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राजा को मनाने के लिए रानी ने सागर तालाब में बनाया था वृदांवन

Mon, 29 Jun 2020 10:33 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jun 2020 10:33 PM IST
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The queen had made Vrindavan in Sagar Pond to persuade the king.
गोंडा। 18वीं शताब्दी में तत्कालीन गोंडा के राजा नरेश गुमान सिंह मथुरा गए थे और वहां वृंदावन की आभा से मुग्ध होकर लौट नहीं रहे थे। उन्हें मनाने के लिए उनकी पत्नी रानी भगवंत कुवंरि ने मथुरा वृंदावन की तर्ज पर सागर तालाब के बीच में टापू पर गोवर्धन मंदिर का निर्माण कराया था। सागर तालाब राज परिवार का तालाब था और इसका निर्माण 17 वीं गोंडा के राजा ने बनवाया था। बाद में रानी ने इसे काल्पनिक वृंदावन के रुप में तैयार किया। जिससे राजा वापस आए और फिर यहां दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा होता थी।
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नगर के सागर तालाब का इतिहास बहुत पुराना है। इसका निर्माण 17वीं शताब्दी में गोंडा नरेश शिव प्रसाद सिंह ने कराया था। वह कृष्ण के अनन्य भक्त थे और इसी के समीप भव्य मंदिरों का भी निर्माण कराया था। तत्पश्चात राजा गुमान सिंह की पत्नी रानी भगवंत कुंवरि ने इसे काल्पनिक वृंदावन का रूप दिया। जनश्रृति के अनुसार, रानी भगवंत कुंवरि के पति राजा गुमान सिंह मथुरा वृंदावन दर्शन के लिए गए। वहां का मनमोहक दृश्य उन्हें भा गया और वह वहीं रुक गए। वह वहां से वापस आने के लिए तैयार नहीं हो रहे थे तब रानी भगवंत कुंवरि ने गोंडा में भी मथुरा के वृंदावन की भांति एक काल्पनिक वृंदावन स्थापित करने का वचन दिया। 18वीं शताब्दी में रानी भगवंत कुंवरि ने सागर तालाब के मध्य एक टापू पर गोवर्धन पर्वत, कृष्ण कुंज, श्याम सदन, गोपाल बरसाना आदि का निर्माण कराया। जो आज भी सागर तालाब के बीचो बीच खंडहर के रूप में अभी है।
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रखरखाव के अभाव में मिट रही प्रेम की निशानी
गोंडा नरेश महाराजा देवी बख्श सिंह के शासनकाल तक सागर तालाब और काल्पनिक वृंदावन दर्शनीय स्थल रहा। उसे ठीक भी कराया गया। उनके नेपाल जाने के बाद ब्रिटिश हुकूमत में राजा के इस अद्भुत निर्माण की दुर्गति शुरू हो गई और देखरेख के आभाव में धीरे-धीरे यह खंडहर में तब्दील होता गया। आजादी के बाद भी राज परिवार की इस अलौकिक निशानी के संरक्षण का कोई खास प्रयास नहीं किया गया। नतीजन यहां बड़े-बड़े पेड़ और झाड़ियां उग गए और जहरीले जीव जंतुओं ने भी यहां डेरा जमा लिया।
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सुंदरीकरण की पहल तो हुई पर नहीं मिल सका मुकाम
गोंडा रियासत के ऐतिहासिक महत्व की एक प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला के अद्भुत नमूने काल्पनिक वृंदावन और सागर तालाब के सुंदरीकरण के लिए वर्ष 1999-2000 में तत्कालीन जिलाधिकारी मार्कण्डेय सिंह ने पहली बार पहल की और 16 लाख 40 हजार की लागत से गोंडा वन प्रभाग के तत्कालीन प्रभागीय वनाधिकारी के मुरलीधर राव ने विस्तृत कार्ययोजना बनाई। इसमें टापू पर ऐतिहासिक भवन मंदिर आदि के मरम्मत पर डेढ़ लाख, टापू की झाड़ी सफाई एवं वृक्षों की डाल आदि कटाई पर 40 हजार, सागर ताल के चारों ओर प्रस्तावित सड़क पर मिट्टी पटाई एवं सीसी रोड के निर्माण पर पांच लाख 85 हजार का बजट दिया।
सागर ताल में पाइप की रेलिंग और बाउंड्रीवाल के निर्माण पर तीन लाख, सीढ़ियों के मरम्मत और सीमेंटेड बेंचों के निर्माण पर एक लाख दस हजार, इक्वेरियम, मछलियों की खरीद तथा ग्रिल,फर्श एवं सोलिंग आदि के निर्माण पर तकरीबन एक लाख, सागर तालाब बच्चों के मनोरंजन के लिए पैडल बोट क्रय, फइवार बोट की मरम्मत पर दो लाख, चिलड्रेन पार्क हेतु आपरोटर्स क्रय के लिए 50 हजार एवं लान के विकास, फूलदार पौधों के लगाने पर 50 हजार रुपये व्यय का प्रावधान किया गया था। तालाब के उत्तर ओर एक प्लेटफार्म का निर्माण शुरू भी कराया गया किंतु इसी बीच उनका स्थानांतरण हो जाने से योजना ठप हो गई। वर्ष 2011 में डीएम राम बहादुर और फिर डीएम डा. रोशन जैकब ने यहां विकास कराए और दीपदान की पहल शुरू की। बाद में डीएम अजय उपाध्याय की पहल पर कई कार्य हुए लेकिन फिर कार्य रुक गया।
मार्निंग वाक के लिए रोड़ व हुई सफाई, नही हो सका रखरखाव
सागर तालाब को अतिक्रमण से मुक्त कराकर चारों ओर मार्ग का निर्माण कराया। टापू की सफाई तो हो गई लेकिन गोवर्धन पर्वत, श्याम सदन, मंदिर और कृष्ण कुंज के मरम्मत नहीं हो पाया। इसका परिणाम रहा कि ये सब आज भी ज्यों के त्यों बने हुए हैं। इक्वेरियम और पैडल बोट, पार्क आदि सभी रखरखाव के अभाव में समाप्त होते गए।

विधायक ने की पहल लेकिन फंसा है विकास का काम
वीते वर्ष 2018 में फिर विधायक प्रतीक भूषण शरण सिंह ने सागर तालाब के विकास की मुहिम को तेज किया। उनके प्रस्ताव पर 90 लाख रुपये का बजट भी स्वीकृत हुआ। पर्यटन विभाग को कार्य कराना था लेकिन अब पर्यटन विभाग आगे कार्य नही कराना चाह रहा है। ऐसे में एक बार भी एतिहासिक स्थल के विकास की योजना ठप्प हो गई है। माना जा रहा है कि कार्य न हुआ तो गोवर्धन पर्वत व मंदिरों के अस्तित्व पर ही खतरा बढ़ जाएगा। विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने जिले में दौरे पर आए मुख्यमंत्री को पूरी स्थिति से अवगत कराते हुए सागर तालाब के जीर्णोद्धार की योजना की मांग किया है। एक फिर लोगों में उम्मीद जगी है।
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