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‘भारतीय संस्कृति का समूचा बोध देती हैं मुक्तिबोध की कविताएं’
Updated Mon, 13 Nov 2017 09:42 PM IST
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कार्यक्रम में मौजूद अतिथि।
- फोटो : Amar Ujala
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गोरखपुर। यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग की ओर से कवि गजानन माधव मुक्तिबोध की जन्मशताब्दी के अवसर पर संवाद भवन में व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के आचार्य प्रो. अवेधश प्रधान ने कहा कि मुक्ति बोध की कविता को देह की सीमा नहीं बांधा जा सकता है। भारतीय कविता और संस्कृति का समूचा बोध उनकी कविताओं में दिखता है। मुक्तिबोध अपनी कविताओं के माध्यम से जगत समीक्षा ही नहीं बल्कि आत्मसमीक्षा भी करते थे।
विशिष्ट अतिथि मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी शिक्षक प्रो. रतन कुमार पांडेय ने कहा कि मुक्तिबोध जनता के कवि थे, जनता के बीच जिये और जनता के लिए संघर्ष करते हुए विदा हुए। सच को सच की तरह लिखने की सच्ची ताकत मुक्तिबोध में ही थी। हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. चितरंजन मिश्र ने कहा कि मुक्तिबोध जीवन के भीतरी और बाहरी संघर्ष को उद्घाटित करने वाले कवि हैं। जिन्होंने आदमी की दिमाग की जटिलता को अपनी कविताओं के माध्यम से उद्घाटित करने की कोशिश की। अध्यक्षता करते हुए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि मुक्तिबोध का पूरा साहित्य एक दूसरे से जुड़ा हुआ है। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो. मंजु त्रिपाठी और आभार ज्ञापन प्रो. अनिल कुमार राय ने किया।
इस अवसर पर प्रभारी कुलपति गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रो. एसके दीक्षित, प्रो. अनुपम नाथ त्रिपाठी, प्रो. राजवंत राव, प्रो. विनोद कुमार सिंह, प्रो. रविशंकर सिंह, प्रो. अवधेश कुमार तिवारी, देवेंद्र आर्य आदि मौजूद थे।
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विशिष्ट अतिथि मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी शिक्षक प्रो. रतन कुमार पांडेय ने कहा कि मुक्तिबोध जनता के कवि थे, जनता के बीच जिये और जनता के लिए संघर्ष करते हुए विदा हुए। सच को सच की तरह लिखने की सच्ची ताकत मुक्तिबोध में ही थी। हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. चितरंजन मिश्र ने कहा कि मुक्तिबोध जीवन के भीतरी और बाहरी संघर्ष को उद्घाटित करने वाले कवि हैं। जिन्होंने आदमी की दिमाग की जटिलता को अपनी कविताओं के माध्यम से उद्घाटित करने की कोशिश की। अध्यक्षता करते हुए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि मुक्तिबोध का पूरा साहित्य एक दूसरे से जुड़ा हुआ है। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो. मंजु त्रिपाठी और आभार ज्ञापन प्रो. अनिल कुमार राय ने किया।
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इस अवसर पर प्रभारी कुलपति गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रो. एसके दीक्षित, प्रो. अनुपम नाथ त्रिपाठी, प्रो. राजवंत राव, प्रो. विनोद कुमार सिंह, प्रो. रविशंकर सिंह, प्रो. अवधेश कुमार तिवारी, देवेंद्र आर्य आदि मौजूद थे।
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