्शीपुर थवई का पुल के शिवराज, मियां बाजार दक्षिणी के राजन, बेनीगंज की पतरकी, अलीनगर के दिलीप, खोराबार के दिलीप कन्नौजिया, गुलहरिया के माली घोसी, देलई आदि शामिल रहे।
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लगन कार्यक्रम का प्रारंभ सुबह फज्र की नमाज के बाद मजार शरीफ के गुस्ल से हुआ। इसके बाद कुरानख्वानी हुई। फिर दरगाह कमेटी की तरफ से परंपरागत चादर व गागर पेश कर लगन की रस्म अदा की गई। इस मौके पर देश में शांति, एकता व सौहार्द के लिए दुआएं र्हुइं। कव्वालों ने दरगाह पर नातिया कलाम पेश किया। इसके बाद दरगाह पर उमड़े जायरीनों की ओर से चादरपोशी का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर शाम तक जारी रहा। घोड़ों, बैंडबाजों, शहनाई, ढोल-नगाड़ों आदि के बीच नाचते-गाते, चादर लिए चले आ रहे हजारों की संख्या में जायरीन बाले मियां की दरगाह पर चादर चढ़ाते, दुआएं मांगते और प्रसाद ग्रहण करते नजर आए।
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रिवायती रूप से लगन का कार्यक्रम संपन्न कराने वालों में सूरजकुंड के दीना कन्नौजिया, बसंतपुर के घूरे कन्नौजिया, बसंतपुर नरकटिया के अताउल्लाह उर्फ भल्लर, बक्शीपुर थवई का पुल के शिवराज, मियां बाजार दक्षिणी के राजन, बेनीगंज की पतरकी, अलीनगर के दिलीप, खोराबार के दिलीप कन्नौजिया, गुलहरिया के माली घोसी, देलई आदि शामिल रहे।
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