{"_id":"68bdca44804ca3688f0a9b9e","slug":"the-doors-of-temples-remained-closed-due-to-sutak-on-lunar-eclipse-gonda-news-c-100-1-slko1026-143504-2025-09-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gonda News: चंद्र ग्रहण पर सूतक के चलते बंद रहे मंदिरों के कपाट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gonda News: चंद्र ग्रहण पर सूतक के चलते बंद रहे मंदिरों के कपाट
Sun, 07 Sep 2025 11:39 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 07 Sep 2025 11:39 PM IST
विज्ञापन
ग्रहण के कारण बरखंडीनाथ मंदिर में बंद कपाट। - संवाद
गोंडा। चंद्र ग्रहण को लेकर जिले के प्रमुख मंदिरों में धार्मिक परंपराओं का पालन किया गया। रविवार को सूतक काल आरंभ होते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। शहर के दुखहरण नाथ मंदिर, काली भवानी मंदिर, खैरा भवानी मंदिर सहित अन्य देवालयों में दोपहर बाद से ही पूजा-अर्चना और दर्शन बंद कर दिया गया। मंदिरों में नियमित रूप से होने वाली आरती और भजन-कीर्तन भी रोक दिया गया।
खरगूपुर संवाद के अनुसार, ऐतिहासिक पृथ्वीनाथ मंदिर के महंत जगदंबा प्रसाद तिवारी ने बताया कि चंद्र ग्रहण शुरू होने से पहले ही सूतक लग गया है। इसके चलते पृथ्वीनाथ व झाली धाम मंदिर का मुख्यद्वार बंद कर दिया गया। इस दौरान यहां दर्शन व पूजन अर्चन बंद रहा। महंत के अनुसार, चंद्र ग्रहण रात्रि 09:57 बजे से शुरू होकर आठ सितंबर को रात्रि 01:27 बजे समाप्त हुआ। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर के कपाट खोले जाएंगे और शुद्धिकरण के बाद विशेष पूजा-अर्चना कर पुनः नियमित दर्शन शुरू होंगे।
हलधरमऊ संवाद के अनुसार, सूतक लगते ही पुजारियों ने मंदिरों के कपाट बंद कर दिए। बरखंडी नाथ मंदिर के महंत सुनील पुरी ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल अशुभ माना जाता है। इसी कारण मंदिरों में पूजा-अर्चना व अन्य धार्मिक कार्य वर्जित रहते हैं। महंत ने बताया कि ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर के द्वार पुनः खोले जाएंगे और गंगा जल, दूध व पंचामृत से शिवलिंग का विशेष शुद्धिकरण किया जाएगा। इसके बाद आरती व भजन-कीर्तन के साथ श्रद्धालु भगवान शिव का दर्शन करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
खरगूपुर संवाद के अनुसार, ऐतिहासिक पृथ्वीनाथ मंदिर के महंत जगदंबा प्रसाद तिवारी ने बताया कि चंद्र ग्रहण शुरू होने से पहले ही सूतक लग गया है। इसके चलते पृथ्वीनाथ व झाली धाम मंदिर का मुख्यद्वार बंद कर दिया गया। इस दौरान यहां दर्शन व पूजन अर्चन बंद रहा। महंत के अनुसार, चंद्र ग्रहण रात्रि 09:57 बजे से शुरू होकर आठ सितंबर को रात्रि 01:27 बजे समाप्त हुआ। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर के कपाट खोले जाएंगे और शुद्धिकरण के बाद विशेष पूजा-अर्चना कर पुनः नियमित दर्शन शुरू होंगे।
विज्ञापन
हलधरमऊ संवाद के अनुसार, सूतक लगते ही पुजारियों ने मंदिरों के कपाट बंद कर दिए। बरखंडी नाथ मंदिर के महंत सुनील पुरी ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल अशुभ माना जाता है। इसी कारण मंदिरों में पूजा-अर्चना व अन्य धार्मिक कार्य वर्जित रहते हैं। महंत ने बताया कि ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर के द्वार पुनः खोले जाएंगे और गंगा जल, दूध व पंचामृत से शिवलिंग का विशेष शुद्धिकरण किया जाएगा। इसके बाद आरती व भजन-कीर्तन के साथ श्रद्धालु भगवान शिव का दर्शन करेंगे।
विज्ञापन