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भारतीय संस्कृति में त्याग के साथ उपभोग पर बल : शिवप्रताप
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Mon, 27 Nov 2017 01:49 AM IST
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी में भूगोल विभाग ने संगोष्ठी आयोजित की।
- फोटो : Amar Ujala
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समाज के निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को गरिमामय जीवन देने के लिए जरूरी है कि व्यक्तिगत स्वार्थों की तिलांजलि देकर राष्ट्र व समाज हित में निर्णय लिया जाए। देश के विकास का यह मूलमंत्र पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद में निहित है।
ये बातें केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री शिवप्रताप शुक्ल ने रविवार को गोरखपुर यूनिवर्सिटी के संवाद भवन में भूगोल विभाग की तीन दिवसीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में कहीं। ‘पूर्वांचल के समुचित विकास का ब्लूप्रिंट’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ने त्याग के साथ उपभोग को अपनाने पर बल देकर उपभोक्तावाद को नियंत्रित करने पर जोर दिया है। कहा कि दीनदयाल जी का एकात्म मानववाद भी सर्वे भवंतु सुखिन: की अवधारणा पर आधारित है। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय भूगोल परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जगदीश सिंह ने कहा कि आज का भौतिकवादी युग समृद्धि को विकास का माध्यम मान रहा है, जबकि संविकास की अवधारणा के अनुसार विकास के लिए समृद्धि जरूरी है, मगर पर्याप्त नहीं। विकास के लिए स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा व रोजगार सृजन को आधार मान कर ही पूर्वांचल के विकास का ब्लूप्रिंट तैयार हो सकता है।
विशिष्ट अतिथि एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो. श्रीनिवास सिंह ने विकास के लिए सौर ऊर्जा को अपरिहार्य बताया। डॉ. शिवशंकर सिंह, डॉ. एसएन सिंह, डॉ. वीरेंद्र सिंह, डॉ. ओपी सिंह, डॉ. लल्लन सिंह, डॉ. सतीश राय, डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. काशीनाथ सिंह, डॉ. तेज प्रताप सिंह, कौशल सिंह उर्फ मुन्ना सिंह आदि को सम्मानित किया गया। अतिथियों का स्वागत अध्यक्ष प्रो. एसके दीक्षित ने किया। संचालन समन्वयक प्रो. शिवाकांत सिंह व आभार ज्ञापन प्रो. नूतन त्यागी ने किया। तकनीकी सत्र की अध्यक्षता जयपुर विश्वविद्यालय के प्रो. धर्मेंद्र सिंह और अध्यक्षता डॉ. काशीनाथ सिंह ने की। संयोजक प्रो. केएन सिंह ने बताया कि पहले दिन कुल नौ शोध पत्र पढ़े गए।
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ये बातें केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री शिवप्रताप शुक्ल ने रविवार को गोरखपुर यूनिवर्सिटी के संवाद भवन में भूगोल विभाग की तीन दिवसीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में कहीं। ‘पूर्वांचल के समुचित विकास का ब्लूप्रिंट’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ने त्याग के साथ उपभोग को अपनाने पर बल देकर उपभोक्तावाद को नियंत्रित करने पर जोर दिया है। कहा कि दीनदयाल जी का एकात्म मानववाद भी सर्वे भवंतु सुखिन: की अवधारणा पर आधारित है। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय भूगोल परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जगदीश सिंह ने कहा कि आज का भौतिकवादी युग समृद्धि को विकास का माध्यम मान रहा है, जबकि संविकास की अवधारणा के अनुसार विकास के लिए समृद्धि जरूरी है, मगर पर्याप्त नहीं। विकास के लिए स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा व रोजगार सृजन को आधार मान कर ही पूर्वांचल के विकास का ब्लूप्रिंट तैयार हो सकता है।
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विशिष्ट अतिथि एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो. श्रीनिवास सिंह ने विकास के लिए सौर ऊर्जा को अपरिहार्य बताया। डॉ. शिवशंकर सिंह, डॉ. एसएन सिंह, डॉ. वीरेंद्र सिंह, डॉ. ओपी सिंह, डॉ. लल्लन सिंह, डॉ. सतीश राय, डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. काशीनाथ सिंह, डॉ. तेज प्रताप सिंह, कौशल सिंह उर्फ मुन्ना सिंह आदि को सम्मानित किया गया। अतिथियों का स्वागत अध्यक्ष प्रो. एसके दीक्षित ने किया। संचालन समन्वयक प्रो. शिवाकांत सिंह व आभार ज्ञापन प्रो. नूतन त्यागी ने किया। तकनीकी सत्र की अध्यक्षता जयपुर विश्वविद्यालय के प्रो. धर्मेंद्र सिंह और अध्यक्षता डॉ. काशीनाथ सिंह ने की। संयोजक प्रो. केएन सिंह ने बताया कि पहले दिन कुल नौ शोध पत्र पढ़े गए।
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